Atal Progress Way: राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को एक सीधी रेखा में जोड़ने वाली अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। यह सड़क न केवल दूरी घटाने वाली है, बल्कि मध्यप्रदेश के चंबल अंचल के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। लंबे समय से अटकी इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर अब फिर से हलचल तेज हुई है और सरकार इसे आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी है।
अटल प्रोग्रेस-वे का प्रस्तावित मार्ग
अटल प्रोग्रेस-वे का प्रस्ताव राजस्थान के कोटा जिले के सीमाल्या गांव के पास मुंबई-बड़ोदरा राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से शुरू होता है। यहां से यह सड़क मध्यप्रदेश के तीन जिलों से गुजरते हुए उत्तरप्रदेश के इटावा जिले के निनावा तक जाने वाली है। इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से राजस्थान के कोटा, मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना और श्योपुर तथा उत्तरप्रदेश के इटावा के बीच सीधा और आसान रास्ता मिल जाएगा। अभी इन इलाकों के बीच यात्रा में काफी समय और घुमावदार मार्गों का सामना करना पड़ता है।
यात्रा के समय में होगी बड़ी बचत
अटल प्रोग्रेस-वे के जरिए इटावा से भिंड, मुरैना होते हुए कोटा तक चार लेन की सीधी सड़क बनेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर सफर करने में करीब 11 घंटे का समय लगता है, लेकिन एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यही दूरी लगभग 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। यानी यात्रियों को लगभग 5 घंटे की सीधी बचत होगी। इससे न केवल निजी यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि माल परिवहन भी तेज और सस्ता होगा।

भारत माला परियोजना का है हिस्सा
करीब 404 किलोमीटर लंबा अटल प्रोग्रेस-वे केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना में शामिल है। इसमें सबसे लंबा हिस्सा मध्यप्रदेश में प्रस्तावित है, जिसकी लंबाई 313.81 किलोमीटर है। राजस्थान में इस सड़क का हिस्सा 72 किलोमीटर और उत्तरप्रदेश में 22.96 किलोमीटर का निर्माण किया जाना है। जब इस परियोजना की शुरुआती योजना बनी थी, तब इसकी अनुमानित लागत लगभग 6 हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन समय के साथ लागत बढ़कर अब 23 हजार 645 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
वन और कृषि भूमि अधिग्रहण का मुद्दा
अटल प्रोग्रेस-वे के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसमें वन विभाग की करीब 454.51 हेक्टेयर जमीन भी शामिल है। इसके अलावा बड़ी संख्या में किसानों की निजी कृषि भूमि इस परियोजना की जद में आ रही है। इसी वजह से बीते कुछ वर्षों से इस प्रोजेक्ट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
भिंड, मुरैना और श्योपुर पर यह प्रभाव
इस एक्सप्रेस-वे से भिंड जिले की 29 ग्राम पंचायतों और दो जनपदों के 41 गांव प्रभावित हो रहे हैं। वहीं श्योपुर जिले के 57 गांव इस मार्ग में आ रहे हैं। श्योपुर जिले की सीमा में लगभग 95 किलोमीटर लंबा हिस्सा प्रस्तावित है। यहां कुल 598.321 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, जिसमें 90.878 हेक्टेयर सरकारी और 507.443 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सड़क बनने से श्योपुर जैसे पिछड़े जिले को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और विकास के नए अवसर खुलेंगे।
किसानों का विरोध और एलाइनमेंट में बदलाव
भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में जब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई तो कई किसानों ने अपने खेतों से होकर सड़क बनाए जाने का विरोध किया। उनका कहना था कि इससे उनकी उपजाऊ जमीन प्रभावित होगी। किसानों के विरोध को देखते हुए मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह घोषणा की थी कि सड़क का एलाइनमेंट खेतों की बजाय बीहड़ों से होकर तय किया जाएगा। इस घोषणा के बाद परियोजना की प्रक्रिया लगभग ढाई साल से ठप पड़ी हुई है।
मुख्यमंत्री ने की अटल प्रोग्रेस-वे की समीक्षा
शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों और स्थानीय निवासियों की सहमति और संतुष्टि के आधार पर ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए और जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जाना जरूरी है।
चंबल क्षेत्र के लिए विकास की राह
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अटल प्रोग्रेस-वे से चंबल क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। यह मार्ग मुरैना, श्योपुर और भिंड जिलों को राजस्थान से गुजरने वाले दिल्ली-वड़ोदरा एक्सप्रेस-वे और उत्तरप्रदेश के आगरा-लखनऊ हाईवे से जोड़ेगा। इससे चंबल अंचल की कोटा, दिल्ली, मुंबई, आगरा, लखनऊ, कानपुर जैसे बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
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व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा
बेहतर सड़क संपर्क का सीधा असर व्यापार, उद्योग और पर्यटन पर पड़ता है। अटल प्रोग्रेस-वे के जरिए माल ढुलाई आसान होने से उद्योगों को फायदा होगा। साथ ही चंबल क्षेत्र के धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच सरल होगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
दो प्रस्तावित योजनाओं पर हुई चर्चा
बैठक में अटल प्रोग्रेस-वे के लिए तैयार किए गए दो अलग-अलग प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतिकरण किया गया। इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह भी मौजूद रहे। अब देखना यह है कि सरकार किस योजना पर मुहर लगाती है और यह बहुप्रतीक्षित परियोजना कब जमीन पर उतरती है।
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