SSC exam 2022 : एसएससी ने उठाया बड़ा कदम, परीक्षा को लेकर हो रहा ये बड़ा बदलाव

SSC exam 2022 : एसएससी ने उठाया बड़ा कदम, परीक्षा को लेकर हो रहा ये बड़ा बदलाव
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SSC exam 2022 : कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने पहली बार हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में मल्टी-टास्किंग स्टाफ (non technical) परीक्षा 2022 आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस पहल के लिए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (Union Minister of State for Personnel Jitendra Singh) ने एसएससी की सराहना की है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा यह कदम सभी नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के दृष्टिकोण के अनुरूप है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि भाषा की बाधा के कारण कोई भी उम्मीदवार अवसर से वंचित न रह जाए।

गौरतलब है कि कर्मचारी चयन आयोग भारत सरकार की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसियों में से एक है। इसका मुख्य कार्य भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/ विभागों में सभी समूह बी (non gazetted) और समूह सी (गैर-तकनीकी) पदों पर भर्ती करना है। आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं का माध्यम अब तक सामान्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी रहा है।

इन 13 क्षेत्रीय भाषाओं में होगी परीक्षा 

एसएससी द्वारा जिन 13 क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा लिए जाने का निर्णय लिया गया है, उनमें उर्दू, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, असमिया, बंगाली, गुजराती, कोंकणी, मणिपुरी (मैतेई), मराठी, ओडिया और पंजाबी शामिल हैं। इससे यह क्षेत्रीय भाषाएं जानने वाले युवा अपनी भाषा में प्रश्र पढ़कर उत्तर दे सकेंगे। उन राज्यों के युवाओं को इससे काफी सहूलियत होगी जो कि अंग्रेजी या हिंदी नहीं जानते।

लंबे समय से की जा रही थी मांग

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस कदम से विभिन्न राज्यों और विशेष रूप से दक्षिण भारत के उम्मीदवारों की अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं के अलावा अन्य भाषाओं में परीक्षा का आयोजन करने वाली लंबे समय से लंबित मांग पूरी हो सकेगी। मंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से पूरे देश में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को लाभ प्राप्त होगा।

अन्य भाषाएं भी की जाएंगी शामिल 

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि इस ऐतिहासिक कदम के बाद, धीरे-धीरे संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित सभी भाषाओं को शामिल करने की कोशिश की जा रही है।

डॉ. सिंह ने कहा कि कर्मचारी चयन आयोग निरंतर कोशिश कर रहा है कि देश के विभिन्न वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराया जाए, जिससे क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जा सके और संविधान के आदर्शों को प्राप्त किया जा सके तथा साथ ही साथ हमारे देश की भाषायी विविधता का उत्सव भी मनाया जा सके।

विशेषज्ञ समिति ने की थी सिफारिश 

डॉ. सिंह ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं की योजना और पाठ्यक्रम की समीक्षा करने के लिए, जिसमें परीक्षा का माध्यम भी शामिल है, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था।

समिति ने अन्य बातों के साथ-साथ यह भी सिफारिश की है कि निचले स्तर के पदों के लिए कई भाषाओं में परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए, जिसकी शुरुआत कुछ भाषाओं के साथ की जा सकती हैं और फिर धीरे-धीरे संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित सभी भाषाओं को इसमें शामिल किया जा सकता है। सरकार ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।

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