Betul Farmhouse Kand: आखिर क्या है फॉर्म हाउस का सच… बगैर आग लगे नहीं उठता धुआं, सामने आना चाहिए पूरी हकीकत

After all, what is the truth of the farm house... Smoke does not rise without a fire, the whole reality should come out

आखिर क्या है फॉर्म हाउस का सच... बगैर आग लगे नहीं उठता धुआं, सामने आना चाहिए पूरी हकीकत

▪️उत्तम मालवीय, बैतूल

Betul Farmhouse Kand: बैतूल जिले में पिछले कुछ दिनों से फार्म हाउस कांड की बड़ी जोरशोर से चर्चा है। मीडिया में भी यह मुद्दा प्रमुखता से छाया है। पूरी कहानी का लब्बोलुआब यही बताया जा रहा है कि बैतूल के पास एक फॉर्म हाउस में शहर के कुछ रईसजादे अय्याशी में मशगूल थे। इसी बीच भनक लगने पर एक कानून के रखवाले ने वहां दबिश दे डाली। इसके बाद रंगे हाथ पकड़ाए उन रईसजादों को अपनी इज्जत के तार-तार होने का डर सताया। वे कथित इज्जत बचाने हर तरह का त्याग और बलिदान देने को तैयार थे। वहीं रखवाले ने भी उन पर ‘रहम’ खाते हुए उनकी ‘इज्जत’ और ‘आबरू’ बचाने में पूरा-पूरा सहयोग किया। इस ‘सहयोग शुल्क’ का आंकड़ा भी गजब का बताया जा रहा है।

अब इस पूरी कहानी में कितनी हकीकत है और कितनी कपोल कल्पना, यह तो वे रईसजादे जाने और वो कानून का रखवाला, लेकिन हमारा तो मानना है कि जब तक आग नहीं लगेगी, तब तक धुआं उठना संभव नहीं है। ऐसे में यह कप्तान की जिम्मेदारी बनती है कि वे पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करें। पुलिस का मुखबिर तंत्र बड़ा तगड़ा होता होता है, वहीं आज के तकनीक के इस जमाने में कौन किस दिन कहां था, यह पता लगाना भी कोई नामुमकिन नहीं है। ऐसे में जल्द से जल्द उस रखवाले को बेनकाब करके उस पर पर गाज गिराई जाना जरूरी है। अन्यथा प्रदेश के मुखिया के फिलहाल जिस तरह के तेवर हैं, उसे देखते हुए कहीं किसी और पर ही गाज ना गिर जाएं।

चर्चा यह भी है कि इस मामले के सरगर्म होते ही संभाग की आईजी ने भी इस पूरे मामले का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने इस मामले में शहर के कुछ लोगों से जानकारी भी ली है। इससे भी ज्यादा खास बात यह बताई जा रही है कि भोपाल में पदस्थ किन्हीं एडीजी आदर्श कटियार द्वारा भी इस पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। ऐसे में आसार तो यही लग रहे हैं कि जल्द ही इस मामले में उच्च स्तर से कोई बड़ा धमाका हो सकता है।

इन हालातों में बेहतर यही होगा कि उच्च स्तर से कुछ हो, इससे पहले ही पूरा मामला साफ कर दिया जाएं। यदि वाकई में ऐसा हुआ है तो उस रखवाले पर सख्त से सख्त कार्यवाही हो। ताकि भविष्य में ऐसे आरोपों से महकमे का दामन पाक साफ रह सके। इसके विपरीत यदि ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो कप्तान पूरी स्थिति साफ करें। इस तरह के गंभीर आरोप लगने से महकमे की इज्जत को बट्टा ही लग रहा है। यह पहली बार नहीं हुआ है कि इस तरह के गंभीर आरोप लगे हो या ऐसी चर्चाएं महकमे को लेकर पहली दफा हो रही हो।