Agriculture News : दिसंबर में ही आ गए बौर, झड़ने और जलने का खतरा, कहीं इस साल खास न हो जाए आम

Agriculture News : दिसंबर में ही आ गए बौर, झड़ने और जलने का खतरा, कहीं इस साल खास न हो जाए आम

▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)

Agriculture News : फलों के राजा आम में बौर आने का सही समय फरवरी माह वसंत पंचमी होता है। जिससे पैदावार अच्छी होती है और बागवानों को काफी मुनाफा हो जाता है। लेकिन, इस बार दिसंबर माह में आम के पेड़ पर बौर आ गए हैं। जिसके खराब होने का खतरा ज्यादा है। इससे पैदावार प्रभावित होने का भी खतरा बन गया है।

हर भारतीय के दिल में आम की एक ‘खास’ जगह है और ये खास जगह कुछ बरसों या दशकों से नहीं, बल्कि सदियों से है। कुल मिलाकर कहा ये जा सकता है कि भारतीयों और आम के बीच एक खास रिश्ता है। जिसमें कभी खटास आने का भी कोई चांस नहीं है।

लोगों के दिलों पर राज करने वाला आम इसलिए ही फलों का भी राजा है। दुनिया में सबसे अधिक आम का उत्पादन भारत में ही होता है। देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे प्रदेश हैं। इनमें से सबसे अधिक आम का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। आम की यह भी खास बात है कि भारत से लगभग 1 हज़ार वैरायटी का निर्यात किया जाता है।

पाला पड़ते ही जल जाएगा बौर

आम बागानों में बौर आने का सही समय फरवरी माह माना जाता है। लेकिन, पहले निकलने वाला बौर पाला पड़ते ही जल जाता है। जिससे दोबारा बौर आने में काफी समय लग जाएगा और पैदावार का समय भी निकल जाता है।

कम होगी आम की पैदावार

वातावरण में बदलाव के चलते आम बागानों में समय से पहले बौर आना चिंता का विषय है। लगातार बढ़ रहा प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग इसका कारण है। समय से पहले बौर निकलने से पैदावार घट जाती है।

ऐसे बचा सकते हैं बौर को

किसान आशीष वर्मा ने बताया कि पौधे पर सल्फर का स्प्रे कर और साथ ही आम के पेड़ के आजू-बाजू धुआं करके धुंध और पाले से बौर को बचाया जा सकता है। साथ ही आम की फसल की सिंचाई मटर के दाने के बराबर फल हो जाने पर करनी चाहिए। जिससे बौर झड़ने का खतरा नहीं होता।

पलाश के टेसू भी खिल गए पहले

इस साल आम में बौर जल्दी आने के साथ ही पलाश में फूल (टेसू) भी समय से पहले ही खिल गए हैं। जल पुरुष और पर्यावरणविद मोहन नागर इस बारे में बताते हैं कि अभी ठण्ड दो-तीन दिन से बढ़ी है किन्तु इस बार हेमन्त ऋतु में दिन का तापमान अधिक हो जाने से पेड़-पौधे भी प्रभावित हुए हैं । आम में बौर भी जल्दी आये हैं और फागुन में खिलने वाले पलाश में इस बार पौष में ही फूल (टेसू) खिल गये हैं ।

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