Agniveer Dudh wala: एमबीए चायवाला के बाद अब बैतूल में हाजिर ‘अग्निवीर’ दूध वाला, बड़ी रोचक है इन युवाओं की कहानी

Agniveer Dudh wala: एमबीए चायवाला के बाद अब बैतूल में हाजिर 'अग्निवीर' दूध वाला, बड़ी रोचक है इन युवाओं की कहानी

▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)

Agniveer Dudh wala: अभी तक आपने एमबीए चायवाला और इंजीनियर चायवाला सुना होगा। इन सबसे हटकर मध्यप्रदेश के बैतूल शहर में है अग्निवीर केसर पिस्ता मलाई दूधवाला। दरअसल, दो दोस्त अग्निवीर भर्ती के जरिए सेना में जाकर करना तो देश की सेवा चाहते थे, लेकिन उसमें कामयाब नहीं हो पाए।

इसके बाद उन्होंने अन्य युवाओं को अग्निवीर भर्ती में जाने लायक पर्याप्त ऊर्जा देने और साथ ही अन्य युवाओं के लिए भी आत्मनिर्भर बनने की मिसाल पेश करने यह व्यवसाय शुरू कर दिया। वे अपने इस कदम से यह भी साबित कर रहे हैं कि हर असफलता एक सफलता का रास्ता खुद प्रशस्त करती है।

दरअसल, बैतूल के दो दोस्त नीलेश परिहार और विजय यादव अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर फौजी बनकर देश की सेवा करने के लिए मेहनत कर रहे थे। बदकिस्मती से सारे प्रयासों के बावजूद भर्ती में उनका चयन नहीं हुआ। उन्हें अधिक निराशा इसलिए हुई क्योंकि यह उनका पहला और आखिरी अवसर था। दोनों की उम्र पूर्ण हो गई थी।

हालांकि वे इस असफलता के बावजूद पूरी तरह निराश नहीं हुए। दोनों शिक्षित युवक किसान परिवार से हैं तो उन्होंने सोचा क्यों ना आगे की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम और किसानी से जुड़ा हुआ ही व्यवसाय किया जाए। माता-पिता अपने बच्चों को कड़ी मेहनत करके पढ़ाते हैं ताकि बच्चे कुछ बने और अपनी जिंदगी अच्छे से बिता पाए। पढ़ाई के बाद भी जब नौकरी ना मिले तो वह बच्चा ही नहीं उसके परिजन भी निराश हो जाते हैं।

ऐसी स्थिति में युवा भी खुद को बेबस समझने लगता है। इन सबसे हटकर दोनों युवाओं ने नौकरी न मिलने पर लोगों को यह संदेश दिया कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता।

Agniveer Dudh wala: एमबीए चायवाला के बाद अब बैतूल में हाजिर 'अग्निवीर' दूध वाला, बड़ी रोचक है इन युवाओं की कहानी

शुरू किया गर्म दूध का व्यवसाय (Agniveer Dudh wala)

जब भर्ती में सिलेक्शन नहीं हो पाया तो दोनों युवाओं ने ठाना कि पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम खुद का व्यवसाय प्रारंभ करेंगे। दोनों किसान परिवार एवं स्वयं पशु पालक होने से उन्होंने दूध का व्यवसाय चुना और सर्दी का मौसम होने से कुल्हड़ में गर्म दूध पिलाने और गरमा गरम रबड़ी खिलाने का व्यवसाय एक माह पूर्व प्रारंभ किया।

आगामी समय में वे दूध के स्वयं के कई और अन्य उत्पाद भी बनाकर बेचने की तैयारी में हैं।

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पुलिस ग्राउंड के सामने लगाते हैं स्टाल

नीलेश और विजय बताते हैं कि पुलिस ग्राउंड में अग्निवीर की तैयारी करने खूब मेहनत कर पसीना बहाते थे। इस ग्राउंड से हमें बहुत लगाव है पर शायद किस्मत ने साथ नहीं दिया। इसी लगाव ने हमें ग्राउंड के मेन गेट के सामने व्यवसाय करने की प्रेरणा दी और हम आत्मनिर्भर बन गए। अग्निवीर तो ना बन पाए मगर अपने स्टाल का नाम जरुर “अग्निवीर” केसर मिल्क रबड़ी पॉइंट रख लिया।

सर्दियों में खूब भा रही है गरमा गरम रबड़ी और केसर दूध (Agniveer Dudh wala)

सर्दियों में शाम के समय ग्राउंड पर घूमने वाले और कसरत करने वाले लोगों को खूब भा रही है दूध की रबड़ी और केसर मिल्क दूध ये टेस्‍ट के साथ हेल्‍थ के ल‍िए भी है बेस्‍ट। आयुर्वेद के अनुसार दूध के सेवन से ओज बढ़ता है और शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। दूध जीवनीय शक्ति बढ़ाने और बल बुद्धि एवं सभी धातुओं को पोषित करने वाला गुणकारी औषधि है।

शाम की सर्दी की आहट के साथ ही यहां भट्टी पर बड़ी कढ़ाई में गरमा गरम उबलने लगता है। जैसे-जैसे दूध पकता है ऊपर मोटी मलाई की तह जमती जाती है। जैसे-जैसे रात बढ़ती है दूध का रंग और गहराता जाता है। इसमें डाला केसर, पिस्ता, बादाम और गुलाब की पंखुड़ी की खुशबू दूर-दूर तक लोगों को पीने के लिए लालायित होने लगती है।

Agniveer Dudh wala: एमबीए चायवाला के बाद अब बैतूल में हाजिर 'अग्निवीर' दूध वाला, बड़ी रोचक है इन युवाओं की कहानी

कुल्हड़ से हो जाता है स्वाद दोगुना

सर्दियों में गर्म दूध पीना और मलाईदार रबड़ी खाना सभी को बेहद पसंद होता है और वह भी कुल्हड़ में मिल जाय तो स्वाद की ग्रंथि पर चार चांद लग जाते हैं।

युवा अपने व्यवसाय के साथ-साथ कुम्हार को भी रोजगार दे रहे हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अपने व्यंजन को डिस्पोजल की बजाए मिट्टी के बने कुल्हड़ में ग्राहकों को दे रहे। मिट्टी के कुल्हड़ में मोटी मलाई से लबालब गर्म दूध की हर चुस्की मजेदार एहसास कराती है।

तैयारी कर रहे युवाओं के देते हैं मार्गदर्शन (Agniveer Dudh wala)

पुलिस ग्राउंड पर कई ऐसे युवा भी आते हैं जो कि सेना भर्ती की तैयारी कर रहे होते हैं। स्टाल का अग्निवीर नाम देख कर वे उत्सुकता से यहां आते हैं और इस बार पूछताछ भी करते हैं।

उनसे जब नीलेश और विजय यह जानते हैं कि वे भी सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्हें जरूरी मार्गदर्शन भी देते हैं। अपने अनुभव के आधार पर वे यह जरूर बताते हैं कि कौनसी गलती नहीं करना है।

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