Revenue Officers Protest: MP में राजस्व अधिकारियों ने दिया आंदोलन का अल्टीमेटम, न्यायिक-विभाजन योजना पर नाराजगी
Revenue Officers Protest: मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने राज्य शासन द्वारा राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन की योजना के विरोध में पुन: आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इस संबंध में संघ ने 5 अगस्त को कलेक्टर के माध्यम से मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल को ज्ञापन प्रेषित किया है।
संघ की ओर से जारी ज्ञापन में बताया गया कि इस विभाजन योजना से संवर्ग हतोत्साहित है। पूर्व में दिनांक 16 जुलाई 2025 को संपूर्ण जिलों से ज्ञापन भेजे गए थे और 17 जुलाई को प्रांतीय कार्यकारिणी ने व्यक्तिगत रूप से ज्ञापन सौंपा था।
मुख्य सचिव ने दिया था मौखिक आश्वासन (Revenue Officers Protest)
मुख्य सचिव द्वारा मौखिक आश्वासन दिया गया था कि यह योजना केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी और तीन महीने तक राजस्व न्यायालयों को मर्ज नहीं किया जाएगा। साथ ही कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को आवश्यक संसाधन भी दिए जाएंगे। इसी आश्वासन के आधार पर विरोध को 20 जुलाई 2025 को स्थगित किया गया था।

आश्वासन के बावजूद कर दी गई लागू (Revenue Officers Protest)
संघ ने बताया कि आश्वासन के विपरीत धार, भिंड, खरगौन, बालाघाट, मंदसौर, देवास, कटनी, मंडला एवं रीवा जिलों में इस योजना को लागू कर दिया गया है। यहां राजस्व न्यायालयों का मर्ज किया गया, संसाधनों की कमी रही और निर्देशों की अनदेखी हुई। इसे लेकर दिनांक 26 जुलाई को माननीय राजस्व मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया, जिन्होंने मांगों से सहमति जताई, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
आपदा प्रबंधन को छोड़ सभी कार्यों से रहेंगे विरत (Revenue Officers Protest)
इस पृष्ठभूमि में 3 अगस्त को गूगल मीट के माध्यम से 45 जिलों के जिला अध्यक्षों, प्रभारियों और प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 6 अगस्त 2025 से संवर्ग के सभी अधिकारी जिला मुख्यालय पर उपस्थित रहकर केवल आपदा प्रबंधन के कार्यों में योगदान देंगे। अन्य सभी कार्यों से वे विरत रहेंगे।

सरकारी कार्यों से दूरी बनाकर मुख्यालय पर रहेंगे (Revenue Officers Protest)
ज्ञापन में कहा गया है कि अधिकारी कोई सामूहिक अवकाश या हड़ताल नहीं लेंगे, बल्कि सरकारी कार्यों से दूरी बनाकर मुख्यालय में बने रहेंगे। अधिकारी अपने शासकीय वाहन जमा कराएंगे, डिजिटल सिग्नेचर डोंगल सीलबंद कर जिला अध्यक्ष को सौंपेंगे और आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ देंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे सभी अधिकारी जिला स्थापना शाखा में संयुक्त उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर करेंगे।
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योजना तुरंत प्रभाव से वापस ली जाएं (Revenue Officers Protest)
संघ की मांग है कि राजस्व अधिकारियों को उनके मूल कार्यों से अलग करना प्रशासनिक दृष्टि से घातक है और न्यायिक तथा गैर-न्यायिक विभाजन की यह योजना तुरंत प्रभाव से वापस ली जाए। साथ ही यदि कार्यपालिक दंडाधिकारी का कार्य ही विभाजन का आधार है तो इस दायित्व को पुलिस या सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा जाए।
यह अधिकारी नहीं होंगे आंदोलन में शामिल (Revenue Officers Protest)
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में प्रशिक्षणरत परिवीक्षाधीन राजस्व अधिकारी इस आंदोलन में शामिल नहीं होंगे और अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। संघ ने शासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की अपील की है, जिससे प्रदेश में राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली बाधित न हो और एक सकारात्मक प्रशासनिक वातावरण बना रहे।
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ज्ञापन देते समय यह रहे उपस्थित (Revenue Officers Protest)
ज्ञापन देने वालों में तहसीलदार भैंसदेही भगवानदास कुमरे, तहसीलदार घोड़ाडोंगरी संतोष पथोरिया, तहसीलदार चिचोली डॉली रैकवार, तहसीलदार प्रभातपट्टन यशवंत गिन्नारे, आठनेर तहसीलदार कीर्ति डेहरिया, आमला तहसीलदार ऋचा कौरव एवं नायब तहसीलदार बैतूल बाजार पूनम साहू, श्यामसिंग नायब तहसीलदार बैतूल 2, बसंत कुमार बर्खानिया तहसीलदार भीमपुर, संजय बरैया तहसीलदार मुलताई, ठेबड़ा विस्के तहसीलदार शाहपुर उपस्थित रहे। (Revenue Officers Protest)
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