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Insurance claim rejected: बीमारी छिपाई, एक करोड़ का बीमा दावा खारिज; कोर्ट ने भी परिवार को नहीं दिया लाभ

Insurance claim rejected: बैतूल। एक हितग्राही का बीमा कंपनी से बीमारी छिपाकर बीमा कराना उनकी मृत्यु के बाद परिजनों के लिए मुसीबत बन गया। कोर्ट केस की लंबी लड़ाई के बावजूद कंपनी से परिजन बीमा पॉलिसी का लाभ नहीं ले सके। कोर्ट ने इस छोटी सी गलती के कारण उनका दावा खारिज कर दिया।

बीमा कंपनी की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट आकाश शुक्ला ने बताया कि जिला उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग बैतूल के न्यायालय में चले प्रकरण में नर्मदापुरम सोहागपुर निवासी अखिलेश कुमार सोनी ने पूर्व की बीमारियां छिपाते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम से जीवन बीमा करवाया था। उन्होंने बीमा करवाते समय प्रपोजल फॉर्म में गलत जानकारी प्रस्तुत की थी। मृतक की मृत्यु बीमा करवाने के एक वर्ष के अंदर ट्रेन से कटने से हो गई थी।

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25-25 लाख की ली थी 2 पॉलिसी (Insurance claim rejected)

मृतक द्वारा 25-25 लाख रुपए की दो पॉलिसी 25- 25 लाख के दुर्घटना हित लाभ के साथ ली गई थी। मृतक की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी ने एक करोड़ रुपए का मृत्यु दावा प्रस्तुत किया था। मृतक बीमा करवाने के पूर्व धमनी रोग, हृदय रोग एवं घातक गुर्दे की बीमारी का उपचार करने के लिए बंसल अस्पताल भोपाल में भर्ती रहे थे।

बीमा कंपनी से छिपाई थी यह बात (Insurance claim rejected)

उक्त जानकारी मृतक ने छिपाते हुए बीमा करवाया था। इस कारण बीमा कंपनी ने मृतक के उत्तराधिकारी का बीमा दावा निरस्त कर दिया था। इसके विरुद्ध मृतक के पुत्र मनु सोनी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग बैतूल में बीमा की राशि प्राप्त करने के लिए परिवाद दायर किया।

फोरम ने भी खारिज किया दावा (Insurance claim rejected)

उक्त परिवाद पर निर्णय देते हुए विजय कुमार पांडे अध्यक्ष एवं सदस्य चंद्रशेखर माकोड़े जिला उपभोक्ता आयोग बैतूल द्वारा मृतक अखिलेश कुमार सोनी द्वारा बीमा लेने के लिए दिए गए प्रस्ताव में अपने स्वास्थ्य संबंधी व बीमारी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा कर उसके संबंध में नकारात्मक उत्तर देकर प्रश्नाधीन बीमा पॉलिसियां प्राप्त करने के आधार पर मृतक के उत्तराधिकारी मनु सोनी का परिवाद बीमा कंपनी की कार्रवाई को सही ठहराते हुए खारिज कर दिया।

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तो नहीं होता परिवार का दावा खारिज (Insurance claim rejected)

अधिवक्ता श्री शुक्ला ने कहा कि हितग्राही अपनी बीमारी नहीं छुपाता तो उनके परिवार का दावा खारिज नहीं होता। उन्होंने बताया कि पूर्व से मौजूद बीमारी छिपा कर यदि जीवन बीमा करवाया गया है, तो इंश्योरेंस कंपनी मृत्यु दावा का भुगतान अस्वीकार करने का अधिकार रखती है।

आम लोगों को दी यह सलाह (Insurance claim rejected)

अधिवक्ता श्री शुक्ला ने आम लोगों को भी सलाह दी है कि जीवन बीमा या अन्य कोई भी बीमा करवाते समय बीमा फॉर्म के सभी कॉलम भी ध्यान पूर्वक भरें एवं बीमा कंपनी को सही जानकारी प्रदान करें, जिससे कि बीमित के उत्तराधिकारी बीमित की मृत्यु के पश्चात जीवन बीमा की राशि प्राप्त कर सके। (Insurance claim rejected)

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उत्तम मालवीय

मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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