IAS success story : दसवीं में 44.7 %, पीएससी प्रीलिम्स में 10 बार से ज्यादा फेल, इसके बाद भी बन गए आईएएस, गजब की है स्टोरी

• उत्तम मालवीय, बैतूल

कक्षा 10वीं में 44.7%, 12वीं में 65%, ग्रैजूएशन में 60% अंक… इसके बाद CDS फेल, CPF फेल… यही नहीं राज्य लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में भी 10 से अधिक बार फेल…! जाहिर है इतना पढ़कर आप बड़े आराम से अंदाजा लगा चुके होंगे कि मैं आपको किसी निहायत ही असफल व्यक्ति के बारे में बताने वाला हूं…, लेकिन ऐसा नहीं है। इसके बाद के रिजल्ट आपको हैरत में डाल देंगे। शायद आप यकीन ना करें… तो खुद देख लीजिए… UPSC सिविल सेवा परीक्षा : प्रथम प्रयास में साक्षात्कार और दूसरे प्रयास में आल इंडिया रैंक (AIR) 77…!

अब शायद आप चौक गए होंगे। या फिर सोच रहे होंगे कि मैं किन्हीं दो अलग-अलग लोगों की असफलता और सफलता के बारे में आपको बता रहा हूं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। यह दोनों फैक्ट्स एक ही शख्स के बारे में हैं। वे शख्स हैं 2009 के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी अवनीश शरण (IAS Awanish Sharan)।

अपनी शैक्षणिक और कैरियर की यात्रा के बारे में उन्होंने खुद ही ट्वीट करके यह जानकारी दी है। महज एक दिन पहले किए गए उनके इस ट्वीट को अभी तक 9545 बार रिट्विट किया जा चुका है वहीं 75 हजार से अधिक लोग लाइक कर चुके हैं। अन्य यूजर्स भी उनके इस ट्वीट पर अपने अनुभव और सफलता-असफलता की कहानियां साझा कर रहे हैं। वहीं अधिकांश लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

आईएएस अवनीश शरण वैसे तो ट्विटर पर काफी एक्टिव रहते हैं। वे अक्सर दिलचस्प और रोचक ट्वीट करते रहते हैं। लेकिन, इस बार उन्होंने जो ट्वीट किया है वो युवाओं के लिए खासा प्रेरणादायक साबित होगा। खासकर उन युवाओं के लिए जो कैरियर की राह में कुछ प्रयासों के बाद ही गहन निराशा में चले जाते हैं और अवसाद से भर जाते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने अपनी कक्षा 10 वीं की मार्कशीट भी शेयर की थी, जिसे वे थर्ड डिवीजन में पास कर पाए थे।

 

अपने इस ताजा ट्वीट के जरिए श्री शरण ने युवाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। उन्होंने यही बताया है कि यदि हिम्मत और हौसला खो दिया जाएं तो फिर कुछ भी हासिल करना संभव नहीं है। वैसे तो दो-तीन असफलताएं ही किसी के भी हौसले पस्त करने के लिए पर्याप्त होती हैं। लेकिन, यदि हौसले बुलंद हो तो थोक में असफलताएं मिलने के बाद भी सफलता पाना संभव है। वे खुद इसके उदाहरण हैं।

उनके जितने अंक दसवीं से लेकर कॉलेज तक आए, वे बेहद औसत माने जाते हैं। ऐसे छात्र के बारे में सोचा भी नहीं जाता कि वह पीएससी या यूपीएससी में प्रारंभिक परीक्षा भी क्लियर कर पाएगा। इसके बाद यदि पीएससी में दो-तीन बार भी कोई असफल हो जाए तो शर्तिया उस पर ठप्पा लगना तय है कि वह कोई प्रतियोगी परीक्षा तो पास नहीं कर सकता।

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संभव है कि श्री शरण के साथ भी यही स्थिति बनी हो। लेकिन, उन्होंने अपने बुलंद हौसलों और दृढ़ संकल्प से ना केवल अकल्पनीय सफलता हासिल की, बल्कि सारी मान्यताओं और पूर्वाग्रहों को भी झुठला दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि जो हौसला हारा नहीं वही सिकंदर होता है।

बहरहाल, आईएएस अवनीश शरण के इस ट्वीट से युवा काफी प्रभावित हो रहे हैं। कुछ असफलताओं के बाद जो युवा यह सोच रहे थे कि शायद सफलता उनकी किस्मत में ही नहीं है, उन्हें भी इससे बड़ी प्रेरणा मिली है। वे भी अब दोगुने उत्साह से तैयारी में जुट गए हैं।

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