Corruption : भोपाल और ग्वालियर में पढ़ाई, बैतूल में लग रही हाजरी, वेतन भी मिल रहा लगातार, शिकायतों पर भी नहीं कार्यवाही, कुछ तो गड़बड़ है…

Studying in Bhopal and Gwalior, attendance in Betul, getting salary continuously, no action even on complaints, something is wrong...

  • उत्तम मालवीय, बैतूल
    बैतूल जिले में खेल एवं युवा कल्याण विभाग में पदस्थ दो कर्मचारी पिछले 3-4 सालों से भोपाल और ग्वालियर में पढ़ाई नियमित पढ़ाई कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी लगातार हाजरी बैतूल के उनके कार्यस्थल पर लग रही है। यही नहीं उन्हें बाकायदा वेतन भुगतान भी हो रहा है। इस संबंध में कई बार जिले से लेकर राज्य स्तर तक शिकायतें भी हो चुकी हैं। हर बार जांच और कार्यवाही की बात कही जाती है। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। इससे पूरे सिस्टम पर ही सवालिया निशान लग रहे हैं।

    इस संबंध में भूपेंद्र सिंह उईके, रमेश भाटिया, अनुराग सिटोके, आदित्य पवार, मोहसिन खान, आबिद खान ने एक बार फिर शिकायत की है। शिकायत के मुताबिक ग्रामीण युवा समन्वयक ललिता धुर्वे भीमपुर में पदस्थ है। वे सत्र 2018 से बीपीएड की नियमित शिक्षा बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से ग्रहण कर रही है। जिला खेल अधिकारी मनु धुर्वे ने संचालक खेल एवं युवा कल्याण विभाग भोपाल से पत्र क्रमांक 0/921/DSYW/2018 दिनाँक 18/07/2018 के जरिए ललिता धुर्वे के लिए खेल विभाग से बीपीएड में प्रवेश सम्बन्धी अनुमति मांगी थी।

    इस पर संचालक खेल एवं युवा कल्याण विभाग भोपाल ने पत्र क्रमांक 3699/ खे.यु.क/ स्था/2018 दिनांक 31/7/2018 के माध्यम से “कार्य नहीं वेतन नहीं” के आधार पर अनुमति दी थी। लेकिन जिला खेल अधिकारी मनु धुर्वे द्वारा ग्रामीण युवा समन्वयक ललिता धुर्वे को वर्ष 2018 से लगातर वेतन दिया जा रहा है। जबकि ललिता धुर्वे बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से नियमित बीपीएड का अध्ययन भोपाल में कर रही है। जिसका प्रवेश विश्वविद्यालय के बीपीएड पाठ्यक्रम में 22/06/2018 को ही हो गया था।

    शिकायत में वर्षवार, माहवार उपस्थिति रजिस्टर भी संलग्न किया गया है। ऐसे में जब ललिता नियमित रूप से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के बीएड पाठ्यक्रम में अध्ययन कर रही है तो फिर उनकी कार्य स्थल में उपस्थिति दिखाकर शासन के नियम विरुद्ध एवं गुमराह करके वेतन दिया जा रहा था। एक ओर ललिता धुर्वे द्वारा ग्रामीण युवा समन्वयक भीमपुर के रूप में कार्य कर मानदेय प्राप्त किया गया है। वहीं उसी अवधि में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से नियमित विद्यार्थी के रूप में बीपीएड करना बताया गया है। भीमपुर से भोपाल की दूरी लगभग 260 किलोमीटर है। ऐसी स्थिति में यह संभव नहीं है कि दोनों कार्य एक ही समय पर सम्भव हो।

    इसी प्रकार सत्र 2018-19 और सत्र 2019-20 में लाखों रुपये की खेल सामग्री भीमपुर-चिचोली विकासखंड में वितरण की गई है। इसे ललिता धुर्वे द्वारा वितरण रजिस्टर में दर्ज की गई है। सवाल यह है कि जब ललिता धुर्वे कार्य स्थल में उपस्थित थी ही नहीं थी तो खेल सामग्री का वितरण कैसे हो गया? ऐसे में खेल सामग्री वितरण की भी जांच जरूरी हो गई है। स्पष्ट है कि ललिता धुर्वे को फर्जी मानदेय भुगतान किया गया है।

    इसी प्रकार खेल एवं युवा कल्याण विभाग बैतूल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए ग्राउंडमैन रवि इवने का भी मामला है। रवि 1 अक्टूबर 2018 से 26 जून 2019 तक कुशवाह सिक्योरिटी फोर्स प्राइवेट लिमिटेड के अधीन मेजर ध्यानचंद हॉकी स्टेडियम बैतूल में ग्राउंडमैन के पद पर कार्यरत था। उसे जुलाई 2019 से जून 2020 तक लगातार मानदेह दिया गया। जबकि रवि ने सत्र 2019-20 में ही जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में बीपीएड कोर्स में प्रवेश ले लिया था।

    कुशवाहा सिक्योरिटी फोर्स भोपाल एवं जिला खेल अधिकारी मनु धुर्वे की मिलीभगत से रवि इवने के नाम पर भी वितरण रजिस्टर में खेल सामग्री प्राप्त करना दर्शाया गया है। जबकि यह निजी सुरक्षा एजेंसी का ग्राउंडमैन के पद पर कार्यरत कर्मचारी है। रवि इवने को ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर में कबड्डी कोच के रूप में भी दर्शाया गया है। शिकायत में जिला खेल अधिकारी मनु धुर्वे, ग्रामीण युवा समन्वयक ललिता धुर्वे एवं आउटसोर्स ग्राउंडमैन कर्मचारी रवि इवने के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की गई है।

    ऐसा नहीं है कि यह शिकायत पहली बार हुई है। इस मामले में पहले भी कई बार शिकायत राज्य स्तर तक हो चुकी है। लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। पूर्व में शिकायत पर भोपाल से जांच समिति बनी थी। लेकिन आज तक बैतूल नहीं पहुंची है। एसडीओपी ने दो बार बयान दर्ज किए हैं लेकिन बात उससे आगे ही नहीं बढ़ी। इसे देखते हुए अब फिर से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई है। इस पूरे मामले से यह तो साफ हो जाता है कि नियम कायदे केवल दिखावे के लिए होते हैं। यदि सिस्टम ही भ्रष्ट हो तो फर्जीवाड़े के तमाम दस्तावेजी प्रमाण सामने होने के बावजूद दोषियों का कुछ नहीं बिगड़ता।

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