Shahdol collector fined: शहडोल कलेक्टर पर लगाया दो लाख का जुर्माना, एनएसए के गलत इस्तेमाल पर हाईकोर्ट सख्त
Shahdol collector fined: मध्यप्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। अदालत अब अफसरों की मनमानी और कानून के गलत इस्तेमाल पर खुलकर नाराजगी जता रही है। इसी कड़ी में शहडोल जिले के कलेक्टर डॉ. केदार सिंह को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का दुरुपयोग करने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए आर्थिक दंड लगाया है। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर मानते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं।
एनएसए के गलत इस्तेमाल का मामला
यह मामला शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील से जुड़ा है, जहां बुढ़वा गांव के रहने वाले युवक सुशांत सिंह बैस ने रेत के अवैध उत्खनन को लेकर लगातार शिकायतें की थीं। इन शिकायतों से नाराज रेत माफिया ने उल्टा सुशांत को ही निशाने पर ले लिया। उसके खिलाफ रेत चोरी और अन्य मामलों में केस दर्ज कराए गए।
रेत माफिया के दबाव में पुलिस ने सुशांत सिंह बैस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाने का प्रस्ताव तैयार कर शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह को भेज दिया। कलेक्टर ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसके बाद सुशांत को एनएसए के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

परिवार ने उठाया कानूनी कदम
सुशांत की गिरफ्तारी के बाद उसके पिता हीरामणि बैस ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में आरोप लगाया गया कि एनएसए जैसी सख्त धारा का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया है और इसका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।
हालांकि सुनवाई के दौरान सुशांत सिंह बैस को रिहा कर दिया गया, लेकिन एनएसए लगाने के निर्णय को चुनौती दी जाती रही। हाईकोर्ट ने जब कलेक्टर से जवाब मांगा तो उन्होंने सफाई दी कि दूसरे आरोपी की जगह गलती से सुशांत का नाम आदेश में दर्ज हो गया था।
हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति एके सिंह की डबल बेंच ने की। कोर्ट ने कलेक्टर की दलीलों को गंभीर लापरवाही माना और कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कलेक्टर आंखों पर पट्टी बांधकर काम कर रहे थे, जैसे महाभारत की गांधारी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कलेक्टर का रवैया किसी निजी कंपनी के कर्मचारी जैसा लग रहा है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम केवल तब लगाया जाना चाहिए जब देश की सुरक्षा को वास्तविक खतरा हो।
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दो लाख रुपये का किया जुर्माना
हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह को निर्देश दिए कि वे अपनी निजी राशि से दो लाख रुपये का जुर्माना अदा करें। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की लापरवाही और कानून के दुरुपयोग को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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