MP Hi-Tech Farming : एमपी के इस जिले में हाईटेक हुई खेती, यहां मजदूर नहीं ड्रोन से होता है कीटनाशक छिड़काव, आप भी जानें इसके फायदे

▪️ लोकेश वर्मा, मलकापुर (बैतूल)

MP Hi-Tech Farming : खेती हाईटेक (Hi-Tech Farming) होगी तभी तो किसान की आय भी बढ़ पाएगी। नई-नई तकनीक और नए बीज ही किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित हो सकते हैं। बहरहाल, आज हम आपको खेती की ही ऐसी टेक्नॉलोजी के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि अब किसानों के इस्तेमाल में आने लगी है। हम बात कर रहे हैं ड्रोन स्प्रे पंप (drone spray pump) की। जिससे आप अब अपने खेतों में कीटनाशक का छिड़काव मात्र कुछ ही मिनटों में कर पाएंगे।

मध्यप्रदेश के बैतूल जिला मुख्यालय (Betul District In MP) के समीप स्थित ग्राम सोहागपुर, रतनपुर, मलकापुर, खंडारा, राठीपुर के किसान ड्रोन से करवा रहे हैं कीटनाशक का छिड़काव (Drone spraying pesticides)। जिले में पहली बार ड्रोन से कीटनाशक दवाई के छिड़काव का प्रयोग हुआ। जिसे देखने के लिए दर्जनों लोग उपस्थित भी रहते हैं। क्षेत्र में गन्नाबाड़ी में नरक्या नामक रोग लगने से पत्ती पीली होने पर शुगर मिल द्वारा किसानों को किराए से दवा छिड़काव हेतु ड्रोन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसान के कप की चाय खत्म नहीं होती, उसके पहले एक क्लिक में एक एकड़ में दवा डल चुकी होती है।

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अभी तक यह तकनीक होती थी उपयोग

पहले किसान स्प्रे के लिए पीठ पर बांधकर स्प्रे टंकी का इस्तेमाल करते थे। बाद में स्प्रे टंकी में भी बदलाव हुआ। पेट्रोल वाला पॉवर पंप आया, जिससे दिन भर का काम कुछ घंटों में होने लगा। परंतु इसमें खर्च होने वाले पेट्रोल की लागत बढ़ गई। धीरे-धीरे यह चलन के बाहर हुआ। फिलहाल बैटरी से चलित पॉवर पंप किसान की पहली पसंद है। इसके साथ ही खेतों में कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए ट्रैक्टर से संचालित स्प्रे मशीन आ गई है जिसका इस्तेमाल किसान करते हैं।

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अब एग्रीकल्चर ड्रोन स्प्रेयर का इस्तेमाल | MP Hi-Tech Farming

अब एक नई तकनीक आई है जिस नाम दिया गया है एग्रीकल्चर ड्रोन स्प्रेयर तकनीक। इससे कम लागत में खेतों में कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है और साथ ही समय की भी बचत होती है। ड्रोन स्प्रे एक ऐसा उपकरण है जो हवा में रह कर फसल पर स्प्रे करता है। यह यंत्र रिमोट से चलित होता है। ड्रोन से मात्र 5 से 10 मिनट में एक एकड़ में कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। ड्रोन की टंकी में 20 लीटर पानी की क्षमता है। जिससे आसानी से कीटनाशक दवाई मिलाकर आप एक एकड़ में स्प्रे का छिड़काव कर सकते हैं।

ट्रैक्टर से छिड़काव से भी काफी सस्ता |MP Hi-Tech Farming

बात करें ट्रैक्टर द्वारा संचालित स्प्रे मशीन की तो इसमें 500 से 700 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही दो से तीन मजदूरों की जरूरत पड़ती है। इसके बाद एक घंटे में एक एकड़ में कीटनाशक का छिड़काव हो पता है। साथ ही इस यंत्र में डीजल का खर्च भी है। इस लिहाज से देखें तो ड्रोन से छिड़काव हर तरह से फायदेमंद है।

