ICAR New Crop Varieties: किसानों को बड़ी सौगात: 25 फसलों की 184 नई किस्में लॉन्च, मिलेगा बंपर उत्पादन, बीमारियों का खतरा नहीं

ICAR New Crop Varieties: बदलते मौसम, घटते जल संसाधन और बढ़ती खाद्य जरूरतों के बीच भारतीय खेती को मजबूत आधार देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। वैज्ञानिक शोध और किसानों की जरूरतों को जोड़ते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देश को फसलों की 184 नई उन्नत किस्में समर्पित की हैं, जो आने वाले वर्षों में खेती की तस्वीर बदल सकती हैं।

नई दिल्ली में एनएएससी कॉम्प्लेक्स के ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन नई किस्मों का लोकार्पण किया। यह आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत हुआ, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसे बीज उपलब्ध कराना है, जो बदलती जलवायु में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।

सामूहिक प्रयास से तैयार हुई किस्में

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इन किस्मों का विकास आईसीएआर की अखिल भारतीय समन्वित फसल परियोजनाओं के अंतर्गत किया गया है। इसमें परिषद के अनुसंधान संस्थानों, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा निजी बीज कंपनियों की बराबर की भागीदारी रही। कुल 184 किस्मों में से 60 किस्में आईसीएआर संस्थानों, 62 किस्में कृषि विश्वविद्यालयों और 62 किस्में निजी बीज कंपनियों द्वारा विकसित की गई हैं। यह साझेदारी कृषि शोध के क्षेत्र में एक मजबूत उदाहरण मानी जा रही है।

ICAR New Crop Varieties: किसानों को बड़ी सौगात: 25 फसलों की 184 नई किस्में लॉन्च, मिलेगा बंपर उत्पादन, बीमारियों का खतरा नहीं

जलवायु संकट से निपटने में मददगार

नई किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें सूखा सहनशीलता, बाढ़ से उबरने की क्षमता, लवणीय और क्षारीय मिट्टी में बेहतर उपज तथा रोग और कीटों के प्रति प्रतिरोध जैसे गुण मौजूद हैं। मंत्री ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता के दौर में ये विशेषताएं किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेंगी और उत्पादन में स्थिरता बनाए रखेंगी।

उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर भी जोर

इन किस्मों में केवल अधिक पैदावार ही नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता, पोषण तत्वों की अधिकता और प्रसंस्करण के अनुकूल गुण भी शामिल हैं। इससे किसानों को बाजार में फसल का अच्छा मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध होगा। मंत्री ने इसे प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचने वाली सफल यात्रा का उदाहरण बताया।

भारत की कृषि क्षेत्र में उपलब्धियां

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उच्च उत्पादक और जलवायु अनुकूल बीजों के कारण भारत कृषि के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि देश ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए 150.18 मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया है। उनके अनुसार भारत अब न केवल अपनी खाद्य जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी अन्न उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। इस सफलता का श्रेय किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र को दिया गया।

किस फसल की कितनी किस्में

कार्यक्रम में जारी की गई 184 किस्मों में 122 अनाज फसलों की किस्में शामिल हैं। इनमें धान की 60 और मक्का की 50 नई किस्में प्रमुख हैं। इसके अलावा ज्वार, बाजरा, रागी, छोटे मिलेट्स और प्रोसो मिलेट की उन्नत किस्में भी शामिल की गई हैं। दलहनों में अरहर, मूंग और उड़द की 6 किस्में जारी हुई हैं। तिलहनों के लिए 13 नई किस्में और चारा फसलों की 11 किस्में भी किसानों को दी गई हैं। गन्ने की 6, कपास की 24, जूट और तंबाकू की एक-एक नई किस्म भी इस सूची में शामिल है।

किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी नई किस्मों को तीन वर्षों के भीतर देशभर के किसानों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि बीज किसी भी कृषि व्यवस्था की नींव होते हैं और अब भारत पोषणयुक्त अन्न के उत्पादन की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आयोजन में यह भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी मौजूद रहे। वहीं राष्ट्रीय बीज निगम की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने निगम की ओर से 33.26 करोड़ रुपये का लाभांश चेक केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपा।

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