Kitna huaa matdan : संयुक्त कलेक्टर की समझाइश के बाद पोहर के ग्रामीणों  ने डाले वोट, जिले में 79.62 प्रतिशत मतदान 

◼️ विजय सावरकर, मुलताई 

शुक्रवार को बैतूल जिले के 3 जनपद पंचायतों में मतदान हुआ। इसके साथ ही जिले में त्रि स्तरीय पंचायती चुनाव संपन्न हो गए हैं। तीसरे चरण में जिले में 79.62 प्रतिशत मतदान हुआ है। प्रभातपट्टन ब्लॉक की ग्राम सहनगांव के आश्रित गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। हालांकि संयुक्त कलेक्टर की समझाइश के बाद वे मतदान करने को राजी हुए। चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के चलते कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति नहीं बनी।

पंचायत चुनाव के तृतीय और आखरी चरण में आज भैंसदेही, भीमपुर और प्रभातपट्टन जनपद पंचायत में चुनाव हुए। पंच, सरपंच, जनपद सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के लिए मतदान कराया गया। तीनों जनपद पंचायतों में 568 केंद्रों पर चुनाव हुए। दोपहर 3 बजे के बाद कुछ मतदाता शेष रहने पर 140 केंद्रों पर 9261 पर्ची वितरित की गई हैं।

जिला जनसंपर्क कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार भैंसदेही में 77.41 प्रतिशत, भीमपुर में 81.56 प्रतिशत और प्रभात पट्टन में 79.69 प्रतिशत मतदान हुआ है। इस तरह तीनों जनपदों में 79.62 प्रतिशत मतदान हुआ। इधर शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए निगरानी करने पुलिस विभाग ने ड्रोन का भी सहारा लिया। कई मतदान केंद्रों की ड्रोन के जरिए निगरानी कराई गई।

उधर प्रभातपट्टन ब्लॉक की ग्राम पंचायत सहनगांव के आश्रित ग्राम पोहर के निवासियों ने चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। वे मुख्य सड़क से ग्राम के आवासीय क्षेत्र तक पहुंच मार्ग नहीं बनने से नाराज चल रहे हैं। जिसके चलते दोपहर तक ग्रामीण मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचे। इस स्थिति में एसडीएम राजनंदिनी शर्मा और एसडीओपी नम्रता सोंधिया ग्राम पोहर पहुंचे।

ग्रामवासियों ने बताई अपनी समस्या 

उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा की। ग्रामीणों  का कहना था कि ग्राम के आवासीय क्षेत्र तक पहुंच मार्ग निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीण मुन्ना चौरे, रूपलाल झपाटे, खुशरंग झपाटे,  सुरेश सूर्यवंशी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया पूर्व में एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर मांगों से अवगत कराया गया था। इसके बाद भी ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

जान हथेली पर रख करते हैं नदी पार 

ग्रामीणों का कहना था कि मुख्य मार्ग से गांव की दूरी 3 किमी है। मार्ग कच्चा होने से आवाजाही में दिक्कत होती है। बारिश में मार्ग पर कीचड़ हो जाता है। मार्ग में स्थित अंभोरा नदी पर पुलिया नहीं होने से जान हथेली पर रखकर नदी पार करना पड़ता है। बारिश के दौरान स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी होती है।

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सड़क के अलावा यह मांगें भी शामिल 

ग्रामीण मुख्य मार्ग से गांव तक डामरीकृत सड़क बनाने, ग्राम पोहर को सहनगांव पंचायत से हटाकर हिवरखेड़ पंचायत में जोड़ने, अंभोरा नदी पर पुल निर्माण करने की मांग सतत रूप से कर रहे हैं। लेकिन, ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। मजबूर होकर चुनाव में मतदान नहीं करने का निर्णय लिया है।

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वरिष्ठ अधिकारी के आश्वासन पर अड़े

एसडीएम राजनंदनी शर्मा ने ग्रामीणों से कहा कि मतदान का बहिष्कार करने से समस्या का हल नहीं होगा। आप लोगों की समस्या जायज है। बारिश के बाद सड़क का निर्माण कार्य किया जाएगा। लेकिन, ग्रामीण जिले के  वरिष्ठ अधिकारी के आश्वासन मिलने पर ही मतदान करने की बात पर अड़े रहे। इस स्थिति में एसडीएम ने कलेक्टर को अवगत कराया।

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संयुक्त कलेक्टर मंडराह पहुंचे पोहर 

उसके बाद संयुक्त कलेक्टर श्री मंडराह ग्राम पोहर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा करने के बाद सड़क की समस्या के निदान का ठोस आश्वासन दिया। उनके आश्वासन के बाद दोपहर 2.15 बजे से ग्रामीणों ने मतदान प्रारंभ किया।  रिटर्निंग अधिकारी वीरेंद्र उइके ने बताया ग्राम पोहर में 72 प्रतिशत मतदान हुआ है।

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