उपेक्षित विरासत: कभी 35 परगनों पर चलती थी खेड़ला किला से हुकूमत, अब हो चुका बदहाल

किले को संरक्षित व राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने गोंगपा ने उठाई आवाज

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    कभी अपने वैभव और समृद्धि के लिए जाना जाने वाला खेड़ला किला आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इस किले की बदहाली और जर्जर अवस्था को देखते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने पुरातत्व विभाग से गोंडवाना कालीन विरासत खेड़ला किले को संरक्षित तथा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की है। गोंगपा ने क्षेत्रीय प्रबंधक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की गुहार लगाई है।

    ज्ञापन के माध्यम से जिला अध्यक्ष हेमंत सरियाम ने बताया कि बैतूल जिला मुख्यालय के उत्तर-पूर्व दिशा में 7 किलोमीटर की दूरी पर खेड़ला गढ़ किला स्थित है। मध्ययुगीन काल का यह एक प्रसिद्ध गढ़ है, जो कि माचना और सापना नदी के परिक्षेत्र में स्थित है। गढ़वीरों की गाथाओं के अनुसार खेरलाल कुमरा (कुमरे) नामक काया वंशीय गोंड समुदाय के राजा ने खेड़ला गढ़ का निर्माण ईसवी सन् के प्रथम शताब्दी में किया था। उन्होंने बताया जिला बैतूल के गजेटियर में खेड़लागढ़ का प्रशासनिक ईकाई के रूप में उल्लेख मिलता है कि ईसा पश्चात विभिन्न शासको द्वारा खेड़लागढ तथा गढ़ अधीन 35 परगनों पर शासन संचालित होता था। 

    सन् 1826 में ब्रिटिश शासन में शामिल हुआ खेड़लागढ़
    सालबर्डी युद्ध के पश्चात सन् 1826 में खेडलागढ़ क्षेत्र को औपचारिक रूप में ब्रिटिश शासन में शामिल कर लिया गया था। सन् 1894-99 में जिले में राजस्व बन्दोबस्त लागू किए गए परंतु आज तक खेड़ला गढ़ विरासत को राजस्व अभिलेख तथा पुरातत्व संरक्षण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इसके कारण ऐतिहासिक विरासत को क्षति हो रही है। राजस्व रिकॉर्ड अवलोकन के पश्चात देखने में आया कि लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल एरिया में स्थित पहाड़ी पर किला स्थित है। गोंगपा ने लोकहित को देखते हुए खेड़ला गढ़ किले को पुरातत्व संरक्षण एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की मांग की। जिलाध्यक्ष हेमंत सरियाम ने कहा इस किले को आज भी सरकार की कृपा दृष्टि की ज़रूरत है। गोंडवाना का यह किला छोटा भले है, लेकिन सामरिक दृष्टि से महत्तवपूर्ण है और गोंड रियासतों के बीच अपना प्रमुख स्थान रखता है।

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