MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मौसम इन दिनों बदलते हुए कई रंग दिखा रहा है। कभी आसमान पर हल्के बादल छा जाते हैं तो कभी तेज धूप निकल आती है। मंगलवार को प्रदेश के किसी भी हिस्से में बारिश दर्ज नहीं हुई, लेकिन बादल छाए रहने की वजह से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। अब कल से फिर मौसम के बदलने के आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार खजुराहो मंगलवार को सबसे अधिक गर्म रहा। जहां अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं श्योपुर, उज्जैन और टीकमगढ़ का तापमान 35 डिग्री तक पहुंचा। प्रदेश के 12 से ज्यादा जिलों में पारा 34 डिग्री या उससे ऊपर रहा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर के आखिरी दिनों से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक प्रदेश में फिर से बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून विदा लेगा।
अभी बना रहेगा मानसून का असर
मौसम विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून ने 16 जून को प्रवेश किया था। सामान्यत: मानसून का असर सितंबर तक रहता है। अब देश के कई राज्यों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब से यह लौट चुका है, वहीं मध्य प्रदेश में इसका असर अभी कुछ दिनों तक बना रहेगा।

25-26 को कई जिलों में तेज बारिश
मौसम विभाग का कहना है कि 25 और 26 सितंबर को प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस अवधि के बाद मानसून के पूरी तरह लौटने की संभावना जताई जा रही है।
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यहां बन रहा निम्र दबाव का क्षेत्र
दरअसल, एक नया निम्न दाब क्षेत्र, 25 सितम्बर के आसपास पूर्व-मध्य और सन्निकट उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने की संभावना है। पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए, इसके 26 सितम्बर के आसपास दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों के पास उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अवदाब क्षेत्र (डिप्रेशन) बनने एवं इसके 27 सितम्बर के आसपास दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों को पार करने की प्रबल संभावना है।

प्रदेश में औसत से ज्यादा बारिश
इस बार मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़े सामान्य से अधिक रहे हैं। अब तक औसतन 43.9 इंच पानी बरस चुका है, जबकि सामान्य स्थिति में 36.5 इंच होना चाहिए था। यानी प्रदेश में लगभग 7.4 इंच अतिरिक्त पानी गिरा है। सामान्य बारिश का औसत 37 इंच माना जाता है और यह कोटा प्रदेश ने पिछले सप्ताह ही पूरा कर लिया था। आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश में 118 प्रतिशत बारिश दर्ज की जा चुकी है।
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इंदौर में भी आखिर आंकड़ा पूरा
शुरुआत में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति कमजोर रही थी। इंदौर जिले में सबसे कम बारिश हुई थी, जिससे चिंता थी कि यहां सामान्य बारिश भी होगी या नहीं। लेकिन सितंबर के दौरान हुई तेज बारिश ने तस्वीर बदल दी। अब इंदौर में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया है। हालांकि, बड़वानी, खरगोन और खंडवा जैसे जिलों में स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
उज्जैन में अभी भी औसत से दूर
उज्जैन संभाग की तस्वीर भी बेहतर नहीं है। यहां का औसत बारिश का कोटा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। सबसे कम बारिश वाले जिलों की सूची में शाजापुर दूसरे स्थान पर है। यह स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है क्योंकि पानी की उपलब्धता आने वाले समय में सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।
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