Sainiko ko rakhi : जहां सैनिक की आत्मा करती है सरहद की हिफाजत, वहां तैनात जवानों की कलाई पर बंधेगी बैतूल की राखी

• उत्तम मालवीय, बैतूल
बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति हर साल देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर रक्षाबंधन का पर्व मनाती है। समिति इस वर्ष 23वें वर्ष में पूर्वोत्तर प्रांत सिक्किम में रक्षाबंधन का पर्व मनाएगी। राष्ट्र रक्षा मिशन-2022 में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं आंध्रप्रदेश से 30 सदस्यीय दल शामिल होगा। सिक्किम की राजधानी गंगटोक से करीब 11 किमी दूर स्थित लिंगडम में आईटीबीपी के जवानों के साथ 11 एवं 12 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाने को लेकर पूरी टीम उत्साहित है। टीम द्वारा क्षेत्रीय मुख्यालय एवं सीमा चौकियों पर पहुंचकर आईटीबीपी के जवानों के साथ रक्षापर्व मनाया जाएगा।

एक संकल्प पूरा करने एकजुट हो जाता है बैतूल

कारगिल युद्ध के बाद सैनिकों की हौसलाअफजाई के लिए जिले की महिला पत्रकार एवं बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की अध्यक्ष गौरी पदम द्वारा यह संकल्प लिया गया था। यह संकल्प इतने पड़ाव पार करेगा यह कल्पना शायद उन्होंने भी नहीं की थी। इस एक संकल्प से पिछले 22 वर्षों में पूरा राष्ट्र जुड़ चुका है। श्रीमती पदम ने बताया कि देश के लगभग हर भाग में बैतूल की राखियां पहुंचती है। किसी न किसी सरहद पर यहां की बेटियां स्वयं रक्षासूत्र बांधने पहुंचती है। पूरा देश जब कोरोना की विकरालता से जूझ रहा था तब भी राष्ट्र रक्षा मिशन ने पूरी सुरक्षा के साथ लेह लद्दाख में दुर्गम स्थलों पर तैनात जवानों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया।

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यहां सैनिक की आत्मा करती है देश की रक्षा

इस वर्ष भी राष्ट्र रक्षा मिशन दुर्गम क्षेत्र में पहुंचेगा। इस बार मिशन खास इसलिए भी है कि दल बाबा हरभजन में मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। बाबा हरभजन सिंह दुश्मनों से लड़ते-लड़ते शहीद हुए थे, लेकिन आज भी उनकी आत्मा देश की सुरक्षा करती है। इस रहस्य और रोमांच से भरे सरहदी क्षेत्र में पहुंचने के लिए लंबे समय से बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति प्रयास कर रही थी। इसके अलावा लिंगदम में विश्व प्रसिद्ध बौद्ध मठ भी है जिसे रंका कहते हैं। यह मोनेस्ट्री तिब्बती वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है और पूजनीय स्थल है।

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