Plantation : सोनाघाटी की 200 फीट ऊंचाई पर स्थित बुद्धभूमि पर किया अजास संगठन ने पौधरोपण

• उत्तम मालवीय, बैतूल
पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में अजास संगठन द्वारा सोनाघाटी स्थित बुद्धभूमि पर पीपल के पौधे रोपित किये गए। इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने पेड़ पौधों का महत्व बताते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण करने की अपील की।

संगठन के पंकज डोंगरे द्वारा बताया गया कि हम सब पर पौधों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग और योगदान बना रहता है। हमने वर्तमान कोरोना काल में प्राणदायक वायु की महत्ता को समझा है। भगवान बुद्ध कई वर्ष पहले ही पर्यावरण संतुलन में पेड़ पौधों के योगदान को समझ चुके थे। तभी उन्होंने पर्यावरण संतुलन के लिए दुनिया के समस्त पदार्थों को जड़ एवं चेतन तत्वों में बांटा था।

जड़ में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व इनसे विकसित पदार्थों के गुणों का वर्णन मिलता है। चेतन पदार्थों में पेड़-पौधे, पशु-पक्षी व मनुष्य आते हैं। बौद्ध धर्म के ग्रंथ मिलिन्द-प्रश्न में इन पदार्थों व गुणों का वर्णन मिलता है। इसके पीछे यह समझाने की भावना थी कि प्रत्येक वस्तु में कोई न कोई गुण अवश्य होता है। इसलिए उनको संरक्षित रखना व उनका अनुशीलन आवश्यक है। ऐसा करने से ही मनुष्य पर्यावरण के विनाश से बच सकता है।

बुद्ध ने इतने साल पहले यह जान लिया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है और वे पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उन्होंने अपने सभी भिक्षुओं से कहा कि खाली समय में उन्हें पेड़-पौधों में पानी देना व उनके संरक्षण का कार्य करना चाहिए। बुद्ध ने जब डाकू अंगुलिमाल को भिक्षु बनाया था, उसे पहला काम पेड़-पौधों में पानी देने का सौंपा था।

अजास संगठन से महिला प्रभारी चन्द्रप्रभा चौकीकर, महिला महासचिव निर्मला गोहिया, वर्षा खातरकर, महासचिव रामदास (आर.डी) गुजरे, सरिता गुजरे, सचिव पंकज डोंगरे द्वारा बैतूल मुख्यालय सोनाघाटी स्थित बुद्ध भूमि पर पीपल के पौधे रोपित किये गए। श्रीमती गोहिया ने बताया कि पीपल के पौधे 24 घण्टे आक्सीजन देते हैं। श्री गुजरे द्वारा बताया गया कि पीपल के वृक्ष के नीचे ही बुद्ध ज्ञान प्राप्त कर तथागत भगवान बुद्ध बने थे। श्रीमती चौकीकर ने बुद्ध के सिद्धान्तों पर अमल कर युद्ध से दूर रहने की बात कही। वर्षा खातरकर ने बताया कि पौधे का मानव जीवन से सीधा सम्बन्ध है। इन संबंधों को सभी से निभाने की अपील के साथ पौधारोपण कार्य किया गया।

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समाजसेवी बुद्ध अनुयायी संदीप मानकर, बुद्ध अनुयायी रामदास पाटिल द्वारा बुद्धभूमि को 200 फीट की ऊँचाई पर व्यापकता देते हुए बुद्ध सिद्धान्तों की ऊँचाई तय करने के लिए अजास संगठन बैतूल द्वारा आभार व्यक्त किया गया। जिलेवासियों से अपील की गई की प्रकृति के करीब स्थित बुद्ध भूमि का भ्रमण कर भगवान बुद्ध के दर्शन अवश्य करें।

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