Betul Ganeshotsav 2025: लोहिया वार्ड में पान ठेले से शुरू हुआ गणेशोत्सव का सफर, अब जिले का सबसे बड़ा आयोजन
Betul Ganeshotsav 2025: बैतूल का लोहिया वार्ड इस साल गणेशोत्सव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां नव ज्योति गणेश उत्सव समिति द्वारा स्थापित गणेश प्रतिमा ने हर किसी का ध्यान खींचा है। हैरानी की बात यह है कि इस मंडल की शुरुआत कई साल पहले बेहद साधारण रूप में हुई थी। आर्थिक तंगी के चलते कार्यकर्ता छोटे से पान ठेले पर गणेश प्रतिमा विराजित करते थे। लेकिन आज यही आयोजन पूरे जिले का सबसे बड़ा गणेशोत्सव बन चुका है।
समुद्र मंथन रूप में विराजे गणपति
इस बार गणपति बप्पा को समुद्र मंथन थीम पर सजाया गया है। लगभग 12 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी प्रतिमा पंडाल में विराजित है। विशाल प्रतिमा को देखकर श्रद्धालु भक्ति और आस्था से सराबोर हो जाते हैं। समुद्र मंथन की झांकी में गणेश प्रतिमा का स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बना हुआ है।

साधारण पृष्ठभूमि, लेकिन अद्भुत समर्पण
गणेश मंडल के सदस्य आज भी सामान्य पृष्ठभूमि से आते हैं। कोई ऑटो चलाता है, कोई चने बेचता है, कोई मनिहारी या फूलों की दुकान से परिवार चलाता है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सभी मिलकर तन-मन-धन से इस आयोजन को भव्य बनाने में जुट जाते हैं। यही सामूहिक आस्था और मेहनत इस आयोजन को विशेष बनाती है।
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भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गूंज
मंडल के पंडाल में सुबह-शाम आरती, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें आत्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव होता है। खास बात यह है कि हर साल गणेश प्रतिमा का अलग रूप देखने को मिलता है, जो श्रद्धालुओं को नई प्रेरणा भी देता है।

समिति के पदाधिकारियों की भूमिका
समिति अध्यक्ष नंदू मामा और उपाध्यक्ष हर्ष मालवी का कहना है कि पान ठेले से शुरू हुआ यह आयोजन आज जिले का सबसे बड़ा उत्सव बन चुका है। समिति के सदस्य दीपक सलूजा, अतीत पवार और कुशकुंज अरोरा ने बताया कि हर साल भव्य झांकी तैयार की जाती है और दूर-दराज़ से लोग इसके दर्शन करने पहुंचते हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों से उमड़ रही भीड़
इस बार न केवल बैतूल शहर, बल्कि आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह से लोहिया वार्ड का पूरा इलाका धार्मिक रंग में रंगा हुआ है।
सामाजिक संदेश भी देता आयोजन
हर साल गणेश प्रतिमा के अलग रूप से समाज को एक सकारात्मक संदेश देने की परंपरा इस मंडल ने कायम की है। समुद्र मंथन की इस थीम ने भी यह जताया कि कठिनाइयों और संघर्ष के बाद ही अमृत प्राप्त होता है। यही जीवन का सत्य है और यही गणेशोत्सव का महत्व है।
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