Jarjar school : स्कूल भवन की छत का झड़ रहा प्लास्टर, दहशत में रहते बच्चे और शिक्षक, दस साल से झेल रहे परेशानी

Plaster falling on the roof of the school building, children and teachers living in panic, facing trouble for ten years

• उत्तम मालवीय, बैतूल
स्कूल भवनों की मरम्मत के नाम पर हर साल शासन से लाखों रुपए की राशि आती है। यह राशि बकायदा खर्च होना भी बताया जाता है। लेकिन, स्कूल भवनों की हालत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। उनकी हालत बद से बदतर होती जा रही है। कुछ इसी तरह की हालत खेड़ीकोर्ट स्थित हायर सेकेण्डरी स्कूल की भी है। यही कारण है कि स्कूल के बच्चे और शिक्षक दहशत में रहते हैं। उन्हें डर बना रहता है कि पता नहीं कब क्या हादसा हो जाए।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस स्कूल में वर्तमान में 170 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां वर्ष 1988 में शाला भवन का निर्माण हुआ था। कुछ साल तक तो स्थिति ठीक रही। लेकिन, वर्ष 2012 से इस स्कूल की बदहाली शुरू हो गई थी। आज स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश में छत से पानी टपकता है।

ऐसे में बच्चों को बैठने के लिए ऐसी जगह तलाश करना होता है, जहां पानी न टपके। यही नहीं जगह-जगह से छत का प्लास्टर भी झड़ रहा है। ऐसे में कभी कोई हादसा भी हो सकता है। भवन इतना जर्जर हो गया है कि उसे देखकर लगता है कि पता नहीं यह कब जमींदोज हो जाए। बताया जाता है कि भवन की हालत को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है।

इसके बावजूद कभी छत या भवन की मरम्मत नहीं की जाती। यही कारण है कि भवन की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही है। यही नहीं स्कूल जाने वाला मार्ग भी बदहाल है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने जल्द शाला भवन की मरम्मत किए जाने की मांग की है।

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