IAS Success Story : माता-पिता करते थे मजदूरी, दोस्तों ने चंदा करके भेजा था इंटरव्यू के लिए, आईएएस बनकर कर दिया नाम रोशन

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IAS Success Story: आईएएस बनना निश्चित तौर पर एक बेहद कठिन काम है, लेकिन असंभव नहीं। इस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले लंबे समय तक तैयारी करने के बाद कहीं कामयाब हो पाते हैं। यूपीएससी (UPSC) क्रैक करने के लिए हौसलों के साथ ही आर्थिक स्थिति भी थोड़ी मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि इसकी तैयारी के लिए संसाधन भी जरूरी होते हैं।

इन सबके बावजूद कई ऐसे युवाओं ने भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी। आज हम ऐसी ही एक प्रतिभा की चर्चा करेंगे। शायद आपको यकीन ना हो कि इनके माता-पिता मजदूरी करते थे। यही नहीं, जब इंटरव्यू देने दिल्ली जाना था तो दोस्तों ने उन्हें चंदा करके भिजवाया था। इन सबके बावजूद आत्मविश्वास और बुलंद हौसले के सहारे उन्होंने आईएएस बनकर सबका नाम रोशन कर दिया।

यह असाधारण प्रतिभा की धनी हैं केरल के वायनाड जिले में रहने वाली श्रीधन्या सुरेश (IAS Sreedhanya Suresh)। श्रीधन्या साल 2018 में यूपीएससी (UPSC) एग्जाम पास कर आईएएस अफसर बनी थीं। आईएएस (IAS) अफसर बनने वाली वे केरल की पहली आदिवासी लड़की हैं। हालांकि इस कामयाबी का रास्ता काफी चुनौती भरा था।

दिहाड़ी मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया

श्रीधन्या के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इनके पिता दिहाड़ी मजदूर करने के साथ ही गांव के बाजार में धनुष-तीर बेचते थे। मां भी मनरेगा के तहत मजदूरी करती थीं। दोनों के कमाने के बाद भी घर में आर्थिक समस्या बनी रहती थी। इनका घर भी बहुत मुश्किल से चलता था, लेकिन पति-पत्नी ने कभी बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया।

उन्होंने लड़के और लड़की में भी कोई फर्क नहीं किया। उन्होंने बेटी की पढ़ाई पर भी उतना ही ध्यान दिया जितना बेटे पर। घर के अभाव को देखते हुए गांव पोजुथाना की कुरिचिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाली श्रीधन्या सुरेश ने कुछ बड़ा करने की ठानी और मन लगाकर पढ़ाई करने लगीं।

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सरकारी स्कूल से ही की पढ़ाई

श्रीधन्या ने अपने करियर में कितनी मेहनत की है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि उन्होंने स्कूल लेवल की पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज से जूलॉजी में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोझीकोड का रुख किया। यहां कालीकट यूनिवर्सिटी से पीजी करने के बाद सरकारी नौकरी की तलाश में जुट गईं। कुछ समय बाद उनका सेलेक्शन केरल में अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के रूप में हुआ।

जॉब लगने के बाद यूपीएससी की तैयारी

जॉब लगने के बाद श्रीधन्या सुरेश अपने पहले लक्ष्य की तरफ बढ़ने लगीं। उन्होंने कॉलेज के दिनों में देखे सिविल सर्विस एग्जाम पास करने के सपने को सच करने की शुरूआत की जॉब के साथ ही वे यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में लग गईं। तिरुवनंतपुरम में अनुसूचित जनजाति विभाग से आर्थिक मदद मिलने के बाद श्रीधन्या जी-जान से एग्जाम की तैयारियों में जुट गईं।

दो प्रयासों में नहीं हो सकीं सफल

श्रीधन्या सुरेश ने 2016 और 2017 में यूपीएससी एग्जाम दिया, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद उन्होंने 2018 में फिर परीक्षा दी और इस बार उन्होंने 410वीं रैंक हासिल कर पूरे समाज का सिर ऊंचा कर दिया। श्रीधन्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब पता चला कि यूपीएससी की लिखित परीक्षा में वह पास हो गईं हैं तो यह खबर सुनकर उनके घर में हर कोई उत्साहित हुआ, लेकिन कुछ दिन बाद ही सबके चेहरे उतर गए।

दोस्तों ने जमा किया चंदा

दरअसल, अब इंटरव्यू देने के लिए दिल्ली जाना था और दिल्ली जाने के लिए किराये के पैसे नहीं थे। इस बात की जानकारी जब श्रीधन्या के दोस्तों को मिली तो उन्होंने मिलकर 40 हजार रुपये का चंदा इकट्ठा किया और उन्हें दिल्ली भेजा। इसके बाद श्रीधन्या का रिजल्ट आया, जिसमें वह पास हो गईं। वे न केवल दोस्तों की उम्मीदों पर खरी उतरी, बल्कि परिवार को भी गौरवान्वित कर दिया।

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