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PPP Medical College Betul: पीपीपी मोड के मेडिकल कॉलेज से निजी अस्पतालों जैसा महंगा हो जाएगा इलाज : निलय डागा

PPP Medical College Betul: बैतूल में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जिन योजनाओं से आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए, वही अब उनके लिए परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड में देने से लेकर मनरेगा में बदलाव और पेयजल की गुणवत्ता तक, कई अहम मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया गया।

पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज जनहित के खिलाफ

शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय डागा ने कहा कि बैतूल में मेडिकल कॉलेज को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मोड पर बनाए जाने का फैसला जनहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार ने बैतूल को पूर्ण रूप से सरकारी मेडिकल कॉलेज देने का वादा किया था, लेकिन अब उसी कॉलेज को निजी भागीदारी के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 38 एकड़ शासकीय भूमि, जिला चिकित्सालय का विशाल भवन और पूरा आधारभूत ढांचा पहले से सरकार के पास मौजूद है। इसके बावजूद निजी कंपनी को इसमें शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल आम जनता के मन में है।

आम लोगों की पहुंच से बाहर होगा इलाज

निलय डागा ने आशंका जताई कि पीपीपी मोड में संचालित मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल में इलाज निजी अस्पतालों जैसा महंगा हो जाएगा। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए इलाज कराना मुश्किल हो सकता है। जांच, ऑपरेशन, आईसीयू शुल्क और दवाइयों का खर्च आम लोगों की पहुंच से बाहर जाने का खतरा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री उपचार योजना जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी सीमित हो सकता है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को बार-बार भटकना पड़ेगा। उनका कहना था कि ऐसे अस्पतालों में निजी मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है और सरकारी मरीजों के लिए बेड कम उपलब्ध रहते हैं।

PPP Medical College Betul
निलय डागा, बैतूल

मेडिकल शिक्षा भी होगी दूर की कौड़ी

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पीपीपी मॉडल में मेडिकल शिक्षा का खर्च बहुत अधिक होता है। इससे आदिवासी बहुल बैतूल जिले के स्थानीय विद्यार्थियों के लिए एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मॉडल में सरकारी नियंत्रण बहुत कमजोर रहता है और निजी कंपनियों की शर्तें हावी रहती हैं। शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती और सेवा के बजाय मुनाफा प्राथमिकता बन जाता है। इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा होने की आशंका है और जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।

मनरेगा में बदलाव पर केंद्र सरकार पर हमला

प्रेस वार्ता में निलय डागा ने केंद्र की मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम में बड़े बदलाव कर गरीबों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार देना अनिवार्य था। अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है और काम देना सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गया है।

मजदूरी और भुगतान को लेकर चिंता

कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी की गारंटी भी कमजोर कर दी गई है। पहले हर साल मजदूरी बढ़ती थी और साल भर काम मिलने से ग्रामीण परिवारों को कुछ आर्थिक सुरक्षा मिलती थी। अब केंद्र सरकार मजदूरी का केवल 60 प्रतिशत भुगतान करेगी और शेष 40 प्रतिशत राशि राज्यों को वहन करनी होगी। इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बजट की कमी का हवाला देकर काम बंद किए जाने की आशंका रहेगी।

मनरेगा को कमजोर करने का आरोप

निलय डागा ने कहा कि मनरेगा पिछले करीब 20 वर्षों से देश के गरीब मजदूरों के लिए जीवनरेखा साबित हुई है। इसे कमजोर करना गरीबों के खिलाफ साजिश के समान है। उन्होंने मनरेगा का नाम बदलकर वीबीजी रामजी योजना करने के फैसले पर भी सवाल उठाए और कहा कि महात्मा गांधी के नाम और विचारों को लोगों के दिलों से हटाना संभव नहीं है।

पुरानी और नई व्यवस्था में अंतर

उन्होंने बताया कि मनरेगा 2005 के तहत पूरे वर्ष काम की व्यवस्था, 100 दिन की कानूनी गारंटी, स्थानीय मांग के आधार पर काम, सोशल ऑडिट, ठेकेदारी पर रोक, 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और केंद्र व राज्य की स्पष्ट हिस्सेदारी तय थी। इसके विपरीत नए मॉडल में अनिवार्य अवकाश, बजट आधारित काम, ग्रामसभा की कमजोर भूमिका, बायोमेट्रिक हाजिरी, भुगतान में देरी और राज्यों की आर्थिक क्षमता पर निर्भरता जैसी शर्तें हैं, जो मजदूरों के हित में नहीं हैं।

पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता

प्रेस वार्ता में निलय विनोद डागा ने इंदौर में दूषित पेयजल से हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बैतूल में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए कांग्रेस स्तर पर पहल करेगी। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द जिले के हर गांव और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड से पेयजल के नमूने लिए जाएंगे। सैंपलिंग की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की जाएगी और पानी की गुणवत्ता की लैब जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि आम लोग सच्चाई जान सकें।

जनहित में कार्रवाई किये जाने की मांग

निलय डागा ने कहा कि शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार से मजदूर, किसान और आदिवासी विरोधी नीतियों को छोड़ने, मनरेगा कानून को पूरी मजबूती के साथ लागू करने और स्वास्थ्य व शिक्षा को पूरी तरह जनहित में रखने की मांग की।

प्रेस वार्ता में मौजूद रहे नेता

इस पत्रकार वार्ता में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव समीर खान, पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय संयोजक बृजभूषण पांडे, युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष संजय सरदार यादव, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष मोनू बडोनिया, महिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष पुष्पा पेंद्राम सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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