शुगर प्लांट के केमिकल से जहर बन रहा नदी का पानी

मछलियों की हो रही मौत, किसानों ने भी बंद किया पानी का उपयोग करना

  • सूर्यप्रकाश शेटे, बोरदेही
    आमला ब्लॉक के ग्राम खजरी में स्थापित शुगर प्लांट ताप्ती एग्रो शुगर मिल के केमिकल युक्त जहरीले गंदे अपशिष्ट एवं पानी के बेल नदी में मिलने से नदी का पानी जहरीला हो रहा है। इसके चलते रहवासियों ने बेल नदी के माध्यम से निस्तार वाले पानी का उपयोग भी अब बंद कर दिया है। केमिकल का असर इतना घातक है कि नदी में पाली जा रही मछलियों की मृत्यु भी हो रही है। शुगर प्लांट के केमिकल युक्त जहरीले पानी को बेल नदी में मिलने से रोकने हेतु क्षेत्रवासियों ने उच्च अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी भी दी, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई उचित कार्यवाही नहीं हुई। जहरीले पानी से निजात नहीं मिल पाने से अब आमजन में आक्रोश पनप रहा है।नियमानुसार शुगर प्लांट को निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन करना चाहिए, जो कि नहीं किया जा रहा है।

    ग्राम मोरखा के सक्रिय समाजसेवी किशनसिंह रघुवंशी, अधिवक्ता कैलाश सिंह वर्मा, देवीसिंह रघुवंशी ने शुगर प्लांट प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए बताया कि ग्राम खजरी में स्थित शुगर प्लांट ताप्ती एग्रो इंडस्ट्रीज का केमिकल युक्त जहरीला कचरा एवं पानी समीपस्थ बेल नदी में मिल रहा है। जिससे बेल नदी का पानी भी जहरीला हो रहा है। बेल नदी के पानी का उपयोग हम सभी क्षेत्रवासी निस्तार के लिए करते हैं। लेकिन, वर्तमान में पानी गंदा होने के कारण हमने इसका उपयोग करना बंद कर दिया है। जिससे अब हमारे सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि जहरीले दूषित पानी के कारण हम सभी का जीना दुश्वार हो गया है। वहीं मवेशियों के लिए पीने के पानी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।प्लांट संचालक द्वारा इस अपशिष्ट की उचित व्यवस्था करना चाहिए।

    अब तक नहीं निकला समाधान
    मोरखा के ग्राम पटेल डॉ. रामकुमार पटेल, प्रताप सिंह रघुवंशी, ग्राम प्रधान विष्णु उईके ने बताया कि शुगर प्लांट से निकलने वाले जहरीले कचरा एवं पानी बेल नदी में आकर मिल रहा है। जिस कारण बेल नदी में पाली जा रही हजारों मछलियों की मृत्यु हो चुकी है और काफी नुकसान हो रहा है। पानी इतना जहरीला हो गया है कि हमने इसे उपयोग में लाना भी बंद कर दिया है। खजरी के समीप बेल नदी में मिलने वाले जहरीले पानी का असर ग्राम बांगा में बने स्टॉप डेम तक पड़ रहा है। किसानों द्वारा खेतों में केमिकल युक्त पानी का उपयोग भी बंद कर दिया है। किसानों का मानना है कि उक्त जहरीले पानी से फसलों को भारी नुक़सान हो सकता है। किसानों का कहना है कि इस समस्या के समाधान हेतु उच्च अधिकारियों को फोन पर अवगत कराया जा चुका है। नायब तहसीलदार आमला ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं निकला।

    मछुआरों पर जीविकोपार्जन का संकट
    शुगर प्लांट से निकलने वाले केमिकल युक्त जहरीले पानी के बेल नदी में मिलने के कारण मछुआरों के जीविकोपार्जन का एक मात्र साधन मछलियों की मृत्यु हो गई है। ग्राम के मछुआरे अखलेश कहार, सुखदास कहार, कल्लु कहार ने बताया कि ग्राम में लगभग आधा सैकड़ा मछुआरों के परिवार निवास करते हैं। जिनका मछली पालन ही रोजगार का साधन है।नदी की सभी मछलियों की मृत्यु हो जाने के कारण हम सभी मछुआरों के सामने जीविकोपार्जन का बहुत बड़ा संकट आ गया है। अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

    इस संबंध में जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
    रोहित विश्वकर्मा, नायब तहसीलदार, आमला
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    शुगर प्लांट का जहरीला अपशिष्ट बेल नदी में मिलने से नदी का पानी दूषित हो रहा है। जिससे किसानों एवं मछुआरों के सामने समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे से चर्चा कर उचित समाधान निकाला जाएगा।
    किशनसिंह रघुवंशी, वरिष्ठ भाजपा नेता, मोरखा

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