MP census update: देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाने वाली जनगणना की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच रही हैं। अगले साल प्रस्तावित जनगणना से पहले राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर जरूरी व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश में भी अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि जनगणना से पहले प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके लिए तय तारीख पर सभी सीमाएं स्थिर कर दी जाएंगी, ताकि जनगणना का काम बिना किसी भ्रम और बाधा के पूरा किया जा सके।
मध्यप्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज
देशभर में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। मध्यप्रदेश में भी प्रशासनिक स्तर पर जनगणना की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि जनगणना प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रदेश की प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना के दौरान जिलों, तहसीलों या अन्य इकाइयों की सीमाओं में किसी तरह का बदलाव न हो।
31 दिसंबर को फ्रीज होंगी प्रशासनिक सीमाएं
प्रदेश सरकार के अनुसार 31 दिसंबर को मध्यप्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाएं स्थिर कर दी जाएंगी। इस दिन जिलों, संभागों, तहसीलों, उपखंडों, जनपदों और थानों की सीमाओं को फ्रीज कर दिया जाएगा। इसके बाद जनगणना पूरी होने तक इनमें किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में राज्य सरकार केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय को आधिकारिक सूचना भी भेजेगी।
अधिकारियों की तैनाती को मिली मंजूरी
जनगणना को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य सरकार ने पहले ही अधिकारियों की तैनाती कर दी है। गृह विभाग की ओर से आदेश जारी कर जनगणना अधिकारियों को उनके दायित्व और अधिकार सौंप दिए गए हैं। इन आदेशों के तहत जिला, संभाग और नगर स्तर पर अधिकारियों को जनगणना से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सके।
कलेक्टर और संभागायुक्त को अहम जिम्मेदारी
सरकार के निर्देशों के अनुसार जिले में कलेक्टर को प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है। वहीं संभाग स्तर पर संभागायुक्त को संभागीय जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कलेक्टर द्वारा नामित अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी जिले में जनगणना से जुड़े सभी कार्यों का समन्वय करेगा।
जिला और अनुविभाग स्तर की व्यवस्था
जिलों में कलेक्टर द्वारा चुने गए अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर को जिला जनगणना अधिकारी बनाया जा सकेगा। जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी को अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अनुविभाग स्तर पर एसडीएम को अनुविभागीय जनगणना अधिकारी बनाया गया है, जो अपने क्षेत्र में जनगणना से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे।
तहसील स्तर पर भी तय की गई जिम्मेदारी
तहसील स्तर पर तहसीलदार को चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ अतिरिक्त तहसीलदार या नायब तहसीलदार को अतिरिक्त चार्ज जनगणना अधिकारी बनाया गया है। ये अधिकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनगणना कर्मचारियों के कामकाज की देखरेख करेंगे और किसी भी समस्या का समाधान करेंगे।
नगरीय निकायों में अलग रहेगी व्यवस्था
शहरी क्षेत्रों के लिए भी सरकार ने अलग से व्यवस्था तय की है। नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त या प्रशासक को प्रमुख जनगणना अधिकारी बनाया गया है। इनके द्वारा नामित अपर आयुक्त, उपायुक्त या अन्य वरिष्ठ अधिकारी नगर जनगणना अधिकारी होंगे। नगर निगम के जोनल अधिकारी जोन स्तर पर चार्ज जनगणना अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में मुख्य नगरपालिका अधिकारी या मुख्य कार्यपालन अधिकारी को चार्ज जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जनगणना में बाधा डालना पड़ेगा महंगा
राज्य सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि जनगणना के काम में किसी भी तरह की रुकावट या बाधा डालना कानूनन अपराध होगा। गृह विभाग के आदेश में जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना कार्य में अड़चन पैदा करता है, तो उस पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा दोष सिद्ध होने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान भी है।
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सीमाएं फ्रीज होने का क्या होगा असर
31 दिसंबर के बाद प्रदेश में जिलों, तहसीलों, थानों या अन्य प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। न तो नए जिले बनाए जा सकेंगे और न ही किसी क्षेत्र को दूसरे जिले या तहसील में जोड़ा जा सकेगा। यह स्थिति जनगणना पूरी होने तक बनी रहेगी। इसका मकसद यह है कि आंकड़ों के संग्रह में किसी तरह की गड़बड़ी न हो और हर व्यक्ति को सही प्रशासनिक इकाई में दर्ज किया जा सके।
जनगणना के लिए स्थिर ढांचा जरूरी
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनगणना जैसी बड़ी प्रक्रिया के लिए स्थिर और स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा बेहद जरूरी होता है। यदि सीमाओं में बार-बार बदलाव हो, तो जनसंख्या आंकड़ों में भ्रम और त्रुटि की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से जनगणना से पहले सीमाओं को फ्रीज करने की परंपरा अपनाई जाती है।
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केंद्र को भेजी जाएगी पूरी जानकारी
राज्य सरकार द्वारा 31 दिसंबर को सीमाएं फ्रीज किए जाने के बाद इसकी पूरी जानकारी केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय को भेजी जाएगी। इसके बाद जनगणना की आगे की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी। प्रशासन का कहना है कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी, ताकि जनगणना कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
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