turtle hunting : विलुप्त प्रजाति के कछुए का बेच रहे थे मांस, सूचना पर फॉरेस्ट की टीम ने दबोचा; कछुआ मुहैया कराने वाला भी गिरफ्तार

Forrest's team caught on information, the meat of an extinct species of turtle was being sold; Turtle provider also arrested

  • उत्तम मालवीय, बैतूल
    बैतूल जिले के उत्तर वन मंडल क्षेत्र में आने वाले ग्राम शिव सागर में विलुप्त प्रजाति के कछुए (extinct species of turtle) का मांस बेचने वाले तीन आरोपियों को वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार किया है। पहले दो आरोपियों को पकड़ा गया। यह आरोपी रायसेन जिले के सुल्तानपुर से कछुआ लाए थे। जिस पर वन विभाग की टीम ने सुल्तानपुर पहुंचकर कछुए को बेचने वाले को भी गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर मृत कछुए का शेल भी जहां छिपाया गया था, वहां से जब्त कर लिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार डीएफओ (उत्तर) बैतूल राकेश कुमार डामोर को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम शिवसागर तहसील घोडाडोंगरी निवासी संजित राय द्वारा कछुए का मांस बेचा जा रहा है। सूचना के आधार पर डीएफओ द्वारा एसडीओ सारनी के मार्गदर्शन में दल का गठन किया गया। इस दल को प्रकरण की जांच करने हेतु भेजा गया।

    गठित टीम के दल प्रभारी रेंजर सारनी अमित साहू एवं स्टाफ द्वारा ग्राम शिवसागर में संजित राय एवं विष्णुपुर निवासी विजय घोष के घर जाकर उन्हें पूछताछ हेतु वन विश्राम गृह घोड़ाडोंगरी लाया गया। दोनों व्यक्तियों द्वारा अपना अपराध स्वीकार किया गया। उन्होंने बताया कि वह पिछले माह 18 मार्च को भी एक कछुए को लाकर उसका मांस बेच चुके हैं।

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    उनकी निशानदेही पर मृत कछुए का शेल भी जब्त कर लिया गया है। पूछताछ में दोनों अपराधियों द्वारा बताया गया कि वह उस कछुए को सुल्तानपुर जिला रायसेन निवासी गणेश मांझी के खेत से लेकर आये थे। गणेश मांझी के मोबाईल की लोकशन के आधार पर गठित दल सुल्तानपुर जिला रायसेन गया एवं वहां से गणेश मांझी को पूछताछ हेतु रेंज कार्यालय सारनी लाए।

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    पूछताछ में गणेश मांझी ने भी अपराध स्वीकार कर लिया गया है। तीनों के विरूद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 02 की उपधारा (1) (5) (16) (20) (37) धारा 09, 40, 48, 51 के तहत वन अपराध कायम किया गया है। मृत कछुए के शेल को स्थानीय भाषा में पातल कहते हैं। उक्त कछुआ संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत शेडयूल 1 प्रजाति में आता है जिसको पकड़ने एवं मारने का अपराध गैर जमानती अपराध की श्रेणी में आता है। जिसमें सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

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    आरोपियों के मोबाईल से ली गई जानकारी के आधार पर आरोपियों द्वारा मांस किन-किन लोगों को बेचा गया उसकी जानकारी निकाली जा रही है। उक्त कार्यवाही में नितेश शर्मा (प्रशिक्षु) वनक्षेत्रपाल परिक्षेत्र सहायक सारनी, हवसुलाल उड़के वनपाल, वनरक्षक प्रेमावती, ललिता धुर्वे, देवेन्द्र प्रकाश मालवीय, रवि पवांर, किशोरी वरकडे वनरक्षक शामिल रहे। 

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