Gehu Ki Top Varieties: गेहूं की यह नई किस्‍में किसानों को बना रही मालामाल, कम सिंचाई में भी होता है बंपर उत्‍पादन, 120 दिनों में होती है तैयार

Gehu Ki Top Varieties: गेहूं की नई किस्‍में किसानों को बना रही मालामाल, कम सिंचाई में भी होता है बंपर उत्‍पादन| Betulupdate

Gehu Ki Top Varieties: खरीफ की फसलों (Kharif crops) की कटाई का समय आ गया है। जल्‍द ही रबी की फसलों (Rabi crops) की बुआई भी शुरू हो जाएगी। भारत में अधिकांश इलाकों में गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) की जाती है। इसके लिए किसानों को अच्‍छी किस्‍मों के बारे में पता चले तो वे अच्‍छा उत्‍पादन ले सकते हैं। इससे अच्‍छा मुनाफा भी कमा सकते हैं। आज हम ‘बैतूल अपडेट’ पर आपको गेहूं की नवीन तीन किस्‍मों (3 New Varieties of Wheat) के बारे में बताएंगे, जो कई किसानों को बेहतर उत्‍पादन दे रही है और किसान इसे लगाकर मालामाल हो रहे हैं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)- भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान केंद्र करनाल (IIWBR) के अनुसार गेहूं की ये किस्‍में सबसे नई हैं और इनको लगाने से किसानों को बंपर पैदावार भी मिलती है।

करण नरेन्द्र (Karan Narendra / DBW-222)

हम गेहूं की जिन नवीन किस्‍मों की बात कर रहे हैं, उसमें सबसे ज्‍यादा उत्‍पादन देने वाली किस्‍म का नाम है करण नरेन्द्र। इसे डीबीडब्ल्यू 222 (DBW-222) भी कहा जाता है। गेहूं की यह किस्म बाजार में साल 2019 में आई थी। इस गेहूं की रोटी की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है। इसकी खासियत यह है कि जहां दूसरी किस्मों के लिए 5 से 6 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, वहीं इसमें 4 सिंचाई की ही जरूरत पड़ती है। इसकी बुवाई 25 अक्टूबर से 25 नवंबर के बीच कर सकते हैं। वहीं, ये किस्म से फसल 143 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे प्रति हेक्टेयर 65.1 से 82.1 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है।

करन वंदना (Karan Vandana/DBW-187)

दूसरी किस्‍म का नाम करन वंदना है। इस डीबीडब्ल्यू-187 (DBW-187) कह सकते हैं। इसमें पीला रतुआ और ब्लास्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना कम होती है। यह किस्म गंगा तटीय क्षेत्रों के लिए अच्छी मानी जाती है। इस किस्म से फसल लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 75 क्विंटल गेहूं की पैदावार मिल जाती है।

करण श्रिया (Karan Shriya/DBW-252)

ये गेहूं की सबसे नवीन किस्‍म है, जिसका नाम करण श्रिया (Karan Shriya/DBW-252) है। य‍ह किस्‍म जून 2021 में ही आई थी। इस किस्म की बुवाई उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अधिक होती है, जो कि करीब 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और इसमें मात्र एक सिंचाई की जरूरत पड़ती है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 55 क्विंटल अधिकतम पैदावार दे देती है। 

News Source : Krishijagran

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