Betul Collector Action: बीआरसी को शोकॉज नोटिस, एएनएम-सीएचओ पर होगी कार्रवाई, स्कूलों में कम उपस्थिति पर भी गिरेगी गाज

Betul Collector Action: बीआरसी को शोकॉज नोटिस, एएनएम-सीएचओ पर होगी कार्रवाई, स्कूलों में कम उपस्थिति पर भी गिरेगी गाज
Betul Collector Action: बैतूल कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने कहा कि मातृ मृत्यु के प्रकरणों में लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना व्यवहार वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी किए जाएं। इसके साथ ही उनके परिजनों से चर्चा कर वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया जाएं। कलेक्टर श्री बैंस मंगलवार को मातृ मृत्यु के प्रकरणों की समीक्षा कर रहे थे।

कलेक्टर श्री बैंस ने इन प्रकरणों में विस्तृत जांच के लिए सीएमएचओ को निर्देश दिए। एक प्रकरण में लापरवाही होने से एएनएम एवं सीएचओ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मातृ मृत्यु के समस्त कारणों की समीक्षा कर ऐसे एसओपीएस बनाकर सर्कुलेट करने के निर्देश दिए, जिससे मातृ मृत्यु दर कम की जा सके।

एनीमिया मुक्त युवा अभियान की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि विद्यार्थियों की निम्न उपस्थिति वाले स्कूलों के जिम्मेदार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएं। विकासखंड भीमपुर के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति संतोषजनक परिलक्षित नहीं होने पर वहां के बीआरसी को भी कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने विकासखंड आठनेर, शहरी एवं ग्रामीण बैतूल (सेहरा) एवं विकासखंड शाहपुर में एनीमिक बच्चों की स्क्रीनिंग कम होने पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। कलेक्टर ने खंड चिकित्सा अधिकारियों को पाबंद किया कि वे स्कूलों में रेंडमली पहुंचे एवं स्क्रीनिंग कार्य का निरीक्षण करें। जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या कम पाई जा रही है, वहां स्क्रीनिंग के लिए मोबाइल टीम गठित की जाएं।

Betul Collector Action: बीआरसी को शोकॉज नोटिस, एएनएम-सीएचओ पर होगी कार्रवाई, स्कूलों में कम उपस्थिति पर भी गिरेगी गाज

एनीमिया मुक्त युवा अभियान के द्वितीय चरण में हेल्थ कार्ड को बीईओ एवं बीआरसी के माध्यम से स्कूलों में उपलब्ध कराया जाए। बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जुड़वां बच्चों वाली गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान एहतियातन बरती जाने वाली सावधानियों का परामर्श दें। नवजात शिशुओं को जन्म लेते ही वार्ड में ही शीघ्र स्तनपान कराया जाए, इसके लिए माताओं को भी परामर्श प्रदान किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रसव पश्चात फॉलोअप को बढ़ावा दिया जाए। मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रत्येक सोमवार एवं गुरूवार को जच्चा क्लीनिक संचालित करें एवं गर्भवती माता की गर्भावस्था में आठ जांच करना सुनिश्चित करें। उन्होंने इस बात पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कहा कि आयरन गोलियां शिक्षकों की उपस्थिति में ही विद्यार्थियों को खिलाई जाएं।

उन्होंने कहा कि एनीमिक पाए जाने वाले बच्चों के माता-पिता से भी संपर्क कर संबंधित मैदानी अमले द्वारा उनकी समुचित काउंसिलिंग की जाएं। काउंसिलिंग गांव के चौपाल अथवा ग्राम पंचायत भवन में आयोजित की जाए, जहां हैंड वॉश, नाखूनों की सफाई, भोजन पकाने एवं परोसने में स्वच्छता, आयरन युक्त आहार के संबंध में जानकारी दी जाएं।

उन्होंने कहा कि सिकलसेल एवं थैलेसीमिया बीमारी वाले बच्चों की विशेष काउंसिलिंग की जाएं। इन बच्चों के घरों पर भी स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला जरूर पहुंचे। बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिक्षकों का सामान्य प्रशिक्षण करने के लिए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया। सिकलसेल एवं थैलेसीमिया वाले बच्चों एवं उनके अभिभावकों की जिला स्तर पर काउंसिलिंग की जाए।

बैठक में सीईओ जिला पंचायत अभिलाष मिश्रा, सीएमएचओ डॉ. सुरेश बौद्ध, सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी गौतम अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शिल्पा जैन एवं डीपीसी संजीव श्रीवास्तव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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