MP Digital Panchayat Scheme: एमपी की पंचायतें होंगी पूरी तरह डिजिटल, घर बैठे मिलेंगी 2100 सेवाएं, दफ्तरों के चक्कर खत्म
MP Digital Panchayat Scheme: ई-सेवा ऐप और ई-पंचायत मॉडल से बदलेगा पंचायतों का कामकाज, जमीन से लेकर आपदा प्रबंधन तक बड़ा बदलाव

MP Digital Panchayat Scheme: मध्यप्रदेश की पंचायतों में अब कामकाज का तरीका बदलने वाला है। ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए अब जनपद और जिला पंचायतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार पंचायत स्तर पर ही सेवाओं की तेज और पारदर्शी डिलीवरी के लिए ई-सेवा ऐप और पोर्टल लागू करने जा रही है। इसके साथ ही पंचायतों की जमीन, आय के साधन और आपदा प्रबंधन को लेकर भी बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है।
लागू होगा ई-सेवा ऐप और पोर्टल
राज्य सरकार पंचायतों में ई-सेवा ऐप और पोर्टल लागू करने की तैयारी में है। इस व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर की सेवाएं कम से कम समय में लोगों तक पहुंच सकेंगी। अभी ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, अनुमति और अन्य कामों के लिए जनपद कार्यालय और जिला पंचायत तक जाना पड़ता है। नए सिस्टम से यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
इस ऐप पर करीब 2100 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। फिलहाल लगभग 600 सेवाओं को शुरू किया जा चुका है। इनमें पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी कई जरूरी सेवाएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि सभी सेवाओं की समय पर डिलीवरी हो और पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों में तेजी आए।
ई-पंचायत मॉडल से गड़बड़ियों पर लगेगी लगाम
सरकार ई-ऑफिस की तर्ज पर ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। इससे पंचायत स्तर पर होने वाले काम डिजिटल माध्यम से दर्ज होंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं की गुंजाइश कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से पंचायतों में गड़बड़ियों का स्तर लगभग शून्य तक लाया जा सकेगा।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जाएगी मजबूत
अब तक केंद्र और राज्य सरकारों का ज्यादा ध्यान शहरी क्षेत्रों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास शुरू किए गए हैं। राज्य की बड़ी आबादी गांवों में रहती है, इसलिए पंचायतों को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है। पंचायतों के सशक्त होने से गांवों में रोजगार, आय और विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं।
खाली जमीन बनेगी आत्मनिर्भरता का आधार
मध्यप्रदेश की कई पंचायतों के पास बड़ी मात्रा में खाली जमीन है, जिसका अभी तक सही उपयोग नहीं हो पाया है। कई जगहों पर इन जमीनों पर अतिक्रमण भी है। सरकार अब पंचायतों की इन जमीनों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि किस पंचायत के पास कितनी जमीन है, कितनी उपयोग में है, कितनी खाली है और कहां अतिक्रमण है। आगे चलकर इन जमीनों के एक हिस्से का व्यावसायिक उपयोग कर पंचायतों को आय का साधन बनाया जा सकता है।
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एक बगिया मां के नाम योजना से बढ़ेगी आय
पंचायतों में एक बगिया मां के नाम योजना को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत फलदार और छायादार पेड़ों का रोपण किया जाएगा। इससे पंचायतों को भविष्य में आय मिलेगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
पंचायतों में मौसम की जानकारी भी मिलेगी
पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी भी की जा रही है। अभी गांवों में मौसम और बारिश का सटीक आंकलन नहीं हो पाता। पहली बार सरकार पंचायतों में मौसम केंद्र और वर्षामापी यंत्र लगाने जा रही है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों में करीब 350 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। वर्षामापी यंत्रों से स्थानीय स्तर पर बारिश का सही रिकॉर्ड मिलेगा। इससे उन पंचायतों को भी राहत मिल सकेगी, जहां केवल स्थानीय स्तर पर अतिवृष्टि से नुकसान होता है और जिला स्तर पर उसे दर्ज नहीं किया जा पाता।
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