चमत्कार… बैतूल में 2 साल बाद अचानक जिंदा हो उठी एक महिला

कोरोना में इकलौते बेटे को खोने के बाद 8 माह से मदद को भटकने को थी मजबूर

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    आपको शायद यकीन न हो, लेकिन यह सच है कि बैतूल जिले में 2 साल पहले मृत एक महिला अचानक ही जीवित हो उठी। दरअसल, महिला की वास्तव में भले ही मौत नहीं हुई थी, लेकिन लापरवाह सिस्टम ने उसे सरकारी दस्तावेजों में मृत बता दिया था और सिस्टम की निष्ठुरता के हाल यह थे कि उसे खुद को जीवित बताने के लिए लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। यह हाल भी तब थे जब उसके इकलौते बेटे की कोरोना से मौत हो गई थी और उसे सरकारी मदद की सख्त दरकार थी। आला अफसरों तक जब महिला की फरियाद पहुंची तब आनन-फानन में उसे जीवित घोषित किया गया। महिला को मृत बताने के साथ ही उसके पति को भी लापता बता दिया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में हालांकि वह अभी भी लापता ही चल रहा है। यह बात अलग है कि सिस्टम से गायब रमेश न तो कहीं गया था और न लापता हुआ था।
    सिस्टम की लापरवाही झेल रही यह महिला है बैतूल से महज 7 किमी दूर ग्राम झाड़ेगांव में रहने वाली 50 वर्षीय पुष्पा पवार। पुष्पा ने 22 अप्रैल 2021 को अपने इकलौते बेटे राजकुमार को कोरोना में खो दिया। मजदूरी करने वाली पुष्पा ने जब बेटे की मौत के बाद सरकारी सहायता के लिए मदद की गुहार लगाई तो वह खुद हैरान रह गई। उसके संबल योजना के कार्ड में उसे मृत बता दिया गया था। जबकि, उसके पति को लापता और उसके मृत बेटे को योजना में अपात्र करार कर दिया गया। महिला के पास न तो कोई जमीन है और न कोई जायदाद। मजदूरी कर उसके परिवार का गुजारा चलता है।
    पंचायत सचिव ने बता दिया था मृत
    पुष्पा ने 2 अप्रैल 2018 को सम्बल योजना के लिए आवेदन किया था। इस पर 5 मई 2018 को उसका पंजीयन कर दिया गया। ग्राम सचिव सीमा ने इस आवेदन का 6 सितम्बर 2019 को सत्यापन किया। इसमे सत्यापन की स्थिति में पुष्पा को अपात्र बताते हुए श्रमिक की मृत्यु हो गई, ऐसा लिख दिया। ऐसा ही पुष्पा के पति रमेश के मामले में भी किया गया। उसे अपात्र बताते हुए भौतिक सत्यापन में गैर मौजूद लिख दिया गया। रमेश आज भी सरकारी रिकार्ड में लापता है।
    पत्नी हुई जीवित, पति अभी भी लापता
    मामला सामने आने के बाद श्रम विभाग ने महिला के बगैर अपील किए ही महिला को अपने दस्तावेजों में जिंदा दिखाते हुए पात्र भी घोषित कर दिया। उसके मृत पुत्र राजकुमार को भी पात्र की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। लेकिन पुष्पा के पति रमेश को अब भी सम्बल का पोर्टल लापता बता रहा है। श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने बताया कि यह मामला जैसे ही उनके संज्ञान में आया पोर्टल में सुधार कर महिला को पात्र घोषित कर दिया गया है। इस मामले में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
    परिवार को मिल सकेगी यह सहायता
    सम्बल में शामिल किए जाने के बाद पुष्पा को पुत्र की मृत्यु पर सरकारी तौर पर मिलने वाला 2 लाख का मुआवजा मिल सकेगा। हालांकि अभी नॉमिनी की हैसियत से राजकुमार की पत्नी इसकी दावेदार है। अगर राजकुमार को पहले ही पात्र बता दिया जाता तो उसकी अंत्येष्टि के लिए भी 5 हजार की सरकारी मदद के अलावा घर के सदस्यों को अन्य सरकारी लाभ और शिक्षा मुफ्त मिल जाती।