छापों की खुल रही पोल: बोथी गांव में मिला अवैध शराब का जखीरा

दिखावा साबित हो रही चुनाव के मद्देनजर आबकारी विभाग द्वारा जिले भर में की गई कार्यवाही

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    चुनावों की घोषणा होने के बाद और महत्वपूर्ण पर्वों के पहले आबकारी विभाग द्वारा जिले भर में कथित छापामार कार्यवाही की जाती है। मीडिया को इन कार्यवाहियों के बड़े-बड़े आंकड़े दिखाते हुए फ़ोटो सहित प्रेस नोट भिजवाकर खूब वाहवाही भी लूटी जाती है। लेकिन, विभाग की यह कार्यवाही केवल रस्म अदायगी भर होती है। विभाग जहाँ-जहाँ कार्यवाही करता है वहाँ चंद घण्टों बाद ही फिर अवैध कारोबार उसी रफ्तार से शुरू हो जाता है। बाद में ना विभाग कोई सुध लेता है और ना ही अवैध शराब की बिक्री बंद करवाने जैसी कोई नीयत ही दिखाता है। यही कारण है कि अवैध शराब का यह कारोबार बेरोकटोक चलता रहता है।

    आबकारी विभाग ने पिछले दिनों भैंसदेही क्षेत्र में भी खूब ताबड़तोड़ कथित कार्यवाहियां की थी। इसी क्षेत्र के एक गांव में भैंसदेही पुलिस पहुंची तो वहाँ अवैध शराब का जखीरा बरामद हुआ है। मामला बोथी गांव का है। पुलिस के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा भारी मात्रा में अवैध शराब बेचने की सूचना पर ग्राम बोथी में दबिश देकर शराब रेड कार्यवाही की गई। जिसमें आरोपी रविश पिता नत्थूलाल लहरपुरे (30) निवासी ग्राम बोथी को पकड़ा।

    आरोपी के कब्जे से मिली इतनी अवैध शराब
    पुलिस ने बताया कि आरोपी के कब्जे से 1 पेटी एमडी, 1 पेटी आईबी, 4 पेटी आफिसर च्वाईस, 4 पेटी देशी सफेद प्लेन मदिरा, 4 पेटी लाल मसाला कुल 14 पेटी शराब पकड़ी गई। यहाँ से कुल 123 लीटर शराब बरामद हुई है। पुलिस ने आरोपी रविश को धारा 34 (2) आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया है।

    बाकी दिनों में निश्चिंत रहता है विभाग
    मजेदार बात यह है कि शेष दिनों में विभाग पूरी तरह यह मानकर निश्चिंत रहता है कि जिले में कहीं अवैध शराब बिक ही नहीं रही। इन दिनों में विभाग द्वारा ना तो कहीं कार्यवाही किए जाने की खबरें आती है और ना ही वास्तव में की जाती है। दूसरी ओर ऐसे सामान्य दिनों में भी पुलिस को अवैध शराब बेचने वाले लगातार मिलते भी हैं और बड़े पैमाने पर शराब जब्त भी होती है। खास बात यह है कि विभाग इन विशेष अभियानों में हर बार उन्हीं ठिकानों पर कार्यवाही की जाती हैं जहां पहले भी की जा चुकी होती है। इससे साफ है कि इन अवैध ठिकानों को स्थाई रूप से बंद करवाने की विभाग की जरा भी मंशा नहीं है, कारण जो भी हो।

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