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Duck Farming Business: बेरोजगारी दूर करने गांव में ही शुरू किया यह काम, बत्तख पालन से अब कमा रहे लाखों रूपये

Duck Farming Business: झारखंड के गुमला जिले के युवक ने पलायन छोड़ गांव में शुरू किया बत्तख पालन, बना रोजगार का नया मॉडल

Duck Farming Business: बेरोजगारी दूर करने गांव में ही शुरू किया यह काम, बत्तख पालन से अब कमा रहे लाखों रूपये
Duck Farming Business: बेरोजगारी दूर करने गांव में ही शुरू किया यह काम, बत्तख पालन से अब कमा रहे लाखों रूपये

Duck Farming Business: जब रोजगार के लिए गांव छोड़कर शहरों और दूसरे राज्यों की ओर पलायन आम बात बनती जा रही है, तब झारखंड के एक ग्रामीण इलाके से सामने आई यह कहानी कई युवाओं के लिए नई उम्मीद जगा रही है। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के बीच रहकर भी अगर सही सोच और मेहनत हो, तो गांव में रहकर सम्मानजनक कमाई की जा सकती है। गुमला जिले के एक युवक ने यह कर दिखाया है, जिन्होंने पारंपरिक काम से आगे बढ़कर बत्तख पालन को आजीविका का जरिया बनाया और लाखों रुपये की कमाई की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

गुमला जिले की यह है स्थिति

झारखंड का गुमला जिला मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है। यहां की करीब 95 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। जिले में बड़े उद्योग, फैक्ट्रियां या रेलवे जैसी सुविधाएं बेहद सीमित हैं। ऐसे में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण यहां के अधिकांश लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं। कई बार यह पलायन जोखिम भरा साबित होता है और हादसों में लोगों की जान तक चली जाती है।

बत्तख पालन से बदल गई जिंदगी

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड के रहने वाले शशिकांत ने इस चुनौती को अवसर में बदला। पहले वे अपने परिवार के साथ फल बेचने का काम करते थे। पालकोट प्रखंड के बस स्टैंड पर उनकी फल की दुकान है, जिससे घर का खर्च चलता था। हालांकि, उनके मन में कुछ नया और अलग करने की इच्छा थी। खाली समय में उन्होंने बत्तख पालन के बारे में सोचना शुरू किया और छोटी जगह से इसकी शुरुआत कर दी।

खाकी कैंपेबल बत्तख का चयन

शशिकांत ने खाकी कैंपेबल नस्ल की बत्तख को चुना, जिसे दुनिया में सबसे अधिक अंडे देने वाली बत्तख माना जाता है। यह नस्ल अंडे और मांस दोनों के लिए जानी जाती है और स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद मानी जाती है। शुरुआत में उन्होंने लगभग 400 बत्तख खरीदी थीं, जिनमें से कुछ की मृत्यु हो गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अनुभव से सीखते हुए काम को आगे बढ़ाया।

बिना प्रशिक्षण के सीख रहे हैं काम

शशिकांत ने बताया कि उन्होंने किसी तरह की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली है। वे खुद ही पालन की तकनीक सीखने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने बटेर पालन की भी शुरुआत की थी, ताकि अलग-अलग तरह के पशुपालन को समझ सकें। उनका लक्ष्य आने वाले समय में इंटिग्रेटेड फार्मिंग की ओर बढ़ना है, जिसमें एक ही जगह पर कई तरह के जीवों का पालन किया जा सके।

अभी कर रहे 500 बत्तख का पालन

वर्तमान में शशिकांत करीब 500 खाकी कैंपेबल बत्तख का पालन कर रहे हैं। इन बत्तखों को आए हुए लगभग पांच महीने हो चुके हैं। ठंड अधिक होने और मौसम अनुकूल न रहने के कारण अंडा देने में थोड़ी देरी हो रही है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही अंडा उत्पादन शुरू हो जाएगा।

भविष्य में इतनी कमाई की है उम्मीद

बत्तख के अंडों और मांस की बाजार में अच्छी मांग है। इसी वजह से शशिकांत फिलहाल बत्तखों को बेच नहीं रहे हैं और अंडा उत्पादन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि इससे सालाना करीब चार लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। उनका मानना है कि बत्तख पालन गांव के बेरोजगार युवाओं के लिए घर बैठे रोजगार का एक मजबूत विकल्प बन सकता है और पलायन को रोकने में भी मददगार साबित हो सकता है।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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