ब्रांडिंग के लिए फ्री हैंड या जमीन पर होना है कार्रवाई, एक पखवाड़े में शुरुआत तक नहीं

राज्य शासन द्वारा प्रदेश भर में माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाकर ताबड़तोड़ अंदाज में कार्यवाही की जा रही है। इसी तारतम्य में बैतूल कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने भी विगत 24 जनवरी को जिले के सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों (SDM) और खनिज विभाग (Mineral Department) को बड़े रेत माफियाओं (sand mafia) के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने फ्री हैंड दिया था।
इसके बाद ऐसा लग रहा था कि जिले में बड़े पैमाने पर कार्यवाही होगी और अवैध रेत उत्खनन (illegal sand mining) और परिवहन जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा। लेकिन, मजे की बात है कि इस एक पखवाड़े में जिले के किसी भी क्षेत्र में ऐसी एक भी कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों के इस निष्क्रिय रवैये से जिला प्रशासन की मंशा को पलीता ही लग रहा है।
एक पखवाड़े पहले हुई बैठक में कलेक्टर श्री बैंस ने जिले में अवैध रेत के उत्खनन एवं परिवहन पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि खनिज विभाग के अलावा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी अवैध खनिज के मामलों में कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड हैं। खास तौर पर बड़े रेत माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएं।
कलेक्टर ने मोरंड नदी से हो रहे रेत के अवैध उत्खनन को गंभीरता से लेते हुए यहां से नियम विरुद्ध खनन कर रहे लोगों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। साथ ही रेत परिवहन से धपाड़ा मार्ग के क्षतिग्रस्त होने की तरफ भी उन्होंने अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया था और कहा था कि इस मार्ग से अवैध रेत परिवहन को तत्काल रोका जाएं।
जाहिर है कि कलेक्टर श्री बैंस को यदि साफ-साफ यह निर्देश देने पड़े थे तो स्पष्ट है कि उनके पास इन गतिविधियों का पुख्ता इनपुट पहुंचा ही होगा। यही वजह है कि उन्हें साफतौर से बड़े रेत माफिया, सख्ती से रोके और फ्री हैंड जैसी बातें कहनी पड़ी। कलेक्टर की ओर से सख्त निर्देश और खुली छूट मिलने के बाद तो बाकायदा अभियान छिड़ जाना था, लेकिन आश्चर्य की बात है कि इतने दिनों में ऐसी कोई भी कार्यवाही कहीं पर भी होने की खबर नहीं है।
इस बीच घोड़ाडोंगरी क्षेत्र में एक कार्यवाही जरूर हुई, लेकिन वह कार्यवाही भी प्रशासन नहीं बल्कि पुलिस विभाग द्वारा की गई थी। पुलिस विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख था कि एसपी सिमाला प्रसाद के निर्देश पर उक्त कार्यवाही की गई है।
ऐसा भी नहीं है कि जिले में ऐसी गतिविधियां बिल्कुल नहीं चल रही हैं। बल्कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए दिन अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की खबरें आती रहती हैं। प्रशासनिक अधिकारी या खनिज अधिकारी खुद इन पर संज्ञान लेना तो दूर कलेक्टर के सख्त निर्देशों तक को कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। यह आम लोगों के लिए भी ताज्जुब का विषय बन गया है।
खनिज विभाग का तो अस्तित्व ही नहीं आता नजर
पिछले कुछ समय से जिले में खनिज विभाग का तो कोई अस्तित्व ही नजर नहीं आ रहा है। पहले आए दिन कहीं ना कहीं अवैध खनिज उत्खनन या परिवहन पर वाहन पकड़ कर कार्यवाही के मामले सामने आते रहते थे। अब तो लंबे समय से ऐसी किसी कार्यवाही की बातें तक सुनाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि इस बारे वे शिकायतें करते हैं या सूचना देते हैं तो इस पर तक कोई कार्यवाही विभागीय अधिकारी नहीं करते हैं। अब तो विभाग से पूर्व में हुई कार्यवाही पर कलेक्टर या एडीएम कोर्ट से होने वाले जुर्माने भर के प्रेस नोट भर कभी कभार जारी होते हैं। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली तो पूरी तरह संदेह के दायरे में है।



