Ojha gets bail : सवा करोड़ के गबन मामले में क्रिकेटर नमन ओझा के पिता विनय कुमार ओझा को मिली जमानत, पुलिस ने किया था कोर्ट में पेश

Cricketer Naman Ojha's father Vinay Kumar Ojha got bail in the embezzlement case of Rs.1.25 crore, the police presented him in court

• उत्तम मालवीय, बैतूल
बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के ग्राम जौलखेड़ा में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में पदस्थ तत्कालीन सहायक प्रबंधक विनय कुमार ओझा को मुलताई कोर्ट से जमानत मिल गई है। सोमवार को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया था। पूछताछ के बाद आज न्यायालय में पेश किया गया। जहां से पहले जेल भिजे जाने के आदेश दिए गए। इसके बाद उनके अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन पर सुनवाई की गई। आवेदन को स्वीकार कर उन्हें जमानत दे दी गई है। उन पर सवा करोड़ के गबन मामले में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है। ओझा, भारतीय क्रिकेटर नमन ओझा के पिता हैं।

वर्ष 2014 में बैंक आफ महाराष्ट्र में सवा करोड़ के गबन के मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी विनय कुमार ओझा आठ साल से फरार थे। कल गिरफ्तार कर उन्हें रिमांड पर लिया गया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने मंगलवार को न्यायालय में पेश किया। देखें वीडियो… 👇

मुलताई एसडीओपी नम्रता सोंधिया ने बताया कि 2014 में गबन का मामला दर्ज हुआ था। जिसमें 10 आरोपी बनाए गए थे। इनमें से 6 आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे। दो आरोपियों को पृथक किया जा चुका था। वहीं एक आरोपी की मौत हो गई थी। केवल एक आरोपी विनय कुमार ओझा की गिरफ्तारी शेष थी। देखें वीडियो…

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पुलिस ने सोमवार को गबन के आरोप में सहायक प्रबंधक रहे विनय कुमार ओझा को गिरफ्तार किया है। विनय कुमार ओझा को सह आरोपी बनाया गया था। उस समय वे सहायक प्रबंधक थे। इनकी आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके राशि निकाली गई थी। जिससे इन्हें आपराधिक षड्यंत्र का आरोपी बनाया गया है।

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3 Comments
  1. Hiralal Dongare says

    बैंक आँफ maharastra branch जौलखेडा के सहायक प्रबंन्धक की आई. डी. और पास वर्ड का उपयोग कर गबन किसी अन्य कर्मचारी द्वारा किया गया था ये कहना कानुन से बचने के लिये ऐसा कहा गया है. के. सी. सी. की मंजुरी से लेकर भुगतान तक के.सी.सी. आवेदक को करीब करीब सभी कर्मचारी आवेदक को जानते है क्योकि के.सी.सी. की मंजुरी की प्रक्रिया एक दिन मे पुरी नही होती इस प्रक्रिया मे करीबन सप्ताह से ज्यादा समय लगता है कभी कभी आवेदक का काम महिने भर मे भी पुरा नही होता भुगतान के समय तीन कर्मचारियों की सहमति होती है एक कर्मचारी द्वारा गबन करना असंम्भव है. 2014 मे हुये गबन मे 2022 मे कार्यवाही हो रही है और कब तक चलेगी कहा नही जा सकता. जिनके नाम से के.सी.सी. का भुगतान हुआ है क्या पता ओ लोग अभी है या नही. हे भगवान आगे तुही मालिक है. जिन आवेदको के नाम पर गबन हुआ है उनके नाम जाहीर हो.

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