human and wildlife : मां से बिछड़ा हिरण का शावक बना वन विभाग का मेहमान, वनकर्मी कर रहे बच्चे की तरह देखभाल

The cub of the deer separated from the mother became a guest of the forest department, caring like a child by a forest worker


▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल
बैतूल जिले के भैंसदेही में हिरण का एक शावक महीने भर पहले अपनी मां से बिछड़ गया था। इसकी जानकारी मिली तो उस बच्चे को वन विभाग ने ही अपना मेहमान बना लिया। वन कर्मचारी पूरी गंभीरता के साथ अपने बच्चों की तरह इस शावक का पालन-पोषण कर रहे हैं। बच्चे को बाकायदा बोतल से दूध पिलाया जाता है। वन्य प्राणी और इंसान के बीच अनूठा भावनात्मक लगाव यहां देखा जा रहा है।

भैंसदेही के वन विभाग कार्यालय में पिछले एक महीने से इस शाव की देखरेख एक बच्चे की तरह की जा रही है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस काले हिरण के बच्चे को एक माह से इसकी देखरेख में जुटे हैं। इस शावक को किसी प्रकार की कठिनाई या तकलीफ ना हो, इसलिए वन विभाग के एक कर्मचारी गुलाब इंगले निरंतर इसकी परवरिश में तैनात है।

काले हिरण के इस बच्चे को वन विभाग के द्वारा सुबह एवं शाम एक-एक लीटर दूध पीने के लिए दिया जाता है। साथ ही उसे जंगल में मिलने वाले चारे को भी देने का कार्य वन विभाग कर रहा है। ताकि बच्चे को प्राकृतिक वातावरण व खान पान भी मिलता रहे।

बताया जाता है कि काले हिरण का यह बच्चा पलसाय के जंगल में बकरियों के झुंड में आ गया था। जिसकी सूचना बकरी चराने वाले किसान ने वन विभाग के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने इस काले हिरण के बच्चे को सुरक्षित किसान के पास से लाकर उसका पहले इलाज कराया।

इलाज के दौरान उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ने का फैसला भी लिया गया, लेकिन जंगल में काले हिरण का झुंड नहीं मिलने के कारण उस काले हिरण के बच्चे को वन विभाग आखिर कार्यालय में ही सुरक्षित रखकर पालने का कार्य कर रहा है।

आला अधिकारियों को सूचना देने के बाद अब इस काले हिरण के बच्चे को भोपाल के वन विहार में छोड़ने को लेकर कार्रवाई की जा रही है ताकि काले हिरण के बच्चे को जंगलों में जिस तरह से वातावरण मिलता है, वैसा ही वातावरण वन विहार में मिल सके। इसीलिए उसे वन विहार भोपाल छोड़ा जाएगा।

काले हिरण के बच्चे को हमारे कर्मचारी द्वारा रोजाना सुबह-शाम एक-एक लीटर दूध दिया जाता है। दूध भी उस बच्चे को निप्पल से पिलाने का कार्य करते हैं ताकि उसे यह ना महसूस हो कि वह अपने परिवार से और अपनी मां से बिछड़ कर उसे कहीं कैद कर लिया है। पिछले एक माह से हम उसे एक इंसान के बच्चे की तरह पालने का कार्य कर रहे हैं। हमारे कर्मचारी गुलाब इंगले निरंतर उसकी सेवा में लगे हुए रहते हैं। पिछले एक माह में गुलाब इंगले की बातों को काले हिरण का बच्चा समझने लगा है। अब वह इस कर्मचारी के बगैर नहीं पाता। इसलिए हमारा कर्मचारी निरंतर उसकी सेवा में लगा रहता है।
अमित सिंह चौहान
वन परिक्षेत्र अधिकारी, भैंसदेही

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