Emerald Heights Jail Project: 60 करोड़ में जेल निर्माण के बदले 600 करोड़ की जमीन? एमराल्ड हाइट्स प्रोजेक्ट की होगी जांच, 9 अफसरों की टीम गठित

Emerald Heights Jail Project: बैतूल में प्रस्तावित नए जेल परिसर को लेकर उठ रहे सवाल अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गए हैं। जिस परियोजना को लेकर लंबे समय से असमान लेनदेन, नियमों की अनदेखी और सरकारी जमीन के उपयोग पर संदेह जताया जा रहा था, उसकी सच्चाई सामने लाने के लिए जिला प्रशासन ने औपचारिक कदम उठाया है। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम बैतूल ने पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच के लिए नौ अधिकारियों की एक टीम बनाई है, जो तय समय सीमा में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

बैतूल जिले में पुनर्घनत्वीकरण नीति 2018 के अंतर्गत प्रस्तावित जेल प्रोजेक्ट लगातार चर्चा और विवाद में रहा है। इस योजना के अनुसार कढ़ाई क्षेत्र में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से नया जेल परिसर बनाया जाना है। इसके बदले शहर के बीच स्थित वर्तमान जेल परिसर की करीब छह एकड़ भूमि एक निजी फर्म को दी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 600 करोड़ रुपये के आसपास है। इसी अंतर को लेकर प्रशासनिक स्तर से लेकर आम नागरिकों के बीच सवाल उठते रहे हैं।

जिन जमीनों का हस्तांतरण किया जा रहा है, वहां एमराल्ड हाइट्स नामक फर्म को कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी गई है। इस क्षेत्र में फ्लैट, दुकानें और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए जाने की योजना है। लगातार यह सवाल सामने आ रहा था कि क्या इतनी कीमती शहरी जमीन को अपेक्षाकृत कम लागत वाले निर्माण के बदले देना नियमों और नीति के अनुरूप है या नहीं। इन्हीं शंकाओं के चलते अब प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच कराने का फैसला लिया है।

जांच समिति का किया गया गठन

कलेक्टर के आदेश के बाद बैतूल के एसडीएम ने नौ सदस्यीय जांच दल का गठन किया है। इस समिति में राजस्व, नगर प्रशासन, वन विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश, हाउसिंग बोर्ड और नगरपालिका से जुड़े अधिकारी शामिल किए गए हैं। यह टीम सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

जांच दल में यह अधिकारी शामिल

जांच समिति में तहसीलदार बैतूल नगर पूनम साहू, नगर पालिका के सीएमओ सतीष मटसेनिया, सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश विनोद परस्ते, बैतूल रेंज के रेंजर एपी शुक्ला, हाउसिंग बोर्ड के सहायक यंत्री प्रकाश पंजवानी, नगरपालिका बैतूल के सहायक यंत्री नीरज धुर्वे, उपयंत्री नगेंद्र वागद्रे, आरआई भीमराव पोटफोड़े और सुखराम सिरसाम को शामिल किया गया है।

किन बिंदुओं पर होगी जांच

जांच समिति यह देखेगी कि एमराल्ड हाइट्स को कॉलोनी विकास की जो अनुमति दी गई है, वह मौजूदा नियमों के अनुसार है या नहीं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से प्राप्त अनुमतियों की वैधानिकता भी परखी जाएगी। जेल प्रोजेक्ट के तहत कढ़ाई और वर्तमान जेल परिसर में जिन पेड़ों की कटाई की गई है, उसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं, यह भी जांच का विषय होगा।

इसके अलावा यह बिंदु भी जांच में शामिल है कि क्या पुर्नघनत्वीकरण नीति के तहत शहर की मूल्यवान जमीन के बदले गांव की जमीन पर निर्माण कराना उचित और नियमसंगत है। कढ़ाई क्षेत्र में नए जेल परिसर के निर्माण से पंचायत के तालाब और अन्य संपत्तियों पर जो प्रभाव पड़ा है, उसके बदले मुआवजा या अन्य कार्रवाई की गई या नहीं, इसकी भी समीक्षा होगी।

जांच में यह भी देखा जाएगा कि वर्तमान जेल परिसर से कितनी जमीन एमराल्ड हाइट्स के नाम रजिस्ट्री के माध्यम से दी गई है और फर्म ने कितनी भूमि पर कॉलोनी विकास की अनुमति, रेरा पंजीयन और टीएनसीपी की स्वीकृति ली है। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि इस पूरे प्रोजेक्ट में भू-राजस्व संहिता और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइनों का कहीं उल्लंघन तो नहीं हुआ है।

सामने आये तथ्यों की होगी जाँच

एसडीएम बैतूल अभिजीत सिंह का कहना है कि अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य सामने आता है या कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, तो जांच समिति उस पर भी विचार करेगी। प्रशासन का उद्देश्य पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करना और नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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