DBW 296 (Karan Aishwarya): कम पानी में अधिक उपज देती है गेहूं की किस्म DBW 296 (करण ऐश्वर्या), रिकॉर्ड पैदावार ने सबको चौकाया!

कम पानी में अधिक उपज देती है गेहूं की किस्म DBW 296 (करण ऐश्वर्या), रिकॉर्ड पैदावार ने सबको चौकाया!

(गेहूं की किस्म DBW 296 करण ऐश्वर्या) गेंहू की सबसे बेस्ट किस्मों में से एक DBW 296 (करण ऐश्वर्या) जो कम पानी में भी ज्यादा उपज देती है। वैज्ञानिकों ने इसे कुपोषण दूर करने और बिस्किट बनाने के लिए उपयुक्त माना है। सबसे बढ़कर, गेहूं की यह किस्म रोगों के लिए प्रतिरोधी है।

चलिए जानते है गेहूं की किस्म DBW 296 के बारे में…

गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 296 (करण ऐश्वर्या) आईसीएआर-भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा विकसित एक नई उच्च उपज देने वाली गेहूं की किस्म है।

DBW 296 (करण ऐश्वर्या) किस्म कम पानी वाले क्षेत्र के लिए बेस्‍ट है

  • इसकी उपज क्षमता 83.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
  • यह किस्म केवल 2 सिंचाई से 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज देगी।
  • दाना नरम से अर्ध-कठोर, लम्बा, एम्बर रंग का होता है जिसका वजन 1000 दाने ~ 43 ग्राम होता है।
  • गेहूं की यह किस्म बहुउद्देशीय उत्पादों जैसे ब्रेड, चपाती और नान के लिए भी उपयुक्त है।
  • DBW 296 (करण ऐश्वर्या) किस्म पीले, भूरे और काले “जंग” और अन्य बीमारियों के लिए प्रतिरोधी है।
  • गेहूं की यह नई किस्म सभी प्रमुख बीमारियों के लिए प्रतिरोधी है जिससे गेहूं की उपज कम हो सकती है, किसान रोग नियंत्रण के लिए कवकनाशी के उपयोग से बचकर लगभग 2200 रुपये प्रति हेक्टेयर बचा सकते हैं।

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अब जानते है कैसे करें DBW-296 की खेती 

यदि आप अच्‍छेे किस्‍म के गेहूं की प्रजाति की तलाश कर रहे है तो ये किस्‍म आपके लिए बेस्‍ट होगी। इस किस्म की बुवाई किसान 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक कर सकते हैं। यदि बुवाई सीड ड्रिल से करेंगे तो उपज अच्छी प्राप्त होगी।

सबसे खास बात यह है कि इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 से.मी. रखी जानी जरुरी है। आप बुआई के लिए बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक रख सकते हैं। DBW-296 गेहूं की एक सिंचाई बुवाई से पहले और दूसरी सिंचाई बुआई के 45 से 50 दिनों बाद करना सही होता है।

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ऐसे करें बीज का उपचार और खाद का छिड़काव 

वैसे ये किस्‍म तो रोग प्रतिरोधक है, लेकिन फिर भी प्रणालीगत और संपर्क कवकनाशी के बचाव के लिए गेहूं के बीज को (कार्बोक्सिन 37.5 प्रतिशत + थीरम 37.5 प्रतिशत) / 2 -3 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीज दर से उपचारित जरुर करें। वहीं आप सिमित सिंचाई के अंतर्गत सर्वश्रेठ प्रदर्शन के लिए 90:60:40 किलोग्राम एनपीके/हेक्टेयर का प्रयोग कर सकतेे है। यहां यह जानना जरूरी है कि नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय तथा प्रथम नोड (45–50 दिन बाद) अवस्था पर देनी चाहिए।

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इस तरह करें खरपतवार का नियंत्रण

किसी भी फसल के अच्छे उत्पादन के लिए खरपतवार का नियंत्रण बेहद ही जरुरी है। गेहूं की इस किस्‍म में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए आपको 2,4-डी/500 ग्राम/हैक्टेयर या मेट्सल्फूराँन 4 ग्राम/हेक्टेयर या कारफेंट्राजोन/20 ग्राम/हेक्टेयर लगभग 300 लीटर पानी/हेक्टेयर का उपयोग करना चाहिए।

इसके अलावा यदि संकरी पत्ती का घास खेत में फसलों के बीच उग आता है तो इसके नियंत्रण के लिए आइसोप्रोट्यूराँन /1000 ग्राम/हेक्टेयर या क्लाँडिनाफाँस /60 ग्राम/हेक्टेयर, पिनेक्सोडेन/50 ग्राम/हेक्टेयर या फिनोक्साप्रोप/100 ग्राम/हेक्टेयर सल्फोसल्फ्यूराँन/25 ग्राम प्रति हेक्टेयर फिनोक्साप्रोप/100 ग्राम/हैक्टेयर का उपयोग किया जा सकता है।  यहां यह जानना जरूरी है कि  खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 30 से 40 दिनों बाद पर्याप्त मृदा में नमी के बाद प्रयोग करना चाहिए।

High yielding wheat variety DBW 296 (Karan Aishwarya) | Krishak Jagat

इन इलाकों के लिए सबसे अच्‍छी है ये किस्‍म 

गेहूं की ये किस्‍म DBW 296 (करण ऐश्वर्या) भारत के उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों के लिए जारी किया गया था। उत्तर पश्चिमी मैदानों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजनों को छोड़कर), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्से (जम्मू और कठुआ जिले), हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से (ऊना और पांवटा घाटी जिले) शामिल हैं। उत्तराखंड (तराई क्षेत्र)।

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