बसंत पंचमी: भारत भारती में सम्पन्न हुआ विद्यारम्भ संस्कार

सांसद डीडी उइके समेत बच्चों के अभिभावकों ने समर्पित की यज्ञ में आहुति

  • बैतूल। भारत भारती आवासीय विद्यालय में विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य/पूजन दिवस बसन्त पञ्चमी के अवसर पर शिशुओं के विद्यारंभ संस्कार समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्ज्वलन और माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ।

    इस अवसर पर गायत्री परिवार के दिव्यांशु पारखे, रविशंकर पारखे ने विद्यारंभ संस्कार पूजन एवं हवन विधि द्वारा संपन्न कराया। विद्यालय द्वारा आसपास के 25 ग्रामों जामठी, भारत भारती, बैतूल, सोनाघाटी, धनोरा, कोसमी, टेमनी, धौल कढ़ाई, खेड़ी सावलीगढ, सिल्लौट, साकादेही, उड़दन, गजपुर, नयागांव, आदि ग्रामों के 252 बालक-बालिकाओं का पंजीयन किया गया।

    विद्यारंभ संस्कार कार्यक्रम में 142 परिवारों के बालक-बालिकाएं और अभिभावक सम्मिलित हुए। जहां विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच नौनिहालों का विद्यारम्भ संस्कार किया गया। अभिभावकों ने अपने पाल्य को गोद में लेकर प्रथम अक्षर ॐ लिखा।

    इस अवसर पर सांसद डीडी उइके, अमोल पानकर, दीपक मालवीय, भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव मोहन नागर, जनजाति क्षेत्र की शिक्षा के राष्ट्रीय सह संयोजक बुधपाल सिंह ठाकुर, विद्यालय के प्राचार्य गोविन्द कारपेंटर समेत सभी आचार्य और दीदी उपस्थित रहे।

    अपने उद्बोधन में श्री उइके ने कहा कि आज के दिन का विशिष्ट महत्व है। आज मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस है। साथ ही गायत्री परिवार के संस्थापक पूज्य आचार्य श्रीराम शर्मा का आध्यात्मिक जन्मदिन भी है। आज से प्रकृति में श्रंगार रस व्याप्त होने लगता है। पेड़ों में नये पत्तों का पल्लवन होता है, समूची धरती श्रृंगारित हो उठती है। प्रकृति हमारी प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शक बनती है। इस विशेष वातावरण में विद्यारंभ संस्कार अत्यंत फलदायी होता है।

    संस्कारों के महत्व के विषय में बताते हुए श्री उइके ने कहा कि मानव जीवन में सोलह संस्कारों का विशेष स्थान माना जाता है। इन संस्कारों के कारण ही मनुष्य जीवन में यश पाता है और जीवन में पूर्णता प्राप्त होती है। यही संस्कार हमें ईश्वर के दिव्य प्रवाह से जोड़ते हैं।

    इस विद्यालय में विद्यारंभ संस्कार में सम्मिलित हुए अभिभावकों का दायित्व है कि वे अपने बच्चों को संस्कारयुक्त वातावरण दें। जिससे वे समाज में यश प्राप्त कर भारत निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। इस दिशा में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के आचार्य-दीदियों का प्रयास सराहनीय है। यज्ञ का संचालन दिव्यांशु पारखे ने किया। आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश पाटिल ने किया।