ओलावृष्टि: 72 किसानों की फसलों को नुकसान, 20 को 50 प्रतिशत से ज्यादा

राजस्व और कृषि विभाग की टीम ने किया था सर्वे, राहत के लिए मांगा 6 लाख का आवंटन

फाइल फोटो
  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    बैतूल जिले में 9 जनवरी को ओलावृष्टि और तेज बारिश के कारण शाहपुर क्षेत्र के गांवों में फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। इस क्षेत्र के छह गांवों में ओलावृष्टि अधिक होने के कारण गेहूं, चना, मसूर, मटर, तुअर समेत सब्जी की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं। किसानों की फसलें बर्बाद होने के बाद प्रशासन ने राजस्व और कृषि विभाग की टीम बनाकर नुकसान का सर्वे कराया है। एक सप्ताह में प्रभावित गांवों में किसानों के खेतों में टीम ने पहुंचकर नुकसान का आकलन कर लिया है। प्रभावित गांवों में 72 किसानों के खेतों में 35 से 50 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान का आकलन किया गया है। हालांकि किसानों का कहना है कि उनके खेत में मटर, मसूर, सरसों जैसी फसल तो शत प्रतिशत खत्म हो चुकी है।

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    राजस्व और कृषि विभाग की टीम के द्वारा सबसे अधिक प्रभावित हुए ग्राम रामपुर माल, खोखरा, ढप्पा, टेमरा में सर्वे करने के बाद यह पाया है कि कुल 72 किसानों के खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसमें भी मात्र 20 किसान ही ऐसे हैं जिनके खेतों में 50 प्रतिशत से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचा है। शेष 52 किसानों के खेतों में करीब 35 प्रतिशत तक ही फसल प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की जिस फसल में बालियां निकल रहीं थीं, उसे भी नुकसान पहुंचा है लेकिन वह अभी नजर नहीं आ रहा है। बालियों पर ओले बरसने के कारण दाना नहीं भर पाएगा और बारीक भी हो जाएगा। लेकिन, सर्वे करने के लिए पहुंची टीम के द्वारा इसे नुकसान नहीं माना जा रहा है।

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    किसानों का कहना है कि फसल पकने के बाद ही बालियों में दाना न भरने या फिर बारीक होने की स्थिति सामने आएगी। वर्तमान में ऐसी फसलों का नुकसान दर्ज नहीं किया गया है जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ जाएगा। जिन किसानों के द्वारा मटर की फसल अपने खेत में लगाई थी उसे भी ओलों की बारिश से खासा नुकसान पहुंचा है। मटर के पौधे पूरी तरह से जमीन पर बिछ गए और टहनियां भी जगह-जगह से टूट चुकी हैं। फल्लियों में भी दाना बिखर गया लेकिन सर्वे में उनके खेतों में 50 प्रतिशत ही नुकसान माना गया है।

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    किसानों की मौजूदगी में सर्वे के दिए थे निर्देश
    ओलावृष्टि से खेतों में फसलें प्रभावित होने के बाद विधायक ब्रम्हा भलावी ने भी गांवों में पहुंचकर खेतों में बर्बाद हुई फसलों का निरीक्षण किया था और तहसीलदार एवं अन्य अधिकारियों को सही ढंग से सर्वे करने और किसी भी किसान को न छोड़ने के निर्देश दिए थे। विधायक ने गांवों में किसानों से भी अपनी मौजूदगी में सर्वे कराने के लिए कहा था। किसानों ने सर्वे के दौरान टीम को खेतों में फसलों की स्थिति भी दिखाई और उचित मुआवजा दिलाने के लिए गुहार भी लगाई। राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किए गए नुकसान के सर्वे में मात्र 20 किसानों के खेतों में ही 50 प्रतिशत के नुकसान का आकलन किए जाने से किसानों में असंतोष पनपने लगा है। विधायक प्रतिनिधि नरेंद्र मिश्रा ने भी प्रभावित गांवों का दौरा किया था और पाया था कि ओलावृष्टि से फसलों को 60 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है।

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    अभी तक नहीं मिल पाई किसानों को कोई राहत
    राजस्व विभाग के द्वारा फसलों को ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन पूरा करने के बाद रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी है। इसके आधार पर ही मुआवजे का भी निर्धारण कर करीब छह लाख रुपये राशि की मांग की गई है। ओलावृष्टि और अतिवृष्टि हुए दस दिन बीत जाने के बाद भी किसानों को अब तक मदद नहीं मिल पाई है। शाहपुर एसडीएम अनिल सोनी ने बताया कि फसल नुकसानी का सर्वे पूरा कर लिया गया है। राशि का आंवटन प्रदान करने की मांग की गई है। जैसे ही राशि मिलती है वैसे ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।

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