पीएम आवास में फर्जीवाड़ा: महीनों बाद भी पुलिस गिरफ्त से बाहर आरोपी

पंचायत समन्वय अधिकारी, कम्प्यूटर ऑपरेटर और रोजगार सहायक पाए गए थे दोषी

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    पीएम आवास योजना (PM Awas Yojana) में फर्जीवाड़ा (forgery)करने वाले आरोपी महीनों बाद भी गिरफ्तार (Arrested) नहीं हो पाए है। मामला बैतूल की आठनेर जनपद पंचायत (Athner Janpad Panchayat) का है। इस ब्लॉक की ग्राम पंचायत राजोला में यह धोखाधड़ी हुई थी। यहां हितग्राहियों की 12.96 लाख से अधिक की राशि का गोलमाल होना पाया था। जांच में पंचायत समन्वय अधिकारी अमरलाल नागले, कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रवीण गायकवाड़ और रोजगार सहायक मेघराज सोलंकी को दोषी पाया था। इसके बाद तीनों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उसके बाद से वे फरार हैं।

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    गरीबों के स्वीकृत आवास में वित्तीय घोटाला
    ग्राम रोजगार सहायक, कम्प्यूटर आपरेटर और पंचायत समन्वय अधिकारी ने राजोला के पीएम आवास हितग्राहियों के अधूरे मकानों को पूर्ण बता दिया था। फिर इन हितग्राहियों के बजाए दूसरे के बैंक खातों में राशि डालकर फर्जीवाड़ा किया था।

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    जांच में 12.85 लाख की मिली थी गड़बड़ी
    सुनियोजित तरीके से किए गए इस फर्जीवाड़े की जांच आठनेर जनपद के पंचायत इंस्पेक्टर प्रेम पानकर की टीम द्वारा की गई। जांच में शिकायत सही पाई गई। लगभग 12 लाख, 96 हजार, 888 रुपए का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। इस पर बैतूल जिला पंचायत सीईओ के आदेश के बाद 27 अक्टूबर 2021 को रोजगार सहायक, कम्पयूटर आपरेटर और पंचायत समन्वय अधिकारी पर धारा 420, 409 का मामला दर्ज कराया था।

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    अभी तक नहीं हो सकी तीनों की गिरफ्तारी
    तीनों आरोपियों पर मामला तो दर्ज हो गया पर महीनों बाद भी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे आठनेर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। तीनों आरोपी अभी तक फरार चल रहे हैं। गिरफ्तारी नहीं होने से उन्हें खुद को बचाने हाथ पांव मारने के भी भरपूर मौके मिल रहे हैं। बताते हैं कि आरोपी अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट तक जा चुके हैं। हालांकि उन्हें कामयाबी नहीं मिली है। इधर ठगी का शिकार हुए हितग्राहियों ने जल्द गिरफ्तारी कर उन्हें न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

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