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MP Township New Rules: एमपी में टाउनशिप नियमों में बड़ा बदलाव, किसानों और निजी व्यक्तियों को भी मिलेगा मौका, लोगों को मिलेंगे सस्ते घर

MP Township New Rules: नई एकीकृत टाउनशिप नीति लागू, लैंड पुलिंग की अनुमति, 30 मीटर सड़क अनिवार्य और तय किए गए सख्त वित्तीय मानक

MP Township New Rules: एमपी में टाउनशिप नियमों में बड़ा बदलाव, किसानों और निजी व्यक्तियों को भी मिलेगा मौका, लोगों को मिलेंगे सस्ते घर
MP Township New Rules: एमपी में टाउनशिप नियमों में बड़ा बदलाव, किसानों और निजी व्यक्तियों को भी मिलेगा मौका, लोगों को मिलेंगे सस्ते घर

MP Township New Rules: मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी विकास को व्यवस्थित करने के लिए टाउनशिप से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। अब सिर्फ पारंपरिक कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि किसान, किसानों के समूह और निजी व्यक्ति भी शहरों के आसपास जमीन लेकर एकीकृत टाउनशिप विकसित कर सकेंगे। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास बनाना अनिवार्य किया गया है।

एकीकृत टाउनशिप को बढ़ावा

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नए नियम अधिसूचित कर लागू कर दिए हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अव्यवस्थित कॉलोनियों की समस्या को देखते हुए सरकार ने एकीकृत टाउनशिप की अवधारणा को आगे बढ़ाया है। ये नियम विकास प्राधिकरणों और अन्य आवास एजेंसियों पर भी लागू होंगे। उद्देश्य यह है कि शहरों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से विकास हो और मूलभूत सुविधाएं पहले से सुनिश्चित की जा सकें।

अब किसानों और निजी व्यक्तियों को भी अनुमति

पहले टाउनशिप विकसित करने का अधिकार सीमित वर्ग तक था, लेकिन अब कोई भी व्यक्ति या किसानों का समूह लैंड पुलिंग के माध्यम से भूमि एकत्र कर टाउनशिप बना सकेगा। हालांकि, उन पर कॉलोनाइजर एक्ट के प्रावधान लागू होंगे। परियोजना क्षेत्र में पेयजल, सड़क, बिजली, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना विकासकर्ता की जिम्मेदारी होगी।

किफायती आवास बनाना अनिवार्य

परियोजना के कुल भू-भाग का 15 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और एलआईजी श्रेणी के आवासों के लिए सुरक्षित रखना होगा। यदि विकासकर्ता किफायती मकान तैयार करता है तो उसे अलग से अनुदान भी दिया जाएगा। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में पंजीयन कराना अनिवार्य रहेगा। कुछ मामलों में ग्रीन बेल्ट जैसी पाबंदियों में राहत दी जा सकेगी।

सरकारी जमीन आने पर यह होगा

यदि प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्र में सरकारी भूमि बीच में आती है तो अधिकतम आठ हेक्टेयर तक वह उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं, यदि निजी भूमि बीच में है और उसकी आवश्यकता है, तो सरकार के माध्यम से आपसी सहमति से अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी।

तीन चरणों में करना होगा विकास

टाउनशिप का निर्माण अधिकतम तीन चरणों में पूरा करना होगा। प्रत्येक चरण के लिए तीन वर्ष की समयावधि निर्धारित की गई है। दूसरे चरण की शुरुआत तभी संभव होगी जब पहले चरण का कम से कम आधा कार्य पूरा हो चुका हो। पंजीयन के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा।

कम से कम 30 मीटर चौड़ी रहेगी सड़क

पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों के आसपास टाउनशिप के लिए न्यूनतम दस हेक्टेयर भूमि जरूरी होगी। पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में यह सीमा 20 हेक्टेयर रखी गई है। सड़कों की चौड़ाई 24 मीटर से कम नहीं होगी। यदि परियोजना का क्षेत्र 40 हेक्टेयर या उससे अधिक है तो मुख्य मार्ग की चौड़ाई कम से कम 30 मीटर रखना अनिवार्य होगा। बड़े शहरों में अनुमति राज्य स्तर की समिति देगी, जबकि अन्य मामलों में कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी। आवेदन मिलने के 60 दिन के भीतर अनुमति देने का प्रावधान रखा गया है।

इन क्षेत्रों में लागू नहीं होंगे यह नियम

वन क्षेत्र, नदियां, जलाशय, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, रक्षा भूमि, छावनी, ईको-संवेदनशील क्षेत्र, खनन क्षेत्र, विशेष आर्थिक क्षेत्र, वन्यजीव गलियारे, ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल, रेलवे भूमि तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में ये नियम लागू नहीं होंगे।

200 करोड़ का टर्नओवर होना जरुरी

विकासकर्ता की वित्तीय क्षमता के लिए स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। 10 से 20 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए न्यूनतम पांच करोड़ रुपये की नेटवर्थ और छह करोड़ रुपये का औसत वार्षिक टर्नओवर आवश्यक है। 20 से 40 हेक्टेयर के लिए नेटवर्थ 10 करोड़ और टर्नओवर 12 करोड़ होना चाहिए। 40 से 100 हेक्टेयर के लिए 20 करोड़ नेटवर्थ और 20 करोड़ टर्नओवर अनिवार्य है। 100 से 300 हेक्टेयर तक के लिए 50 करोड़ नेटवर्थ और 40 करोड़ टर्नओवर तथा 300 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लिए 250 करोड़ नेटवर्थ और 200 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक टर्नओवर निर्धारित किया गया है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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