MP Promotion Rules 2025: पदोन्नति में अब नहीं चलेगी चालाकी: एमपी में 23 साल बाद सख्त नियम, कमजोर परफॉर्मेंस नहीं छिपेगी
MP Promotion Rules 2025: मध्यप्रदेश के शासकीय अधिकारी और कर्मचारी अब पदोन्नति के लिए सिर्फ पुराने रिकॉर्ड के सहारे आगे नहीं बढ़ सकेंगे। सरकार ने वर्षों से चली आ रही खामियों को दूर करते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और मेरिट आधारित बना दिया है। नए नियमों के लागू होने से काम करने वालों को लाभ मिलेगा, जबकि कमजोर प्रदर्शन छिपाकर आगे बढ़ने के रास्ते लगभग बंद हो गए हैं।
मध्यप्रदेश सरकार ने 23 साल बाद पदोन्नति नियम 2025 को लागू कर दिया है। इन नियमों को पहले की तुलना में सख्त बनाया गया है, ताकि पदोन्नति में वास्तविक कार्यक्षमता और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जा सके। अब अधिकारी और कर्मचारी अपनी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर को न तो छिपा सकेंगे और न ही विभागीय पदोन्नति समितियां मनमाने तरीके से पुराने रिकॉर्ड के आधार पर प्रमोशन दे सकेंगी।
पहले देखी जाती थी 10 सालों की सीआर
पहले की व्यवस्था में पदोन्नति के लिए पिछले दस वर्षों तक की सीआर देखी जाती थी। इसका फायदा यह होता था कि कई कर्मचारी खराब वर्षों की सीआर को अलग रखकर सिर्फ अच्छे वर्षों को जोड़ लेते थे। दस साल में से पांच साल की अच्छी सीआर दिखाकर 15 अंक पूरे कर लिए जाते थे और पदोन्नति मिल जाती थी। इस प्रक्रिया में वास्तविक कार्य निष्पादन का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता था।
अब सात साल की सीआर अनिवार्य
नए नियमों के तहत अब पदोन्नति के लिए केवल पिछले सात वर्षों की सीआर ही देखी जाएगी। इन सात वर्षों में से किसी भी पांच वर्षों की सीआर को जोड़कर अंक तय किए जाएंगे। कुल 15 अंक हासिल करना जरूरी होगा, तभी पदोन्नति संभव होगी। इसके अलावा इन सात वर्षों में से पिछले दो साल में कम से कम एक वर्ष की सीआर होना अनिवार्य कर दिया गया है।
ए-प्लस ग्रेड पर रहेगा विशेष जोर
पिछले पांच वर्षों की सीआर में कम से कम दो बार ए-प्लस यानी आउटस्टैंडिंग ग्रेड प्राप्त करना जरूरी होगा। केवल औसत या ठीक-ठाक प्रदर्शन के आधार पर अब पदोन्नति नहीं मिल सकेगी। यह प्रावधान उन कर्मचारियों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है, जिन्होंने लगातार बेहतर कार्य किया है।
सस्पेंशन डालेगा प्रमोशन पर सीधा असर
यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी सात वर्षों की अवधि में से चार साल निलंबित रहा है, तो उसे पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यदि वह दोषमुक्त हो जाता है, तो उसके बाद पदोन्नति का रास्ता खुल सकेगा। साथ ही, पिछले दो वर्षों में से एक वर्ष की सीआर को हर हाल में देखा जाएगा, चाहे वह बहुत अच्छी न भी हो।
ट्रांसफर की स्थिति में मूल्यांकन ऐसा
यदि किसी कर्मचारी का किसी वर्ष में तबादला हो गया है, तो उस साल का मूल्यांकन दोनों स्थानों के कार्य को जोड़कर किया जाएगा। पहले ऐसा देखा जाता था कि जहां प्रदर्शन खराब होता था, वहां की सीआर को नजरअंदाज करा दिया जाता था। अब ऐसा संभव नहीं होगा।
परिनिंदा दंड का एक साल तक असर
विभागीय जांच के बाद यदि परिनिंदा जैसा छोटा दंड भी दिया गया है, तो वह दंड लगने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा। पहले वर्ष के अंत के साथ ही उसका असर समाप्त मान लिया जाता था, लेकिन अब पूरे एक साल तक उसका प्रभाव माना जाएगा।
अंकों की नई व्यवस्था, इतने लाने जरुरी
पदोन्नति के लिए क्लास वन अधिकारियों को 15 अंक, क्लास टू और थ्री से प्रथम श्रेणी तक के कर्मचारियों को 13 अंक और तृतीय श्रेणी से नीचे के कर्मचारियों को 12 अंक लाना जरूरी होगा। सभी श्रेणियों में पिछले पांच साल में कम से कम दो ए-प्लस सीआर होना अनिवार्य रहेगा।
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चार्जशीट और आपराधिक मामलों में रोक
यदि किसी कर्मचारी पर सस्पेंशन, चार्जशीट, लघु शास्ति का ज्ञापन लंबित है या आपराधिक मामले में अभियोजन स्वीकृत हो चुका है, तो पदोन्नति रोक दी जाएगी। पहले ऐसी स्थिति में लिफाफा बंद कर दिया जाता था, अब सीधे प्रमोशन पर रोक लगेगी।
बोनस अंक में किये बड़े बदलाव
अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को बोनस अंक तभी मिलेगा, जब उसी पद के लिए कोई अन्य दावेदार कतार में न हो। यदि दूसरा या तीसरा दावेदार मौजूद है, तो पदोन्नति पूरी तरह मेरिट के आधार पर की जाएगी।
क्रमोन्नति से लेकर उच्च पुरस्कार तक लागू
ये नियम केवल सामान्य पदोन्नति ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों को मिलने वाली क्रमोन्नति और उच्च स्तर के पुरस्कारों पर भी लागू होंगे। हालांकि हाईकोर्ट में पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े नियमों को चुनौती दी गई है, लेकिन मेरिट आधारित सामान्य पदोन्नति नियमों को किसी ने चुनौती नहीं दी है। इसी कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को ये नियम लागू करने के निर्देश दे दिए हैं।
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