बैतूल में अनूठी पहल : नहीं आ पा रहे थे दिव्यांग तो अफसर पहुंचे उनके घर और वीसी के जरिए बनाए सर्टिफिकेट

असहाय दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने के लिए जिले में विशेष पहल की गई है। दूरस्थ ग्राम झल्लार एवं रामजीढाना में निवासरत पांच दिव्यांग चलने-फिरने में असहाय थे। इन दिव्यांगों का मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं बन पाने के कारण उनको सामाजिक सुरक्षा नि:शक्त पेंशन योजना एवं सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस के ध्यान में जब यह बात आई तो उन्होंने इस समस्या को गंभीरता से लिया एवं सामाजिक न्याय विभाग को दिव्यांगजनों के हित में उचित कार्रवाई के निर्देश दिए। सामाजिक न्याय विभाग ने तत्काल प्रयास करके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सा बोर्ड तक इनकी वस्तुस्थिति पहुंचाई और मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया। अब ये दिव्यांग पेंशन एवं अन्य योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

सामाजिक न्याय विभाग के उप संचालक संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि उक्त दिव्यांगजनों के मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के लिए जनपद पंचायत भैंसदेही के सीईओ अंशमुन राज के सहयोग से की गई कार्रवाई के तुरंत परिणाम भी मिले और उनके मेडिकल सर्टिफिकेट शीघ्रता से तैयार हो गए।
वीडियो कांफ्रेंस से बताए हालात
दिव्यांगों के निवास स्थल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल बोर्ड की संतुष्टि के उपरांत रामजीढाना निवासी मंगाय पति शिवलाल पांसे, बिरजू पिता दामजी उइके, ज्ञानेश्वरी पिता रमेश, झल्लार निवासी रिहान खान पिता युनूस खान एवं शेख असलम पिता स्वर्गीय शेख मेहबूब के मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा दिए गए हैं।

जल्द मुहैया करवाए जाएंगे उपकरण
श्री श्रीवास्तव ने बताया कि इन सभी दिव्यांगों को सामाजिक सुरक्षा नि:शक्त पेंशन योजना मंजूर की जा रही है। साथ ही शीघ्र आवश्यक सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सामाजिक न्याय विभाग की इस पहल से दिव्यांगजनों में खुशी की लहर है और अब वे इस बात के प्रति आश्वस्त हैं कि उनको सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
बैतूल तक नहीं आ पाते दिव्यांग
सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र होना जरुरी है। यह प्रमाण पत्र जिला अस्पताल में लगने वाले मेडिकल बोर्ड द्वारा बनवाए जाते हैं। कई दिव्यांगों की स्थिति इतनी खराब होती है कि वे बैतूल तक नहीं आ पाते। शारीरिक रूप से अक्षम होने के अलावा उनकी माली हालत भी खराब होती है।
यही वजह है कि पात्र होते हुए भी उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। प्रशासन की इस पहल से अब उन दिव्यांगों को भी आस बंध गई है, जो बैतूल नहीं आ सकने के कारण अभी तक योजनाओं के लाभ से महरूम थे।



