West Asia Tension Rice Export: पश्चिम एशिया में तनाव से चावल की कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर, सरकार ने बुलाई बैठक, होंगे बड़े फैसले
West Asia Tension Rice Export: समुद्री मार्गों पर खतरा, निर्यातकों की चिंता बढ़ी, माल ढुलाई और बीमा दरें बढ़ने की आशंका

West Asia Tension Rice Export: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत भी इस असर से अछूता नहीं है। बदलती परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय कारोबार पर संभावित प्रभाव का आकलन करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।
वाणिज्य मंत्रालय ने की यह पहल
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को एक अहम बैठक आयोजित की है। इसमें निर्यातक संगठनों, शिपिंग कंपनियों और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार तेजी से बदल रहे हालातों के मद्देनजर यह बैठक जरूरी समझी गई है। कुछ प्रतिनिधि बैठक में प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ेंगे।
महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर मंडराता खतरा
निर्यातकों ने आशंका जताई है कि संघर्ष की स्थिति लंबी खिंचती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों पर असर पड़ सकता है। ये मार्ग भारत को खाड़ी देशों के साथ-साथ यूरोप और उत्तरी अमेरिका से जोड़ते हैं। यदि इन रास्तों पर आवागमन बाधित होता है तो भारतीय निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा।
लॉजिस्टिक व्यवस्था में भी रुकावट
भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव दिखने लगा है। कई उड़ानों के मार्ग बदले जा रहे हैं और लाल सागर व खाड़ी क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर अनिश्चितता बढ़ रही है। उन्होंने चेताया कि यदि जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे से होकर लंबा रास्ता अपनाना पड़ा तो यूरोप और अमेरिका पहुंचने वाले माल को 15 से 20 दिन अतिरिक्त लग सकते हैं।
बढ़ सकती है लागत और बीमा प्रीमियम
इस संभावित बदलाव से माल ढुलाई दरों में तेज वृद्धि हो सकती है। बीमा प्रीमियम में भी उछाल आने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि नई दरों, वैकल्पिक मार्गों और उपलब्ध जहाजों की स्थिति स्पष्ट होने में कुछ समय लग सकता है, जिससे कारोबारी अनिश्चितता बनी रहेगी।
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चावल निर्यातकों के लिए विशेष सलाह
पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति को देखते हुए इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन ने अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी के कुछ क्षेत्रों के लिए नए सीआईएफ सौदों से फिलहाल दूरी बनाने को कहा है। संगठन ने सुझाव दिया है कि निर्यातक एफओबी शर्तों पर अनुबंध करें, ताकि अंतरराष्ट्रीय खरीदार माल ढुलाई और बीमा का जोखिम स्वयं उठाए।
बंकर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
निर्यातकों के निकाय ने संकेत दिया है कि ईरान और यूएई से जुड़े घटनाक्रम के कारण जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमत बढ़ सकती है। कंटेनर और बल्क फ्रेट की दरों में अचानक वृद्धि संभव है। बीमा लागत में भी तेज उछाल से सौदों की कुल लागत प्रभावित होगी।
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चावल निर्यात पर बड़ा प्रभाव संभव
भारत के कुल चावल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जाता है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान पश्चिम एशिया को 39 लाख टन और अफ्रीका को 71.6 लाख टन चावल निर्यात किया गया। ऐसे में यदि समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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