self-sufficient rural : शादी-ब्याह में होती थी पानी की किल्लत, अपनी जमा पूंजी खर्च कर ग्रामीण खरीद लाए टैंकर, आत्मनिर्भरता की बने मिसाल

There was scarcity of water in marriages, after spending their deposits, villagers bought tankers, became an example of self-reliance

• श्याम आर्य, रंभा (भीमपुर)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ‘आत्मनिर्भर भारत’ (self reliant india) बनाना चाहते हैं। उनके इस आह्वान का और कहीं पता नहीं कितना असर हुआ है, लेकिन बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड में पूरा-पूरा असर नजर आ रहा है। इस आदिवासी बहुल ब्लॉक की ग्राम पंचायत उती के गोरखी ढाना के ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता, एकजुटता और जागरूकता की एक अनूठी मिसाल कायम की है।

इस छोटे से गांव गोरखी ढाना में शादी-ब्याह सहित अन्य आयोजनों में पानी की व्यवस्था करने में बड़ी परेशानी होती थी। इसका हल उन्होंने खुद निकाल लिया। इसके लिए ग्रामीणों ने अपनी जमा पूंजी को एकत्रित कर समस्या को दूर करने के लिए 5000 लीटर का टैंकर ही खरीद लिया है। अब वे इस बात से बेफिक्र हो गए है कि कोई कार्यक्रम होने पर पानी की व्यवस्था कैसे करेंगे। देखें वीडियो…👇

ग्रामीण सुभाष धुर्वे द्वारा बताया गया है कि हमारे गोरखी ढाना गांव में पानी की बहुत समस्या है। कई बहनों की शादी है, दूरदराज से बारात गांव में आती है। हम लोग उन्हें पानी तक नहीं पिला पाते हैं। इन सभी परेशानियों को देखते हुए ग्राम के सभी लोगों ने अपनी जमा पूंजी एकत्रित कर चंदा जमा किया और एक समिति बनाकर टैंकर लाने का फैसला किया। आज टैंकर गांव में ले आया है। अब हम पानी के लिए किसी के मोहताज नहीं रहेंगे। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत हमें किसी प्रकार से कोई मदद नहीं करती है। अब जिस घर में कार्यक्रम होगा, शादी होगी सभी ग्रामीण पानी की व्यवस्था बनाएंगे।

इसे विडंबना ही कहेंगे कि देश को आजाद हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी कई गांव ऐसे हैं, जो बुनियादी सुविधाओं की बांट जोह रहे हैं। गोरखी ढाना गांव भी उन्हीं में शुमार है। यहां एकजुटता दिखाकर ग्रामीणों ने एक समस्या का हल तो निकाल लिया। इसके बावजूद, यहां अभी भी कई समस्याएं मौजूद हैं। ग्रामीणों को अभी तक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। बरसात में मुख्य मार्ग से गांव तक कीचड़ भरी पगडंडी से चल कर आना मजबूरी है।

चारों ओर नदी से घिरा है गोरखी ढाना

गांव को बसे करीब 100 साल हो चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने बताया कि तमाम पार्टियों के जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत करा दिया गया है। खूब आश्वासन भी मिले, अधिकारियों ने गांव में आ कर निरीक्षण भी कर लिया, लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन पाई है। गांव चारों ओर नदी से घिरा है। ऐसे में बरसात के दिनों में ग्रामीणों को बैतूल, भीमपुर, झल्लार में पुलिस व चिकित्सा सुविधा से संपर्क नहीं हो पाता है। आजाद होने के बाद भी गुलामी जैसा जीवन व्यतीत करना ग्रामीणों की नियती बन गई है।

इन्हीं सबको देखकर ग्रामीण सुभाष धुर्वे कहते हैं कि आजादी के क्या मायने होते हैं, पता नहीं। सुविधाओं के अभाव में कई परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। सड़क के अभाव में यातायात सुविधा नहीं है। ऐसे में शाम ढलने से पहले गांव पहुंचना मजबूरी होती है।

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