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Mango : पेड़ों पर बौर तो खूब आ रहे थे नजर, फिर भी अब तक बाजार से नदारद हैं आम, आखिर क्या है इसकी वजह…?

अभी बाजार में केवल बाहर से आने वाले आम ही नजर आ रहे हैं। इनकी कीमत भी काफी अधिक है।
  • लोकेश वर्मा, मलकापुर
    हर साल अभी तक लंगड़ा, देसी किस्म, तोताफरी, आम्रपाली, मल्लिका, चौसा और दशहरी जैसी किस्मों के आमों (mango) से बाजार सज जाता था। लेकिन इस साल नजारा कुछ अलग ही है। अभी तक आम के दीदार होना तो दूर लोग कैरी तक के लिए तरसते देखे जा रहे हैं। यह स्थिति भी तब है जब आम में बौर बहुत ही अच्छे आए थे।

    इस साल आम के पेड़ में बौर देख कर किसान काफी खुश थे। उन्हें आम की अच्छी फसल होने की उम्मीद थी। मंजर से पेड़ पूरी तरह लदा हुआ था। मंजर लगने के साथ ही उसमें फल भी लगे पर अधिकांश पेड़ों में मटर के आकार के फल होने के बाद धीरे-धीरे आधे से अधिक फल पूर्ण रूप से गिरकर बर्बाद हो गए। यही कारण है कि अप्रैल का महीना खत्म होने की कगार पर है। लेकिन बाजार में अभी भी आम की आवक काफी कम मात्रा में हो रही है।

    आम विक्रेताओं का कहना है कि जो भी आम फिलहाल उपलब्ध है वे भी बाहर से ही आ रहे हैं। यही कारण है कि इनके दाम भी काफी ज्यादा है। कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि फलों का राजा आम, आम आदमी की पहुंच से फिलहाल बाहर ही है। सामान्यतः इस समय तक बाजार में आम की आवक अच्छी हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।

    आम के व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण आम की पैदावार पर असर पड़ा है। जनवरी से लेकर अभी तक मौसम में बार-बार बदलाव देखने को मिला है। आम में बौर लगने के बाद तेज हवाएं चलीं और हल्की बारिश भी हुई। इस कारण तापमान में भी बदलाव हो रहा है। तेज हवाओं के चलने से आम के मंजर भी झड़ गए हैं।

    किसान आशीष वर्मा ने बताया कि आम के फलों का झड़ना एक बहुत ही गंभीर समस्या है। आम में लगभग 99% फल विभिन्न चरणों में गिर जाते हैं। मात्र 1% फल ही परिपक्व अवस्था तक पहुंच पाते हैं। फलों का गिरना अपर्याप्त परागण, पराग कीटों की कमी, फलों में पोषण तत्वों की कमी और अचानक आई गर्मी से बगीचे में नमी की कमी के कारण प्रभावित होता है। लगभग आम की सभी किस्मों में यह समस्या पाई जाती है। इस बार फूल लगने के समय ही तापमान में वृद्धि हो गई थी।

    मंडियों में आम की आवक काफी कम

    आम अब तक तैयार हो जाते हैं, लेकिन लगातार मौसमी बदलाव के कारण अभी तक आम पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं। इस कारण आवक काफी कम है।

    मौसमी बदलाव के कारण एक महीने की देरी

    व्यापारियों का कहना है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक स्थिति में सुधार की संभावना है। मौसमी बदलाव के कारण आम के पकने में इस बार एक महीने की देरी हुई है। इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है. इस समय आम की कीमत 60से 100 रुपए किलो होती थी, लेकिन कम आवक के कारण कीमतों में 75 फीसदी तक बढ़ोतरी है।

    आवक बढ़ने से कम होगी कीमतें

    अगले महीने के अंत तक आमों की आवक शुरू हो जाएगी लंगड़ा, देसी किस्म के आम्रपाली, मल्लिका और दशहरी जैसे आम भी बाजार में उपलब्ध हो जाएंगे। जिसके बाद फलों के राजा की कीमत स्थिर हो जाएगी। अगर आप आम के शौकीन हैं और सस्ते दरों पर आम खाना चाहते हैं तो आपके लिए कुछ दिन इंतजार करना ही बेहतर होगा।

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  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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