khatara utha kar school chale ham : रपटा क्षतिग्रस्त, तेज बहाव वाली नदी से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल, हो सकता बड़ा हादसा

Slip damaged, a young woman forced to go to school through a fast flowing river, may be a big accident

▪️ निखिल सोनी, आठनेर
एक ओर बैतूल जिले के कई गांवों में नदी-नालों पर रपटे नहीं बने हैं। ऐसे में ग्रामीणों को हर साल बारिश में मुसीबत उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कई गांवों में तेज बारिश से रपटे और पुलिया के बह जाने के कारण परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। आठनेर क्षेत्र के आष्टी गांव में भी लोग इसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं। यहां बच्चों को स्कूल जाने के लिए पहले तेज बहाव और पत्थरों भरी नदी पार करना पड़ रहा है।

आष्टी गांव दो हिस्सों में बंटा है। माडू नदी के एक ओर पुरानी बस्ती है। वहीं नदी के दूसरी ओर नई बस्ती है। नई बस्ती में ही हिड़ली रोड पर मिडिल स्कूल हैं। बाजार सहित अन्य सुविधाएं भी वहीं हैं। ऐसे में पुरानी बस्ती के लोगों को अपनी सभी जरुरतों के लिए नई बस्ती ही जाना होता है। आवाजाही के लिए माडू नदी पर रपटा बना था। तेज बारिश होने पर ही इसके ऊपर पानी आता था। अन्य समय इससे आवाजाही आसानी से होती रहती थी।

पिछले दिनों हुई भारी बारिश से यह रपटा बह गया है। इसके बाद से आवाजाही के लिए कोई अन्य साधन यहां नहीं है। ऐसे में लोगों को तेज बहाव और पत्थरों की भरमार वाली यह नदी वैसे ही पार करके आवाजाही करना पड़ रहा है। पहाड़ी नदी होने के कारण जरा सी बारिश होते ही इस नदी में अचानक बाढ़ आ जाती है। ऐसे में इस पर हमेशा खतरा बना हुआ है।

ग्रामीण सतीश लहरपुरे बताते हैं कि रपटे का कोई सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में ग्रामीण तो जैसे-तैसे खतरा उठा कर काम चला रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी बच्चों को हो रही है। नई बस्ती के मिडिल स्कूल में पुरानी बस्ती से 100 से 150 बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। इन बच्चों को भी जाहिर है कि यह नदी पार करके ही आना-जाना पड़ता है। देखें वीडियो…

छोटे-छोटे बच्चे नदी पार करते समय कभी भी किसी हादसे का शिकार हो सकते हैं। नदी में अचानक बाढ़ आ जाती है। बारिश नहीं होने पर भी नदी का बहाव काफी तेज रहता है। ऐसे में पत्थरों और तेज बहाव के बीच नदी पार करते हुए बच्चों के साथ कोई घटना भी घट सकती है। यही कारण है कि बच्चों के स्कूल के लिए निकलने के बाद से उनके वापस लौटते तक पालक चिंतित रहते हैं। ग्रामीणों ने रपटे का जल्द सुधार किए जाने की मांग की है।

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