Rail Coach Factory : आमला में रेल कोच कारखाना के लिए जल्द होगा सर्वे, उजाड़ हो चुके शहर में रंगत लौटने की जगी उम्मीद

आमला लोको शेड, जहां कभी 24 घंटे चहल पहल रहती थी। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से अब वो उजाड़ हो चुका है।

• अंकित सूर्यवंशी, आमला
Rail Coach Factory : बैतूल जिले के आमला नगर में फिर रंगत लौटने की उम्मीद एक खबर ने जगाई है। यह खबर है कि आमला में रेलवे की खाली पड़ी जमीन पर रेल कोच कारखाना खोले जाने के लिए सर्वे करने के आदेश आ गए हैं। यदि यह कोई चुनावी पैतरा नहीं है और वास्तव में इसे मूर्तरूप दिया जाता है तो उजाड़ हो चुके आमला शहर में फिर बहार लौट सकती है।

रेलवे की खाली जमीन पर रेल कोच कारखाना खोलने की मांग वर्षों से शहर के समाजसेवी संगठन व गणमान्य नागरिक कर रहे थे। जिसको लेकर यह राहत भरी खबर मिली है। रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रेल कोच कारखाना हेतु रेलवे की रिक्त भूमि का सर्वे करने के लिए पीएमओ द्वारा रेलवे बोर्ड को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिसके बाद रेलवे बोर्ड द्वारा महाप्रबंधक मध्य रेल को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद मुख्यालय से नागपुर मंडल को शीघ्र सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है।

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इस बात की किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन, नाम जाहिर न करने की शर्त पर कुछ स्थानीय अधिकारी भी यह बात स्वीकार कर रहे हैं। वे यह स्वीकार भी कर रहे हैं कि इस संबंध में पत्र भी आया है। इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि सर्वे के लिए टीम मंडल स्तर से ही आएगी।

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गौरतलब है कि आमला में रेलवे के पास लगभग 350 एकड़ खाली जमीन है। जिसका फिलहाल कोई उपयोग नहीं है। शहर के संगठनों द्वारा इस जमीन पर कारखाना खोलने की मांग वर्षों से की जा रही है। अब संगठनों के प्रयासों को सफलता मिलते दिखाई पड़ रही है। हालांकि यदि सर्वे के आदेश वास्तव में आ भी गए हैं तो इस पूरे प्रोजेक्ट को मूर्त रूप लेने में अभी कई साल लग जाएंगे।

अब नाम का ही जंक्शन रह गया आमला रेलवे स्टेशन।

बेस किचन और लोको शेड थे कभी शान

आमला का नाम पहले पूरे देश में मशहूर था। यहां रेलवे जंक्शन के साथ ही 3 दशक पहले तक बेस किचन भी था। यही कारण है कि यहां से गुजरने वाली हर ट्रेन यहां रूकती थी। यही नहीं यहां लोको शेड भी था। इसमें हजारों कर्मचारी कार्य करते थे। लोको शेड में 24 घंटे चहल पहल होती थी। वर्ष 1993-94 में बेस किचन और लोको शेड बंद होने के बाद से ही आमला शहर का उजाड़ होना शुरू हो गया था। कर्मचारी जहां स्थानांतरित हो गए वहीं अन्य लोगों ने भी पलायन कर लिया। इसके साथ ही रेलवे कॉलोनी के साथ ही पूरा शहर ही उजाड़ सा हो गया। आमला रेलवे स्टेशन भी बस नाम का ही रह गया। यदि वास्तव में कारखाना खुलता है तो यह रंगत एक बार फिर वापस लौट सकती है।

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कारखाना खुलने से यह होगा फायदा

आमला शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के युवा बेरोजगार अन्य शहर या राज्य में रोजगार की तलाश कर रहे हैं। रेल कोच कारखाना खुल जाए तो युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो जाएंगे। वहीं बेरोजगार युवाओं को रोजगार के लिए अन्य शहर या राज्य में भटकना नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों की संख्या बढ़ने पर स्थानीय व्यापार भी बढ़ेगा। युवा पंकज पाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के कई युवा रोजगार की तलाश में शहर-शहर भटक रहे हैं। देश मे बेरोजगारी बढ़ रही है। ऐसे में यदि रेल कोच कारखाना खुल जाता है तो युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होने लगेंगे।

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इनका कहना : सर्वे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा

रेलवे कोच कारखाना खोलने के लिए सर्वे होने की बात को लेकर जब कुछ रेलवे के कर्मचारियों और नेताओं से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि पहले ही सारी कार्यवाही हो चुकी थी। बावजूद इसके रेल कोच कारखाना लातूर भिजवा दिया गया था। जबकि लातूर में न ही उतनी भूमि है और न ही सुविधाएं हैं। आमला में भूमि से लेकर पानी तक सारी सुविधाएं होने के बाद भी कारखाना लातूर भिजवाया गया। वर्तमान में जो सर्वे की बात चल रही है, वह सिर्फ आगामी विधानसभा चुनाव में चुनावी मुद्दा बनेगी। चुनाव तक सिर्फ सर्वे ही चलेगा और चुनाव के बाद फिर यह सब फाइलों में दब कर खत्म हो जाएगा यहां रेल कोच कारखाना खुलना ही होता तो अभी तक कार्य शुरू हो गया होता। लेकिन, राजनीति के चक्कर में यह नहीं हो सका है।

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