MP Private School Rules: एमपी में निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती, अब पेरेंट्स बाजार से खरीद सकेंगे किताबें और यूनिफार्म
MP Private School Rules: Strict action against the arbitrariness of private schools in MP, now parents will be able to buy books and uniforms from the market.

MP Private School Rules: हर नए शिक्षा सत्र में महंगी किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म को लेकर परेशान रहने वाले अभिभावकों को इस बार एमपी में बड़ी राहत मिली है। इंदौर जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की एकाधिकार व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूल किसी भी अभिभावक को तय दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था इसी सत्र से लागू कर दी गई है।
स्कूलों की तानाशाही पर प्रशासन का फैसला
इंदौर जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एक दंडात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (1) और (2) के तहत लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि हर वर्ष किताबों और ड्रेस को लेकर अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक दबाव झेलना पड़ता था, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है। आदेश का पालन सभी निजी स्कूलों को अनिवार्य रूप से करना होगा।
वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर देना होगा विवरण
नए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अपनी सभी कक्षाओं की अनिवार्य पुस्तकों की सूची स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके साथ ही वही सूची स्कूल परिसर के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा करनी होगी, ताकि अभिभावक आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ने से अनावश्यक विवाद और अतिरिक्त खर्च पर रोक लगेगी।
किताब और यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता
अब स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी खास दुकान या विक्रेता से किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार बाजार में उपलब्ध किसी भी विक्रेता से सामग्री खरीद सकते हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक स्कूल की मान्यता के नियमों के तहत उसकी वेबसाइट होना अनिवार्य है, जिस पर आवश्यक शैक्षणिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
विक्रेताओं की जानकारी भी करनी होगी सार्वजनिक
प्रशासन ने यह भी तय किया है कि सत्र शुरू होने से दो माह पहले कम से कम तीन पुस्तक और यूनिफॉर्म विक्रेताओं के नाम स्कूल की वेबसाइट पर डालना अनिवार्य होगा। अभिभावक 15 जून 2026 तक आवश्यक किताबें और कॉपियां खरीद सकेंगे। किसी भी विक्रेता को निर्धारित पाठ्यक्रम से असंबंधित सामग्री को किताबों के सेट में जोड़कर कीमत बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी विद्यार्थी के पास पुरानी किताबें उपलब्ध हैं तो उसे केवल जरूरत की किताबें ही उपलब्ध कराई जाएंगी।
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कॉपियों और पुस्तकों पर स्पष्ट जानकारी अनिवार्य
नोटबुक पर ग्रेड, गुणवत्ता, आकार, मूल्य और पृष्ठ संख्या स्पष्ट रूप से अंकित करना जरूरी होगा। किसी भी पुस्तक या कॉपी पर स्कूल का नाम छापने की अनुमति नहीं दी गई है। कवर पर भी विद्यालय का नाम मुद्रित नहीं किया जाएगा। इससे अभिभावकों को स्वतंत्र रूप से सामग्री खरीदने में आसानी होगी।
यूनिफॉर्म में भी तय सीमा
नियमों के तहत कोई भी स्कूल दो से अधिक प्रकार की यूनिफॉर्म निर्धारित नहीं कर सकेगा। ब्लेजर या स्वेटर को अलग श्रेणी में रखा गया है। साथ ही यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर भी रोक लगाई गई है। स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि तय की गई यूनिफॉर्म कम से कम तीन वर्ष तक समान रहे, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
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आदेश के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यदि कोई स्कूल या संबंधित संस्था इन निर्देशों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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