Digital Arrest Cyber Fraud: “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, बैतूल में 80 वर्षीय बुजुर्ग से 23.50 लाख की साइबर ठगी
Digital Arrest Cyber Fraud: साइबर ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों को डराकर उनकी जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। कानून और जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर आम नागरिकों को मानसिक दबाव में लिया जा रहा है। बैतूल जिले में सामने आया एक मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे पढ़े-लिखे और अनुभवी बुजुर्ग भी साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे शब्दों से डराकर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी से लाखों रुपये ठग लिए।
जिले में चल रहा है साइबर जागरूकता अभियान
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन के निर्देशन में जिलेभर में साइबर अपराधों (Digital Arrest Cyber Fraud) को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साइबर सेल और सभी थाना क्षेत्रों के पुलिस अधिकारी नागरिकों को लगातार सतर्क कर रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि ऑनलाइन ठगी से कैसे बचा जाए और किसी संदिग्ध कॉल या संदेश पर क्या करना चाहिए। इसके बावजूद साइबर अपराधी नए हथकंडों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
गंज थाना क्षेत्र में सामने आया गंभीर मामला
थाना गंज क्षेत्र में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की गई साइबर ठगी (Digital Arrest Cyber Fraud) का एक गंभीर मामला दर्ज हुआ है। इस घटना ने न केवल पुलिस को बल्कि आम लोगों को भी सतर्क कर दिया है। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को भय के माहौल में डाल दिया।

कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी
फरियादी बसंत कुमार मैदमवार, उम्र 80 वर्ष, विनायक रेसिडेंसी, ऑयल मिल के पास, बैतूल के निवासी हैं। वे भारतीय स्टेट बैंक से हेड कैशियर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 27 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल की स्क्रीन पर “Delhi Police” लिखा दिखाई दे रहा था।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। उसने कहा कि फरियादी के आधार कार्ड का उपयोग कर दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है। उस सिम का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों में हुआ है। ठग ने यह भी कहा कि इस मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और फरियादी को डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest Cyber Fraud) कर लिया गया है।
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डर और दबाव में कराया गया पैसा ट्रांसफर
इसके बाद साइबर ठग लगातार व्हाट्सएप कॉल करते रहे। वे गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए खाते की जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते रहे। लगातार मानसिक दबाव और भय के कारण बुजुर्ग उनकी बातों में आ गए।
1 दिसंबर 2025 को फरियादी ने अपने एसबीआई खाते से 13 लाख 50 हजार रुपये यस बैंक के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। इसके अलावा 10 लाख रुपये फिनो बैंक के खाते में भेजे गए। इस तरह कुल 23 लाख 50 हजार रुपये साइबर ठगों के खातों में चले गए।

ठगी का खुलासा कैसे हुआ
अगले दिन 2 दिसंबर 2025 को फरियादी गोल्ड लोन लेने बैंक पहुंचे। वहां बैंक प्रबंधक ने पूरे मामले को सुना और बताया कि यह साइबर ठगी है। तभी उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगों का शिकार (Digital Arrest Cyber Fraud) हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया अपराध
इस मामले में थाना गंज, जिला बैतूल में अपराध क्रमांक 04/26 दर्ज किया गया है। प्रकरण भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 308 के तहत पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है। साइबर ठगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
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पुलिस अधीक्षक ने की यह अपील
पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन ने साफ कहा है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी फोन या व्हाट्सएप कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी अनजान कॉल या संदेश से घबराएं नहीं और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बीते वर्ष लाखों मामले दर्ज हुए और हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। बैतूल जिले में भी पुलिस की सतर्कता से कई लोगों को समय रहते ठगी से बचाया गया है। ऐसे में जागरूक रहना और सही समय पर शिकायत करना ही साइबर अपराध से बचने का सबसे मजबूत तरीका है।
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