MP government office timing: मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज की रफ्तार बढ़ाने और व्यवस्था में अनुशासन लाने के लिए राज्य सरकार ने अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में कार्य सुबह 10 बजे से अनिवार्य रूप से शुरू होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 को किसान कल्याण को समर्पित करते हुए सरकार ने विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण योजनाओं को मिशन मोड में लागू करने का रोडमैप भी तय किया है। यह फैसला केवल समय परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्य संस्कृति में बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
सरकार के दो वर्ष और आगे की दिशा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार के दो वर्ष उपलब्धियों से भरपूर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी मध्यप्रदेश की विकास यात्रा और प्रगति की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि सभी विभागों के आपसी समन्वय और साझा प्रयासों का परिणाम है। अब जरूरत है कि इसी गति को बनाए रखते हुए विकास कार्यों को और तेज किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वर्ष 2026 के लिए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, निर्माण परियोजनाओं और विभिन्न कार्यक्रमों के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं भी दीं।

वर्ष 2026 होगा किसान कल्याण वर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि वर्ष 2025 औद्योगिक विकास के लिहाज से सफल रहा है। अब वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का लक्ष्य समृद्ध किसान के माध्यम से समृद्ध प्रदेश बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण केवल एक या दो विभागों की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि यह 15 से अधिक प्रमुख विभागों का साझा अभियान बनेगा।
इस अभियान में कृषि एवं किसान कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नवकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन, मत्स्य पालन, नर्मदा घाटी विकास, ऊर्जा विभाग, राजस्व, वन, कुटीर एवं ग्रामोद्योग, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम, औद्योगिक नीति निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग सहित मंडी बोर्ड, बीज निगम, एमपी एग्रो, दुग्ध संघ, मार्कफैड, वेयरहाउसिंग और आजीविका मिशन को समन्वित रूप से काम करना होगा।
सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड काल के दौरान प्रदेश में शासकीय कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया गया था। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए कार्यालयीन समय का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अब प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में काम सुबह 10 बजे से (MP government office timing) शुरू किया जाए।
इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए बायोमेट्रिक और अन्य तकनीकी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे कार्यालयों में अनुशासन बढ़ेगा और कामकाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। समय पर उपस्थिति और जिम्मेदारी तय होने से आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

केंद्र सरकार से समन्वय पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकास और जनकल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के साथ लगातार संपर्क में रहें।
राज्य की योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में यदि कोई समस्या आती है तो उसे समय रहते केंद्र सरकार के संज्ञान में लाया जाए। इससे प्रदेश में विकास कार्यों और जनकल्याण गतिविधियों को तेज और प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
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पांच साल की योजना और बजट की तैयारी
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के लिए आगामी पांच वर्षों की विस्तृत कार्य योजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही तीन वर्षों के बजट अनुमान की व्यवस्था भी की जा रही है। सड़क, अस्पताल, सिंचाई परियोजनाओं और सार्वजनिक भवन निर्माण से जुड़ी योजनाओं को समेकित रूप से तैयार कर उनका विधिवत दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इससे विकास कार्यों की दिशा स्पष्ट होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
संकल्प से समाधान अभियान का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि 12 जनवरी से 31 मार्च तक संकल्प से समाधान अभियान का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान प्रदेश की 106 प्रमुख हितग्राही मूलक योजनाओं पर केंद्रित रहेगा। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि शिविरों में प्राप्त सभी आवेदनों का अंतिम निराकरण 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से किया जाए।
अभियान को चार चरणों में संचालित किया जाएगा। पहले चरण में 12 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर आवेदन लिए जाएंगे। दूसरे चरण में 16 फरवरी से 16 मार्च तक क्लास्टर स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। तीसरे चरण में 16 मार्च से 26 मार्च तक ब्लॉक स्तर पर लंबित आवेदनों और शिकायतों का समाधान किया जाएगा। अंतिम चरण में 26 मार्च से 31 मार्च 2026 तक जिला स्तर पर शिविर आयोजित कर शेष सभी आवेदनों और शिकायतों का निपटारा किया जाएगा।
विभागों की उपलब्धियों की सराहना
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जल संसाधन विभाग ने नदी जोड़ो परियोजनाओं और अन्य सिंचाई योजनाओं में सराहनीय काम किया है। आईटी सेक्टर में हुए नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
कृषि क्षेत्र में किसान कल्याण, खाद्यान्न उत्पादन, पंचायत और ग्रामीण विकास में जल गंगा संवर्धन अभियान, उद्योग क्षेत्र में निवेश और रोजगार सृजन, तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की भी मुख्यमंत्री ने सराहना की।
सुरक्षा, वन और सामाजिक सुधार पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नक्सल समस्या के समाधान में मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में नवाचार करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग के कार्यों और उपलब्धियों पर भी संतोष जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सफल उद्यमियों, नवाचार करने वाले किसानों और व्यापारियों को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया जाए। साथ ही मृत्यु भोज और विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च रोकने जैसे सामाजिक सुधारों के लिए भी जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गायत्री परिवार और अन्य सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
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