Surya Grahan Aur Rashiyan: सूर्य ग्रहण पर यह 3 राशियां रहें सतर्क, आर्थिक नुकसान के साथ कार्यक्षेत्र में हो सकती हैं दिक्कतें
Surya Grahan Aur Rashiyan: रविवार 21 सितंबर 2025 को इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से भी खास है क्योंकि इसी दिन सर्वपितृ अमावस्या पड़ रही है, जिसे पितृपक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। ग्रहण और अमावस्या का एक साथ आना इसे और भी खास बना रहा है। हालांकि यह खगोलीय घटना भारत से दिखाई नहीं देगी, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका असर कई राशियों पर पड़ सकता है।
कन्या राशि के लिए चुनौतीपूर्ण
ज्योतिष के जानकार मानते हैं कि इस बार का सूर्य ग्रहण कन्या राशि के लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अचानक आर्थिक नुकसान का खतरा है और धन से जुड़े कामों में अड़चनें आ सकती हैं। इसलिए इस समय कोई बड़ा निवेश या उधार लेने-देने से बचना चाहिए। नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ सकता है और पारिवारिक जीवन में भी तनाव महसूस हो सकता है। यदि कोई बड़ा फैसला लेना है तो कुछ समय रुक जाना ही समझदारी होगी।
वृश्चिक राशि को खर्च की अधिकता
वृश्चिक राशि वाले लोगों के लिए यह समय खर्च बढ़ाने वाला हो सकता है। अचानक आए खर्च आर्थिक संतुलन बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में जरूरत है कि अपने बजट को ध्यान से संभालें और अनावश्यक खरीदारी से बचें। मानसिक दबाव और थकान की संभावना भी है, इसलिए योग, ध्यान और रिलैक्सेशन जैसी गतिविधियों से खुद को संतुलित करना जरूरी होगा।

मकर राशि के कामकाज में रुकावट
मकर राशि वाले जातकों के लिए भी यह ग्रहण आसान नहीं रहेगा। इस दौरान कार्यक्षेत्र में दिक्कतें आ सकती हैं और व्यापार में भी योजनाओं पर असर पड़ सकता है। दांपत्य जीवन में मनमुटाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए बातचीत में संयम रखना जरूरी होगा। धैर्य और संतुलन के साथ समय गुजारना ही अच्छा उपाय माना गया है।
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भारत में दिखाई देगा या नहीं
यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 10 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। चूंकि यह घटना रात में हो रही है, इसलिए भारत में इसे देखा नहीं जा सकेगा। जब ग्रहण दिखाई न दे तो सूतक काल मान्य नहीं होता। इसी कारण इस बार मंदिरों में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी। लोग अपने नियमित कामकाज भी सामान्य तरीके से कर सकते हैं।

ग्रहण और धार्मिक मान्यताएं
हिंदू धर्म में ग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है। सामान्य मान्यता है कि ग्रहण के समय धार्मिक कार्यों से बचना चाहिए और स्नान-दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि इस बार भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए इन मान्यताओं का पालन आवश्यक नहीं है। फिर भी श्रद्धालु लोग अपनी आस्था के अनुसार व्रत या दान कर सकते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: खगोलीय घटना
विज्ञान के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर नहीं पड़ता। सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण जब उनकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है, तो ग्रहण का दृश्य बनता है। इसे दूरबीन या विशेष चश्मों की मदद से सुरक्षित तरीके से देखा जा सकता है। चूंकि यह ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां के लोगों के लिए यह केवल जानकारी का विषय है।
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भविष्य में कब होगा सूर्य ग्रहण
अगर आप भारत से सूर्य ग्रहण देखना चाहते हैं तो इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। खगोलविदों के अनुसार अगली बार भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण 2 अगस्त 2027 को दिखाई देगा। उस दिन लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे।
यह सूर्य ग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से खास माना जा रहा है। हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कन्या, वृश्चिक और मकर राशि के लोगों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। वहीं वैज्ञानिक मान्यता यह है कि ग्रहण एक प्राकृतिक घटना है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। लोगों को इसे केवल ज्ञान और अनुभव के रूप में देखना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और सामान्य विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। इसका किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं की जाती। किसी भी निर्णय से पहले अपनी आस्था और विवेक का प्रयोग करें।
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