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मोबाइल की तरह चलाना भी है आसान |MP Hi-Tech Farming

इसे चलाना उतना ही आसान है जितना कि मोबाइल चलाना (MP Hi-Tech Farming)। ड्रोन को एक ऐप के माध्यम से चलाया जाता है। जिसे जीपीएस की सहायता से चलाया जाता है। ड्रोन में लगा कैमरा पायलट के हाथों में मौजूद रिमोट में लगी स्क्रीन पर फसल का एरिया दिखाई देता है। इसमें एक बैटरी लगी होती है जो कि मात्र 20 मिनट में चार्ज हो जाती है। बैटरी एक बार चार्ज होने के बाद 4 से 5 एकड़ की फसल में सभी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। कीटनाशक, खाद, नेनो यूरिया, फफूंदनाशक और अन्य रासायनों का छिड़काव आसानी से किया जा सकता है।

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गन्ने की फसल के लिए प्रभावी तकनीक

बैतूल जिले में गन्ने का उत्पादन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। गन्ना अधिक ऊंचा होने पर पत्तियों में दवा का छिड़काव कर पाना असंभव था। ड्रोन सिंचाई से ऊपर से सिंचाई होने के साथ ही ड्रोन के फव्वारे का प्रेशर अधिक होने से जमीन तक दवा का स्प्रे हो जाता है। साथ ही फसलों को स्प्रे करने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग हर प्रकार के हानिकारक प्रभाव को समाप्त करता है, जो रसायनों का मनुष्य पर हो सकता है। यह दृष्टि से यह सबसे सुरक्षित माध्यम है (MP Hi-Tech Farming)।

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छिड़काव में पानी और समय की बचत

ड्रोन मैन्युअल छिड़काव की तुलना में 50-60 गुना तेजी से कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव कर सकता है। एक एकड़ में दवा स्प्रे करने में मात्र 5 से 10 मिनट लगते हैं। ड्रोन के छिड़काव से 90 प्रतिशत तक पानी के उपयोग और 40 प्रतिशत कीटनाशकों के उपयोग को बचाया जा सकता है। बराबर अनुपात में घोल बनाकर स्प्रे होने से फसल में अच्छा खासा फायदा होता है। जिससे कीटनाशक की अनावश्यक फिजूलखर्ची से पैसों की बचत भी होती है।

क्षेत्र के किसानों का यह है कहना

♦ रतनपुर के किसान प्रेमकांत वर्मा बताते हैं कि क्षेत्र में गन्नाबाड़ी में हो रहे नरक्या नामक रोग से गन्ने की पीली पत्ती हो रही थी। गन्ना अधिक ऊंचा होने से दवा का छिड़काव कर पाना असंभव था। मगर इसकी रोकथाम के लिए शुगर मिल द्वारा क्षेत्र के किसानों को ड्रोन से जो दवा सिंचाई की जा रही है वह गन्ना बाड़ी के लिए बहुत ही कारगर है। दवाई डालने के तुरंत बाद से ही गन्ने की पत्ती पर बैठने वाले कीड़े का आतंक खत्म होता दिखाई दे रहा है।

♦ बुंडाला के कृषक जितेंद्र वर्मा कहते हैं कि मजदूरों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। बड़े रकबों में दवा डलवाना ड्रोन की अपेक्षा काफी महंगा पड़ता है। साथ ही कीटनाशक भी सही अनुपात में नहीं डाल पाता है। ड्रोन से पर्णीय छिड़काव होने से पौधों पर एक समान दवाई की मात्रा मिलती है।

♦ मलकापुर के कृषक मनीष चौधरी कहते हैं कि मेरी 5 एकड़ की गन्ना बाड़ी में दवा डलवाने में दिन भर लग जाता था। परंतु ड्रोन की सहायता से मात्र एक घंटे में छिड़काव हो गया। साथ ही एक जैसी दवा का छिड़काव होने से रिजल्ट भी दूसरे दिन ही प्राप्त हो गया।

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